Prabhasakshi Newsroom। घर की कांग्रेस की जगह सब की हो कांग्रेस, कपिल सिब्बल ने उठाए गंभीर सवाल

By अनुराग गुप्ता | Mar 15, 2022

पांच राज्यों में कांग्रेस को मिली करारी हार के बाद सीडब्ल्यूसी की बैठक में पुरानी पटकथा दिखाई दी। ऐसा गंभीर आरोप किसी और ने नहीं बल्कि पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के कद्दावर नेता कपिल सिब्बल ने लगाया है। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि 'घर की कांग्रेस' की जगह 'सब की कांग्रेस' हो। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि इसबार के परिणामों ने मुझे आश्चर्यचकित नहीं किया। हम 2014 से नीचे की ओर जा रहे हैं। हमने राज्य दर राज्य खोया है। जहां हम सफल हुए वहां भी हम अपने झुंड को एक साथ नहीं रख पाए। 

नेतृत्व करने में हैं असमर्थ

उन्होंने कहा कि हमें समय-समय पर अपमानजनक हार का सामना करना पड़ा है। जिन राज्यों में हम प्रासंगिक होने की उम्मीद करते हैं, वहां वोटों का प्रतिशत लगभग नगण्य है। उत्तर प्रदेश में हमारे पास 2.33 प्रतिशत वोट शेयर है। यह मुझे आश्चर्य नहीं करता। हम मतदाताओं से जुड़ने में असमर्थ हैं। हम सामने से नेतृत्व करने में असमर्थ हैं, लोगों तक पहुंचने में असमर्थ हैं। हमारी पहुंच सार्वजनिक बहस का विषय है। जैसा कि गुलाम नबी आजाद ने कहा था कि एक नेता में पहुंच, जवाबदेही और स्वीकार्यता के गुण होने चाहिए। 2014 के बाद से जवाबदेही का अभाव, घटती स्वीकार्यता और पहुंच बढ़ाने के लिए बहुत कम प्रयास हुए हैं। यही असली समस्या है। इसलिए परिणामों ने मुझे चौंकाया नहीं।

क्या पार्टी को हार के कारणों का पता नहीं ?

इसी बीच उन्होंने कांग्रेस कार्यसमिति (सीडब्ल्यूसी) का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सीडब्ल्यूसी में जो हुआ उसने भी मुझे चौंकाया नहीं। एक पार्टी के लिए 2014 से इस पराजय के कारणों का पता लगाने के लिए हमारे पास एक चिंतन शिविर होगा, अगर आठ साल तक एक राजनीतिक दल और नेतृत्व को इसके पतन के कारणों के बारे में पता नहीं है; यह जानने के लिए चिंतन शिविर का इंतजार कर रहा है, कोयल की भूमि में रह रहा है। 

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इस दौरान कपिल सिब्बल ने कांग्रेस शब्द का मतलब भी बताया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस शब्द एकता से आया है। मूल कांग्रेस किसी ऐसे व्यक्ति से पैदा हुई थी जो हिंदू धर्म से संबंधित नहीं था और इस कांग्रेस में हर कोई गहराई से शामिल था। उस विचार के लिए प्रतिबद्ध थे...सत्ता संरचनाएं इतनी व्यवस्थित थीं कि सभी ने हिस्सा लिया। इसीलिए कांग्रेस का इतिहास यह था कि हर साल अध्यक्ष बदलते थे।

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