संसद और विधानसभाएं कानून बना दें तो कोई अवमानना ​​नहीं होगी, पूर्व प्रोफेसर की याचिका पर बोला सुप्रीम कोर्ट

By अभिनय आकाश | Jun 03, 2025

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि संसद या राज्य विधानमंडल द्वारा बनाया गया कोई भी कानून न्यायालय की अवमानना ​​नहीं माना जा सकता। न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने समाजशास्त्री और दिल्ली विश्वविद्यालय की पूर्व प्रोफेसर नंदिनी सुंदर और अन्य द्वारा दायर 2012 की अवमानना ​​याचिका का निपटारा करते हुए यह टिप्पणी की। अवमानना ​​याचिका में छत्तीसगढ़ सरकार पर सलवा जुडूम जैसे निगरानी समूहों को समर्थन रोकने तथा माओवादियों के खिलाफ लड़ाई में विशेष पुलिस अधिकारियों के नाम पर आदिवासियों को हथियार देने के 2011 के निर्देशों का पालन करने में विफल रहने का आरोप लगाया गया है। 

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उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने सुरक्षा बलों के कब्जे से सभी स्कूल भवनों और आश्रमों को खाली नहीं कराया है और न ही सलवा जुडूम और एसपीओ के पीड़ितों को मुआवजा दिया है। शीर्ष अदालत ने 15 मई को कहा कि शीर्ष अदालत के आदेश के बाद छत्तीसगढ़ द्वारा कोई कानून पारित करना अवमानना ​​का कार्य नहीं हो सकता।

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