By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Oct 17, 2026
वित्त मंत्रालय ने शनिवार को कहा कि आईडीबीआई (निरसन) अधिनियम, 2003 का विधायी इतिहास, दिल्ली उच्च न्यायालय के एक फैसले और लगातार आम बजट भाषण से आईडीबीआई बैंक के रणनीतिक विनिवेश की दिशा में सरकार की नीति के क्रमिक विकास का पता चलता है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस सप्ताह की शुरुआत में कनाडा की फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स को लगभग 53,000 करोड़ रुपये में आईडीबीआई बैंक की 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने को मंजूरी दी थी। यह सौदा भारत के वित्तीय क्षेत्र में अब तक का सबसे बड़ा विदेशी निवेश और देश के बैंकिंग निजीकरण अभियान में एक बड़ा मील का पत्थर है।
इसके बाद, दिल्ली उच्च न्यायालय ने ऑल इंडिया आईडीबीआई ऑफिसर्स एसोसिएशन बनाम भारत संघ तथा अन्य मामले में 17 दिसंबर, 2018 को फैसला सुनाया कि आईडीबीआई निरसन अधिनियम, 2003 की भाषा में कोई अस्पष्टता नहीं है और उक्त अधिनियम में ऐसा कोई प्रावधान जोड़ने की कोई गुंजाइश नहीं है जो सरकार को आईडीबीआई लिमिटेड में अपनी हिस्सेदारी कम करने या बेचने से रोकता हो। संसद में लगातार पेश किए गए बजट भाषणों में भी आईडीबीआई बैंक के कायाकल्प और रणनीतिक विनिवेश को लेकर सरकार की नीति को दोहराया गया था। वित्त वर्ष 2016-17 के आम बजट में तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा था कि आईडीबीआई बैंक के कायाकल्प की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
उन्होंने कहा था, सरकार इसे आगे बढ़ाएगी और अपनी हिस्सेदारी को 50 प्रतिशत से नीचे लाने के विकल्प पर भी विचार करेगी। वित्त वर्ष 2021-22 के आम बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि सरकार ने कोविड-19 महामारी के बावजूद आईडीबीआई बैंक और अन्य सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) के रणनीतिक विनिवेश पर काम किया है। मंत्रालय ने कहा, आईडीबीआई (निरसन) अधिनियम, 2003 का विधायी इतिहास, दिल्ली उच्च न्यायालय का न्यायिक फैसला और सिलसिलेवार बजट भाषण सामूहिक रूप से आईडीबीआई बैंक के रणनीतिक विनिवेश के प्रति सरकार की नीति के विकास को दर्शाते हैं।