Amit Shah ने Infiltrators के खिलाफ सख्त Action उठाने वाली रणनीति को दी मंजूरी, Suvendu Adhikari ने घुसपैठियों का दाना पानी बंद किया

By नीरज कुमार दुबे | Jul 01, 2026

घुसपैठियों की अब खैर नहीं है। देश में अवैध घुसपैठ और बदलती जनसंख्या संरचना पर केंद्र सरकार पूरी तरह आक्रामक मोड़ में आ चुकी है। जनसांख्यिकीय बदलावों पर गठित उच्च स्तरीय समिति ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को अपनी पूरी रणनीति बता दी है, जबकि पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री शुभेन्दु अधिकारी ने घुसपैठियों का दाना पानी बंद करने की दिशा में सबसे बड़ा अभियान छेड़ दिया है। लाखों संदिग्ध लाभार्थियों के नाम सरकारी योजनाओं से हटाए जा चुके हैं और नागरिकता की कड़ी जांच शुरू हो चुकी है। केंद्र सरकार अब साफ संकेत दे चुकी है कि अवैध घुसपैठ, फर्जी पहचान और जनसंख्या संतुलन बिगाड़ने की हर कोशिश पर निर्णायक प्रहार होगा।

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समिति ने केंद्रीय गृहमंत्री को बताया कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से पहले ही विस्तृत जानकारी जुटाने के लिए प्रश्नावली तैयार कर ली गई है। इसके जरिये स्थानीय प्रशासन, सरकारी विभागों और केंद्रीय मंत्रालयों से विस्तृत तथ्य जुटाए जाएंगे। गृहमंत्री ने समिति की रणनीति की सराहना करते हुए गृह सचिव को निर्देश दिया है कि समिति को हर स्तर पर पूरा सहयोग उपलब्ध कराया जाए। साथ ही उन्होंने समिति से जल्द से जल्द अपनी सिफारिशें देने को कहा है। यह पूरा अभियान उस “हाई पावर्ड डेमोग्राफी मिशन” का हिस्सा है, जिसकी घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2025 को की थी।

मोदी सरकार का मानना है कि अवैध घुसपैठ केवल सीमा सुरक्षा का मुद्दा नहीं, बल्कि देश की सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक संरचना के लिए गंभीर चुनौती बन चुकी है। इसी दिशा में पश्चिम बंगाल में नई सरकार ने बड़ा अभियान छेड़ते हुए लाखों संदिग्ध लाभार्थियों पर कार्रवाई शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने खुलासा किया है कि अन्नपूर्णा योजना के लिए आए लगभग एक करोड़ साठ लाख आवेदनों में से करीब छब्बीस लाख आवेदन नागरिकता संबंधी जांच में खारिज कर दिए गए हैं। सरकार का कहना है कि इन लोगों ने तय मानकों को पूरा नहीं किया।

शुभेन्दु अधिकारी ने यह भी दावा किया कि पूर्ववर्ती लक्ष्मीर भंडार योजना में भारी स्तर पर फर्जी लाभार्थी शामिल थे। जांच में ऐसे लाखों नाम सामने आए जो या तो मतदाता सूची से हटाए जा चुके थे, या दूसरे स्थानों पर जा चुके थे, या फिर एक से अधिक खातों में सरकारी सहायता ले रहे थे। कई मामलों में मृत लोगों के नाम पर भी सहायता जारी थी। राज्य सरकार ने साफ शब्दों में कहा कि भारत का लाभ केवल भारतीय नागरिकों को ही मिलेगा और घुसपैठियों के लिए सरकारी खजाना नहीं खोला जा सकता। यही कारण है कि व्यापक छंटनी अभियान चलाया गया।

हम आपको बता दें कि पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान तिरसठ लाख नाम हटाए जाने और सत्ताईस लाख मामलों के अब भी न्यायिक प्रक्रिया में लंबित होने ने इस पूरे मुद्दे की गंभीरता और बढ़ा दी है। सरकार का कहना है कि वर्षों तक राजनीतिक तुष्टिकरण के कारण सीमा पार से आए लोगों को संरक्षण मिलता रहा, जिससे राज्य की जनसंख्या संरचना तेजी से प्रभावित हुई। अब नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक लाभार्थी की पहचान और नागरिकता की कठोर जांच की जा रही है।

उधर, सीमा पार घुसपैठ को लेकर भारत और बांग्लादेश के बीच तनाव भी बढ़ता दिखाई दे रहा है। सीमा क्षेत्रों से ऐसी खबरें सामने आई हैं कि भारतीय एजेंसियां अवैध घुसपैठियों को वापस भेजने की कार्रवाई तेज कर रही हैं। दूसरी ओर बांग्लादेशी अधिकारियों ने आरोप लगाया है कि रात के अंधेरे में लोगों को सीमा पार धकेला जा रहा है। हालांकि भारतीय पक्ष का स्पष्ट मत है कि देश की सुरक्षा और जनसंख्या संतुलन से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ कठोर कदम उठाना समय की मांग है। हम आपको बता दें कि पश्चिम बंगाल सरकार पहले ही दस हजार से अधिक अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों को बाहर निकालने का दावा कर चुकी है, जबकि हजारों अन्य निर्वासन की प्रक्रिया में हैं।

साथ ही असम सहित पूर्वोत्तर के कई राज्यों ने भी दो टूक संदेश दिया है कि अवैध घुसपैठ किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जाएगी। वहां की सरकारों का कहना है कि लगातार हो रही घुसपैठ से स्थानीय संस्कृति, संसाधनों और जनसंख्या संतुलन पर सीधा खतरा पैदा हो गया है। यही वजह है कि अब “पहचानो, हटाओ और वापस भेजो” नीति पर तेजी से काम हो रहा है।

बहरहाल, देश की सीमाएं दया और उदारता के नाम पर अराजकता का अड्डा नहीं बन सकतीं। भारत ने हमेशा शरण और मानवता की परंपरा निभाई है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि अवैध तरीके से घुसकर कोई भी देश की व्यवस्था, संसाधनों और पहचान पर कब्जा जमाने लगे। अब संदेश बिल्कुल स्पष्ट है कि जो लोग फर्जी पहचान, अवैध दस्तावेज और सुनियोजित घुसपैठ के जरिये देश की जनसंख्या संरचना बदलने की साजिश करेंगे, उनके खिलाफ कठोरतम कार्रवाई तय है। भारत अब चुप बैठने वाला नहीं, बल्कि निर्णायक जवाब देने के लिए तैयार खड़ा है।

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