By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Aug 02, 2026
नयी दिल्ली, दो अगस्त रुड़की स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी-रुड़की) और आईआईटी-कानपुर के संयुक्त अध्ययन से पता चला है कि वायु प्रदूषण की वजह से दिल्ली स्थित हुमायूं के मकबरे पर लगे बलुआ पत्थर के क्षरण की गति बढ़ रही है। यह मकबरा यूनेस्को की विरासत सूची में शामिल है। ‘इंटरनेशनल जर्नल ऑफ आर्किटेक्चरल हेरिटेज’ में प्रकाशित अध्ययन रिपोर्ट के मुताबिक, अध्ययन के दौरान हुमायूं के मकबरे के विभिन्न हिस्सों से एकत्र किए गए काले परत के नमूनों की रासायनिक संरचना, खनिज सामग्री और सूक्ष्म संरचना का विश्लेषण करने के लिए प्रयोगशाला तकनीकों का उपयोग किया गया।
अनुसंधानकर्ताओं के मुताबिक काली परत केवल सतह पर लगा दाग नहीं है। इस परत को बनाने वाली रसायनिक प्रतिक्रिया धीरे-धीरे बलुआ पत्थर को कमज़ोर कर देती हैं, जिससे वह मौसम की मार और लंबे समय में होने वाले नुकसान के प्रति ज़्यादा संवेदनशील हो जाता है। उन्होंने कहा कि अध्ययन के नतीजों से वैज्ञानिक रूप से साबित होता है कि वायु प्रदूषण का संबंध हुमायूं के मकबरे के क्षरण से है और इससे अधिकारियों को इस स्मारक के संरक्षण के उपाय करने में मदद मिल सकती है।
अध्ययन में सुझाव दिया गया है कि वैज्ञानिक रूप से परखे गए संरक्षण के तरीकों का इस्तेमाल करके समय-समय पर काली परत को हटाया जाए, स्मारक के आस-पास प्रदूषण की लगातार निगरानी की जाए और सुरक्षात्मक परत के इस्तेमाल से पहले उनका आकलन किया जाए। इसमें नुकसानदायक जमाव को बनने से रोकने के लिए स्वच्छ परिवहन प्रणाली और कम उत्सर्जन वाले ईंधन के जरिए प्रदूषण के स्रोत को भी सीमित करने का सुझाव दिया गया। यह मकबरा मुगल बादशाह हुमायूं की याद में 16वीं सदी में बेगा बेगम ने बनवाया था।