Prabhasakshi NewsRoom: संविधान और लोकतंत्र की दुहाई देने वाला विपक्ष बंगाल की कंगारू कोर्टों पर क्यों नहीं कुछ बोलता?

By नीरज कुमार दुबे | Jul 01, 2024

तृणमूल कांग्रेस द्वारा शासित पश्चिम बंगाल में भ्रष्टाचार चरम पर होने के आरोप तो लगते ही रहते हैं साथ ही वहां से जिस प्रकार की हिंसा और अमानवीयता की खबरें आती हैं वह सभ्य समाज के माथे पर कलंक की तरह है। पश्चिम बंगाल में एक महिला की सरेआम निर्ममता से पिटाई का जो वीडियो वायरल हुआ वह दर्शा रहा है कि राज्य में आपराधिक तत्वों के मन में कानून का भय नहीं रह गया है। बताया जा रहा है कि आरोपी अपनी "इंसाफ सभा" लगा कर लोगों से ऐसे ही व्यवहार करता है। यह वीडियो आप देखेंगे तो ऐसा लगेगा कि शरिया अदालतें लगा कर अपना कानून चलाया जा रहा है। सवाल उठता है कि क्या अदालतें इस चिंताजनक स्थिति का स्वतः संज्ञान लेंगी?

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इस बीच, यह मुद्दा राजनीतिक रूप से भी तूल पकड़ गया है। विपक्षी दल भाजपा, कांग्रेस और माकपा ने इस घटना के लिए ममता बनर्जी सरकार की आलोचना की है, वहीं सत्तारुढ़ तृणमूल कांग्रेस ने कहा है कि मामले की जांच की जाएगी। भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने की तृणमूल कांग्रेस सरकार को आड़े हाथों लेते हुए आरोप लगाया है कि महिलाओं के लिए यह प्रदेश सुरक्षित नहीं है। उन्होंने कहा, ‘‘संदेशखलि हो, उत्तर दिनाजपुर हो या कई अन्य स्थान, दीदी का पश्चिम बंगाल महिलाओं के लिए असुरक्षित है।’’ वहीं, भाजपा आईटी प्रकोष्ठ के प्रमुख अमित मालवीय ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘यह पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के शासन का कुरूप चेहरा है।'' उन्होंने दावा किया कि पश्चिम बंगाल के हर गांव में एक संदेशखालि है और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ‘‘महिलाओं के लिए अभिशाप’’ हैं। अमित मालवीय ने पोस्ट में कहा, ‘‘बंगाल में कानून-व्यवस्था का नामोनिशान नहीं है। क्या ममता बनर्जी इस राक्षस के खिलाफ कार्रवाई करेंगी या उसका बचाव करेंगी, जैसे उन्होंने शेख शाहजहां के लिए किया था?’’ इसके अलावा, भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव भाटिया ने कहा, "बंगाल की जनता ममता बनर्जी से त्रस्त है।'' उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी को जनता की सुरक्षा की चिंता नहीं है बल्कि टीएमसी के गुंडों की सुरक्षा की चिंता है।

वहीं, माकपा के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में ममता बनर्जी सरकार पर हमला बोला। सलीम ने बाद में एक पोस्ट में एक वीडियो साझा किया जिसमें पुलिसकर्मी आरोपी के साथ इस्लामपुर पुलिस स्टेशन में घुसते दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने दावा किया, ‘‘हमेशा की तरह संतरी गार्ड सलामी देने ही वाला था!’’ दूसरी ओर, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में आम लोगों और तृणमूल के राजनीतिक विरोधियों पर हमले जारी हैं। उन्होंने कहा, ''किसी महिला को इस तरह से कैसे पीटा जा सकता है? किसी भी महिला पर हमला बर्बर और निंदनीय है।’’ कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘हिंसा की ऐसी घटनाएं पश्चिम बंगाल का नाम खराब कर रही हैं।’’

वहीं तृणमूल के स्थानीय विधायक हमीदुर रहमान ने आरोपियों के साथ किसी भी तरह के संबंध से इंकार किया और खुद को घटना से अलग किया। उन्होंने कहा कि यह गांव का मामला है और पार्टी से इसका कोई संबंध नहीं है। वहीं, तृणमूल के जिला अध्यक्ष कन्यालाल अग्रवाल ने इस घटना के लिए जोड़े के कथित अवैध संबंध को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि यह ‘‘गांव वालों को पसंद नहीं आया’’। उन्होंने कहा कि पार्टी इस मामले की जांच करेगी। इसके अलावा, तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता शांतनु सेन ने घटना की निंदा की, साथ ही कहा कि वाम मोर्चा शासन के दौरान भी इस तरह की अवैध अदालतें आम थीं। वहीं तृणमूल सांसद सायोनी घोष ने कहा है कि महिला सुरक्षा और सम्मान के नाम पर हमें भाजपा से सीखने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि बंगाल में महिलाएं सुरक्षित हैं इसलिए वह ममता बनर्जी को वोट देती हैं।

वैसे तृणमूल कांग्रेस के नेता कुछ भी कहें, बंगाल में महिलाओं पर जमकर अत्याचार हो रहे हैं। रविवार को राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य डेलिना खोंगडुप ने पश्चिम बंगाल के कूचबिहार जिले में निर्वस्त्र कर प्रताड़ित की गई भाजपा की एक महिला नेता के घर गईं और उनसे मुलाकात की। डेलिना ने कहा कि आयोग पीड़िता की राजनीतिक पहचान पर गौर नहीं करेगा। हम आपको बता दें कि भाजपा की कोलकाता ईकाई की महासचिव अग्निमित्र पॉल ने दावा किया है कि स्थानीय इकाई की अल्पसंख्यक मोर्चा की अध्यक्ष को 25 जून को तृणमूल कांग्रेस के बदमाशों ने उस समय पीटा और निर्वस्त्र कर दिया जब वह खेत में मवेशी चरा रही थी। बहरहाल, यहां सवाल यह उठता है कि आजकल लोकतंत्र और संविधान की दुहाई दे रहे विपक्षी गठबंधन इंडिया के नेता आखिर बंगाल की घटनाओं और वहां चल रही कंगारू कोर्टों पर क्यों नहीं कुछ बोलते?

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