By अनन्या मिश्रा | Aug 11, 2026
अमरनाथ यात्रा शुरू होने के बाद बाबा के दर्शन के लिए शिव भक्तों का तांता लग गया है। हर कोई बाबा बर्फानी को देखने के लिए उत्सुक नजर आ रहा है। इस यात्रा में सबसे कठिन और अहम तीर्थों में से एक मानी जाती है। भक्त भगवान शिव को अर्पित करने के लिए अपने साथ प्रसाद और पूजन की सामग्री लेकर जाते हैं।
शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाना शुभ माना जाता है। इससे तीन गुण सत, रज और तम संतुलित होते हैं।
मिश्री और फल अर्पित करना भी शुद्धता का प्रतीक माना जाता है। यह भक्ति की सरलता को दर्शाता है।
नारियल अर्पित करना भगवान के प्रति आपके समर्पण को दिखाता है। इसलिए भी प्रसाद चढ़ाया जाता है।
पूजा में कपूर का इस्तेमाल वातावरण को शुद्ध करने और सकारात्मक ऊर्जा पैदा करने के लिए किया जाता है।
भगवान शिव के मंदिर से लाए प्रसाद को फौरन नहीं खाना चाहिए। इसको सबसे पहले घर के मंदिर में रखें। इसके बाद आप खास सदस्यों और दोस्तों को बांटें।
तीर्थ का प्रसाद खुद अकेले खाने की जगह दूसरों को खिलाने से इसका फल कई गुना बढ़ जाता है।
प्रसाद खाने से पहले हाथ-पैर धोकर शुद्ध हो जाएं और कभी भी जूठे हाथों से प्रसाद को स्पर्श न करें।
हमेशा प्रसाद को आने के बाद ही बांटे, इसको ज्यादा समय के लिए नहीं रखना चाहिए।
बता दें कि अमरनाथ यात्रा में ले जाने वाली पूजन सामग्री सिर्फ बाजार से खरीदी गई वस्तुएं नहीं है। बल्कि यह भक्त की भावनाएं हैं, जो अपने आराध्य को समर्पित होता है। यह वस्तुएं हमको यह सिखाती हैं कि ईश्वर की भक्ति में भाव होना जरूरी होता है। जब हम पवित्र हृदय से बाबा बर्फानी को यह भेंट करते हैं, तो हम खुद को उनके चरणों में पूरी तरह समर्पित कर देते हैं। इसलिए भक्त बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए काफी लंबा इंतजार करते हैं।