By नीरज कुमार दुबे | Jan 27, 2026
गणतंत्र दिवस के मौके पर भारतीय वायु सेना ने एक ऐसा दृश्य प्रमाण देश और दुनिया के सामने रख दिया जिसने पिछले कुछ समय से चल रही बहस और शंका दोनों को एक झटके में खामोश कर दिया। हम आपको बता दें कि सोमवार को वायुसेना द्वारा जारी वीडियो में घातक मिसाइलों से लैस अत्याधुनिक लड़ाकू विमान दिखाए गए। यह वीडियो उन पाकिस्तानी और पश्चिमी आलोचकों के लिए करारा जवाब है जो लगातार दावा करते रहे कि भारत के पास वह क्षमता ही नहीं थी जिसका उसने 2019 के बालाकोट हमले और पिछले वर्ष के ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उल्लेख किया था।
वीडियो में साफ दिखता है कि भारत के बेडे में शामिल फ्रांस से प्राप्त राफेल, सुखोई और स्वदेशी तेजस विमान पूरी तरह सशस्त्र हैं। इनके हार्डप्वाइंट पर लंबी दूरी की मारक क्षमता वाली मिसाइलें तैनात हैं जिनमें मीटियर और ब्रह्मोस जैसी प्रणालियां शामिल हैं। यह वही हथियार हैं जिनका इस्तेमाल पाकिस्तान के भीतर गहराई तक लक्ष्य भेदने में किया गया था। इस वीडियो के सामने आते ही कई महीनों से चल रहा संदेह अब समाप्त हो चुका है।
हम आपको बता दें कि मीटियर मिसाइल आधुनिक वायु युद्ध की परिभाषा बदलने वाली प्रणाली मानी जाती है। यह दृश्य सीमा से परे मार करने में सक्षम है और एक साथ कई लक्ष्यों पर प्रहार कर सकती है। तेज गति से उड़ने वाले लड़ाकू विमानों से लेकर छोटे ड्रोन और क्रूज मिसाइल तक इसके दायरे में आते हैं। भारी इलेक्ट्रॉनिक बाधाओं के बीच भी यह मिसाइल लक्ष्य को नहीं चूकती। इसकी रेंज दो सौ किलोमीटर से अधिक बताई जाती है और रैमजेट इंजन इसे चार माख से ज्यादा की गति देता है। साथ ही इसका नो एस्केप जोन मौजूदा मध्यम दूरी की मिसाइलों की तुलना में कई गुना बड़ा है।
हम आपको बता दें कि भारत और फ्रांस के बीच 2016 में हुए समझौते के तहत 36 राफेल विमान खरीदे गए थे। इस सौदे में उन्नत मिसाइलें और भारत के लिए विशेष रूप से तैयार किए गए संशोधन शामिल थे। इसके बावजूद कुछ हलकों में यह संदेह फैलाया गया कि भारत को मीटियर जैसी मिसाइलें वास्तव में मिली भी हैं या नहीं। हालांकि सोमवार को जारी वीडियो ने इन सभी अटकलों को विराम दे दिया।
वीडियो में एक और अहम दृश्य सामने आया जिसमें स्वदेशी तेजस विमान से मीटियर मिसाइल का प्रक्षेपण दिखाया गया। यह संदेश साफ है कि भारत की स्वदेशी और विदेशी दोनों प्रणालियां एक ही स्तर की घातक क्षमता से लैस हैं। इसके अलावा मिराज 2000 विमान भी उसी मिसाइल विन्यास के साथ नजर आए जिनका उपयोग 2019 के बालाकोट अभियान में किया गया था। सुखोई 30 एमकेआई विमानों पर रैम्पेज हवा से जमीन पर मार करने वाली मिसाइलें दिखाई गईं जिनकी सटीकता पहले ही सिद्ध हो चुकी है।
देखा जाये तो भारत ने बिना किसी शब्द युद्ध के यह दिखा दिया कि उसकी दावेदारी केवल बयान नहीं बल्कि ठोस क्षमता पर आधारित है। खास तौर पर पाकिस्तान के संदर्भ में यह संदेश स्पष्ट है कि भारत की वायु शक्ति अब पुराने खांचे में बंधी नहीं है। वायुसेना का यह कदम केवल एक वीडियो जारी करना नहीं है बल्कि एक सुनियोजित रणनीतिक प्रहार है। वर्षों से भारत की सैन्य क्षमता को कमतर आंकने का जो अभियान चलाया गया था उस पर अब विराम लगना चाहिए। सवाल यह नहीं है कि भारत ने कौन सी मिसाइल कब खरीदी बल्कि यह है कि भारत अब अपनी शक्ति को लेकर झिझक में नहीं है।
बालाकोट और ऑपरेशन सिंदूर के बाद से भारत ने बार बार संयम दिखाया लेकिन संयम को कमजोरी समझने की भूल कुछ लोगों ने कर ली। इस वीडियो ने उस भ्रम को तोड़ दिया है। संदेश यह है कि भारत शोर नहीं करता पर जब करता है तो सबूत के साथ करता है। वायुसेना ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि स्वदेशी मंच जैसे तेजस अब केवल प्रतीक नहीं बल्कि वास्तविक युद्ध क्षमता का आधार बन चुके हैं।
देखा जाये तो आज की दुनिया में युद्ध केवल मैदान में नहीं लड़े जाते बल्कि धारणा के स्तर पर भी लड़े जाते हैं। इस मोर्चे पर भी भारत ने सधी हुई और आक्रामक चाल चली है। बिना किसी उत्तेजक बयान के केवल तथ्य सामने रख कर। यही परिपक्व शक्ति का संकेत है। बहरहाल, आगे की राह में यह जरूरी है कि इस सैन्य आत्मविश्वास के साथ कूटनीतिक संतुलन भी बना रहे। लेकिन इतना तय है कि अब भारत को कमतर आंकने वालों को हर बार ऐसे ही ठोस उत्तर मिलेंगे।