इस तरह बनाएं कुदरती रंग, होली का आनंद कई गुना बढ़ जायेगा

By संतोष उत्सुक | Mar 20, 2019

रंगों के त्योहार होली पर तो रंग खिलते ही हैं, हमारे भारतीय जीवन में खुशी के दूसरे मौके भी आते हैं जब हमें बाज़ार से कृत्रिम रंग खरीदने पड़ते हैं। जान पहचान के दुकानदार से खरीदते हुए भी डर लगा रहता है कि होली खेलते हुए रंग आँख में गिर गया, चेहरे पर ज़्यादा लग गया या त्वचा पर खुजलाहट, रूखापन जैसी समस्या उग आई तो परेशानी होगी। रंगों से बदरंग होने से बचने के लिए हर बरस कितने ही लेख छापे जाते हैं। रंग उतारने के लिए अलग से उत्पाद बेचे जाते हैं।

कुछ भी हो हर्बल या इकोफ्रेंडली के नाम पर पूरे विश्वास के साथ बेचे जा रहे रंगों पर भी हम पूरा भरोसा तो नहीं करते क्यूंकि अब जमाने व बाज़ार की हवा सिर्फ पैसे कमाने के लिए चलती है। इस ट्रेंड से तंग आकर लोग कुदरती रंगों के प्रयोग को प्रोत्साहित कर रहे हैं। इन रंगों को घर पर ही बनाया जा सकता है। इसमें मुख्यतः कुछ फूल शामिल हैं जिनके वृक्ष और पौधे देश में उपलब्ध हैं लेकिन हमें उनकी गुणवत्तापूर्ण उपयोगिता का पता नहीं है। इन वृक्षों को ज़्यादा जगह उगाया जाता इनकी देखभाल निरंतर की जाती तो इनसे प्राप्त उपयोगी रंग, ईमानदार रंगरेज की तरह हमारे जीवन के उत्सवों में सुख देने वाले रंग भरते। जिस तरह से हमारी रसोई के खाद्यों, सब्जियों, फलों व मसालों में कितने ही चिकित्सक छिपे हैं उसी तरह वृक्षों, पौधों, फूलों, पत्तियों यहाँ तक कि मिट्टी और जड़ों में भी लाभकारी रंग व अन्य उपयोगी तत्व उपलब्ध हैं। बस इन्हें खुली आँख और समझदार दिमाग से देखने की ज़रूरत है।

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भगवान कृष्ण द्वारा खेला जाने वाला रंग बनाने के लिए आज भी अनेक जगह टेसू के फूल उपलब्ध हैं। यह रंग पारम्परिक रंग माना जाता है। इनकी पंखड़ियों को सुखा कर चंदन पाउडर या आटे में मिलाकर सूखा केसरी रंग तैयार हो जाता है। हालांकि पानी की कमी को ध्यान में रखते हुए हमें सूखे रंग से होली खेलनी चाहिए लेकिन कम मात्रा में गीला रंग बनाने के लिए टेसू के फूलों को किसी बर्तन में पानी में रात भर भिगोएँ, सुबह तक फूल रंग छोड़ देंगे और रंग तैयार हो जाएगा। हरा रंग बनाने के लिए अच्छी क्वालिटी के मेहँदी पाउडर को आटे में मिलाने से हरा रंग बन जाएगा। बेस बनाने के लिए अरारोट, चंदन, पिसा चावल या आटा में से कुछ भी प्रयोग कर सकते हैं। गीला हरा रंग बनाने के लिए धनिया, पालक या अन्य सब्जियाँ पीसकर पानी में मिलाएँ। लाल रंग के लिए सिंदूर और चंदन को मिला सकते हैं। इसके इलावा लाल गुड़हल के फूल की पत्तियों को छाँव में सुखाकर उसका पाउडर बनाकर चंदन मिलाकर लाल रंग बन सकता है। गीले के लिए इसमें पानी मिला लें। पलिता, मदार, पांग्री के फूलों से भी लाल रंग मिल सकता है। गहरे गुलाबी रंग के लिए चुकंदर का पेस्ट बनाकर धूप में सुखा लें। इसके पाउडर को चावल के आटे या अन्य आटे में मिलाकर सूखा रंग तैयार हो जाएगा। गीले के लिए पानी में कुछ टुकड़े चुकंदर के डालने से ही रंग बन जाता है। हरसिंगार के फूलों से नारंगी रंग बनाया जा सकता है। पीला रंग बेसन में हल्दी डालकर बन जाता है। बेसन की जगह मुलतानी मिट्टी भी प्रयोग की जा सकती है। गेंदे के पीले फूलों को पानी में उबाल कर, अमलतास व पीले सेवन्ती फूलों से भी रंग निकाल सकते हैं। अनार के छिलकों को उबाल कर, बुरांस के फूलों से भी रंग निकालते हैं। नीले रंग के लिए नील के पौधों पर निकलने वाली फलियां और नीले गुलहड़ के फूलों का प्रयोग हो सकता है। कुदरती तरीके से निकाले गए रंगों से होली खेलने की संभावनाएं अनंत हैं। थोड़ी मेहनत करनी पड़ेगी होली का आनंद कई गुणा नया, स्वस्थ व सुरक्षित हो जाएगा।

-संतोष उत्सुक

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