भारतीय सिनेमा के एक बड़े स्तंभ थे ऋषिकेश मुखर्जी, स्टारमेकर के रूप में याद किए जाते रहेंगे

By अंकित सिंह | Sep 30, 2022

भले ही हाल के दिनों में भारतीय फिल्मों ने पर्दे पर कुछ खास अच्छा प्रदर्शन नहीं किया है। लेकिन यह बात भी सच है कि भारतीय सिनेमा अपनी बुलंदियों पर पहुंच चुका है। भारतीय सिनेमा ने अपने स्वर्णिम युग को भी देखा है और एक नया इतिहास बनाने के मुहाने पर भी खड़ा है। भारतीय सिनेमा ने कई बड़े बदलाव देखे हैं। इसकी नींव रखने वाले लोगों ने इसको लेकर कई बड़े सपने भी देखे थे। ऐसे ही भारतीय सिनेमा के एक बड़े स्तंभ थे ऋषिकेश मुखर्जी। ऋषिकेश मुखर्जी ने भारतीय सिनेमा में ना सिर्फ ना सिर्फ जान फूंकी बल्कि इसमें कई बड़े बदलाव भी किए। अपने दूरदर्शी सोच की ही वजह से उन्होंने संवेदनशील मसलों पर फिल्म बनाई और लोगों में जागरूकता पैदा करने की कोशिश की। ऋषिकेश मुखर्जी हमारे बीच हमेशा स्टारमेकर के रूप में याद किए जाते रहेंगे। 30 सितंबर 1922 को कोलकाता में जन्मे ऋषिकेश मुखर्जी ने कोलकाता विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा पूरी की। उन्हें विज्ञान और गणित से विशेष लगाव था और यही कारण था कि उन्होंने गणित और विज्ञान के अध्यापक के तौर पर काम करना शुरू कर दिया। 

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भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में ऋषिकेश मुखर्जी का अंदाज सबसे जुदा था। उन्होंने हर फिल्म में जीने की फिलॉसफी देने की कोशिश की। अपनी फिल्मों में हंसते-हंसाते जीवन के सच से भी वह रूबरू करा देते थे। कहा जाता है कि ऋषिकेश मुखर्जी फिल्मों की स्क्रिप्ट में डूब जाते थे और तब फिल्मों का निर्माण करते थे। यह उनकी सादगी का भी प्रतिनिधित्व करता था। ऋषिकेश मुखर्जी ने अपनी फिल्मों के जरिए कई कलाकारों को स्टार बनाया जिसमें धर्मेंद्र, राजेश खन्ना, अमिताभ बच्चन, अमोल पालेकर व जया भादुड़ी जैसे सितारे शामिल हैं। ऋषिकेश मुखर्जी ने मानवीय पहलुओं पर फिल्म बनाने के साथ-साथ मनोरंजन के पक्ष को भी कभी अनदेखा नहीं किया। यही कारण है कि उनकी फिल्में आज भी लोगों में लोकप्रिय है।

आनंद, गोलमाल, बावर्ची, नमक हराम, अभिमान, बुड्ढा मिल गया, गुड्डी, मिली, सत्य काम, चुपके-चुपके और अनाड़ी ऋषिकेश मुखर्जी की महत्वपूर्ण फिल्में थी। अभिनय ही नहीं बल्कि गानों के फिल्मांकन में भी ऋषिकेश मुखर्जी बेजोड़ थे। उनकी फिल्मों के गाने भी लोगों को खूब पसंद आते थे। हिंदी सिनेमा में उल्लेखनीय योगदान को देखते हुए ऋषिकेश मुखर्जी को कई सर्वोच्च सम्मानों से सम्मानित किया गया। इन महत्वपूर्ण सम्मानों में दादा साहेब फाल्के पुरस्कार और पद्म विभूषण भी शामिल है। इसके अलावा उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और 7 बार फिल्म फेयर पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। अपनी फिल्मों के जरिए लगभग तीन दशक तक दर्शकों का भरपूर मनोरंजन करने वाले ऋषिकेश मुखर्जी 27 अगस्त 2006 को इस दुनिया को अलविदा कह गए लेकिन उनकी फिल्में आज भी उन्हें हम सबके बीच लोकप्रिय किए हुए है।

- अंकित सिंह

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