Pakistan में गिरजाघरों पर हमले होते रहे, Bible की प्रतियां जलाई जाती रहीं, मगर दुनियाभर के मानवाधिकार प्रेमी चुप्पी साधे रहे

By नीरज कुमार दुबे | Aug 18, 2023

पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों का बुरा हाल है। कभी हिंदुओं की बेटियों से जबरन इस्लाम कबूलवा कर अधेड़ों के साथ उनका निकाह करवा दिया जाता है तो कभी हिंदुओं के मंदिरों और देव प्रतिमाओं को नुकसान पहुँचाया जाता है। कभी सिखों, कभी सिंधियों, कभी ईसाइयों तो कभी किसी अन्य अल्पसंख्यक समुदाय पर अत्याचार की खबरें पाकिस्तान में आम हैं। देखा जाये तो पाकिस्तान में किसी अल्पसंख्यक समुदाय पर हमला करना है तो उस पर पहले ईशनिंदा का आरोप लगा दिया जाता है और फिर उस समुदाय को निशाने पर ले लिया जाता है। आंकड़े दर्शाते हैं कि पाकिस्तान में ईसाइयों और हिंदुओं सहित विभिन्न अल्पसंख्यकों पर अक्सर ईशनिंदा के आरोप लगाए जाते हैं और अधिकतर पर ईशनिंदा के तहत मुकदमा चलाया गया तथा उन्हें सख्त से सख्त सजा भी दी जाती है। देखा जाये तो ईशनिंदा ऐसा आरोप है कि पाकिस्तान की सरकार और सुरक्षा बल भी उपद्रवियों का समर्थन करने लगते हैं और देखते ही देखते अल्पसंख्यकों के परिवार के परिवार तबाह हो जाते हैं। लेकिन हैरत इस बात पर है कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर इतने अत्याचारों के बावजूद विश्व समुदाय चुप्पी साधे रहता है। बड़ी बड़ी मानवाधिकार संस्थाएं अपने मुंह पर पट्टी बांध लेती हैं और संयुक्त राष्ट्र भी हाथ पर हाथ धरे बैठा रहता है।

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जहां तक पाकिस्तान में अल्पसंख्यक ईसाई समुदाय पर हुए घोर अत्याचार की बात है तो आपको बता दें कि पंजाब प्रांत में 21 गिरजाघरों पर भीड़ ने हमला कर दिया। पंजाब की प्रांतीय राजधानी लाहौर से करीब 130 किलोमीटर दूर फैसलाबाद जिले की जरांवाला तहसील में दो ईसाइयों द्वारा कुरान का अपमान करने की कथित खबरों से गुस्साई भीड़ ने सैंकड़ों गिरजाघरों और मकानों को जला दिया। उन्मादी भीड़ ने ईसाइयों के कब्रिस्तान को भी नहीं छोड़ा और वहां भी तोड़फोड़ की। खास बात यह रही कि गिरजाघरों पर हमला करने वालों में कट्टरपंथी आतंकवादी संगठन समूह तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान भी शामिल रहा। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, फैसलाबाद में ईसाई समुदाय के नेताओं ने जरांवाला में उनके धार्मिक स्थानों और घरों को हुए नुकसान का आकलन किया तो पता चला कि ईशनिंदा के झूठे आरोप में कुल 21 गिरजाघरों में आगजनी या तोड़फोड़ की गई और बाइबिल की सैंकड़ों प्रतियों को आग लगा दी गई। बताया जा रहा है कि अधिकतर ईसाइयों ने अपनी जान बचाने के लिए क्षेत्र छोड़ दिया और वे तभी लौटेंगे जब गिरजाघरों और ईसाइयों के घरों पर हमलों में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

इस बीच, ‘चर्च ऑफ पाकिस्तान’ के अध्यक्ष बिशप आजाद मार्शल ने हिंसा की निंदा करते हुए कहा कि बाइबिल की प्रतियां जला दी गईं और ईसाई समुदाय के सदस्यों पर ‘‘पवित्र कुरान का अनादर करने का झूठा आरोप लगाया गया’’ तथा उन्हें प्रताड़ित किया गया। दूसरी ओर, पाकिस्तान ने दुनिया को दिखाने के लिए ‘‘अल्पसंख्यक समुदायों और उनके उपासना स्थलों की सुरक्षा’’ के लिए 70 सदस्यीय विशेष इकाई का गठन किया है। साथ ही यह वादा भी किया है कि जल्द से जल्द ईसाइयों के उपासना स्थलों को ठीक कराया जायेगा। लेकिन देखा जाये तो यह वादे कोरे ही प्रतीत होते हैं क्योंकि ऐसे ही वादे हिंदुओं से भी किये गये लेकिन उनके उपासना स्थलों में की गयी तोड़फोड़ को कभी ठीक नहीं कराया गया। हिंदू समुदाय की ओर से खुद ही इसके लिए पहल की गयी। यही नहीं, हाल ही में हिंदू उपासना स्थलों पर जब रॉकेट लांचर से हमले हो रहे थे तब पाकिस्तान के विशेष सुरक्षा बल तमाशा देखते रहने के अलावा कुछ नहीं कर रहे थे। यही नहीं, चर्चों पर हमलों के लिए जिन लोगों को पकड़ा गया है उन्हें भी मामला थोड़ा शांत होते ही छोड़ दिया जायेगा। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान में चूंकि जल्द ही चुनाव होने वाले हैं इसलिए सरकार किसी भी कीमत पर बहुसंख्यक आबादी को नाराज नहीं करना चाहेगी।

बहरहाल, पाकिस्तान में अल्पसंख्यक आबादी की बात करें तो वहां के राष्ट्रीय डेटाबेस और पंजीकरण प्राधिकरण से एकत्र किए गए आंकड़ों के मुताबिक पाकिस्तान में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के 22,10,566 लोग तथा ईसाई समुदाय के 18,73,348 लोग रहते हैं। यानि पाकिस्तान में हिंदुओं के बाद ईसाई सबसे बड़ा अल्पसंख्यक समुदाय है। लेकिन यह दोनों ही बुरी तरह प्रताड़ित किये जाते हैं। उम्मीद है कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों को दुर्दशा के हाल से निकालने के लिए विश्व समुदाय कोई पहल करेगा।

-नीरज कुमार दुबे

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