By कमलेश पांडे | Oct 18, 2026
एलआईसी की कोई न कोई पॉलिसी आज हर किसी के पास है, क्योंकि इसका स्लोगन है- जिंदगी के साथ भी और जिंदगी के बाद भी। लेकिन आमलोगों के मन में अकसर यह सवाल उठता है कि क्या एलआईसी बीमा पॉलिसी का प्रीमियम समय पर नहीं भर पाने से पुरानी राशि डूब जाती है? जवाब होगा नहीं, लेकिन इस हेतु भी कुछ नियम कायदे हैं, जिन्हें हम बारीकीपूर्वक यहां पर समझेंगे।
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एक, पहले मिलता है ग्रेस पीरियड: वार्षिक, छमाही और तिमाही प्रीमियम में सामान्यतः 30 दिन की ग्रेस पीरियड। मासिक प्रीमियम में ग्रेस पीरियड 15 दिन होता है। इस अवधि में पॉलिसी चालू मानी जाती है और नियमों के अनुसार बीमा सुरक्षा जारी रहती है।
दो, ग्रेस पीरियड के बाद प्रीमियम नहीं भरा तो?: पॉलिसी लेप्स (व्यपगत) हो सकती है। इसका मतलब यह नहीं कि पहले जमा किए सारे पैसे उसी क्षण खत्म हो गए। कई पॉलिसियों में पुनरुद्धार या पैड-अप जैसे विकल्प उपलब्ध होते हैं।
तीन, पुरानी पॉलिसी को फिर चालू कराया जा सकता है: एलआईसी के नियमों में लेप्स हुई पॉलिसी को कुछ शर्तों के अधीन रिवाइव करने का प्रावधान है। सामान्यतः बकाया प्रीमियम के साथ ब्याज और आवश्यक स्वास्थ्य/बीमायोग्यता संबंधी औपचारिकताएँ पूरी करनी पड़ सकती हैं। पॉलिसी के प्रकार के अनुसार रिवाइवल की समय-सीमा अलग हो सकती है।
चार, अगर कई साल प्रीमियम भर चुके हैं: कुछ पारंपरिक एलआईसी पॉलिसियों में पर्याप्त अवधि तक प्रीमियम भरने के बाद नॉन-फ़ॉरफ़ीचर/पेड-अप लाभ मिल सकते हैं। एलआईसी की सामान्य नीति-शर्तों में कम-से-कम 3 पूर्ण वर्षों के प्रीमियम भुगतान के बाद कुछ नॉन-फ़ॉरफ़ीचर और समर्पण मूल्य प्रावधान बताए गए हैं।
पांच, लेकिन एक महत्वपूर्ण अपवाद इस प्रकार है: कुछ विशेष पॉलिसियों में यदि एक पूर्ण वर्ष का प्रीमियम भी पूरा नहीं हुआ और आगे प्रीमियम नहीं भरा गया, तो सभी लाभ समाप्त हो सकते हैं और अब तक दिए गए प्रीमियम वापस न मिलें—उदाहरण के लिए एलआईसी के कुछ उत्पादों की शर्तों में ऐसा स्पष्ट है। इसलिए हर एलआईसी पॉलिसी पर एक ही नियम लागू नहीं होता।
आइए एक आसान उदाहरण से इसे समझते हैं। मान लीजिए आपने 10 साल की एलआईसी पॉलिसी में 6 साल प्रीमियम भरा और फिर 7वें साल का प्रीमियम नहीं भरा तो ड्यू डेट, ग्रेस पीरियड, लैप्स, रिवाइवल/पेड-अप जैसे विकल्प चुने जा सकते हैं।
इस स्थिति में पहले के 6 वर्षों की जमा राशि को केवल इसलिए स्वतः “शून्य” नहीं माना जाएगा। आपकी वास्तविक राशि/लाभ पॉलिसी के नियम, पेड-अप वैल्यू, सरेंडर वैल्यू, बोनस और रिवाइवल की स्थिति पर निर्भर करेंगे।
सबसे जरूरी बात यह है कि पॉलिसी बंद हो गई है तो उसे छोड़ने के बजाय पहले एलआईसी से उसका मौजूदा पॉलिसी की स्थिति, रिवाइवल की रकम और पेड-अप/सरेंडर वैल्यू पता करना बेहतर है। एलआईसी भी पॉलिसी स्टेटस और रिवाइवल की जानकारी उपलब्ध कराने की बात कहता है।
LIC की आधिकारिक Policy Conditions उसकी वेबसाइट (https://licindia.in/hi/policy-conditions से हासिल की जा सकती है।
- कमलेश पांडेय
वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार