IMF चीफ Kristalina Georgieva बोलीं, AI और Data Centres में भारी निवेश बढ़ाएगा महंगाई

By Ankit Jaiswal | Oct 07, 2026

दुनिया की अर्थव्यवस्था में एआई का असर अब सिर्फ तकनीकी क्षेत्र तक सीमित नहीं रह गया है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की प्रमुख क्रिस्टलीना जॉर्जीवा ने चेतावनी दी है कि एआई देशों की आर्थिक ताकत और प्रतिस्पर्धा को तेजी से बदल रही है, लेकिन इसके साथ महंगाई, कर्ज और वित्तीय स्थिरता से जुड़े नए खतरे भी सामने आ रहे हैं।

मौजूद जानकारी के अनुसार, जॉर्जीवा ने यह बात आईएमएफ और विश्व बैंक की आगामी सालाना बैठकों से पहले कही है। उनके मुताबिक इस समय वैश्विक अर्थव्यवस्था पर एक साथ कई दिशाओं से दबाव पड़ रहा है। एक तरफ युद्ध और 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंचा कच्चा तेल ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव डाल रहा है। दूसरी तरफ सीमित तेल शोधन क्षमता के कारण खुदरा डीजल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई हैं।

इसी के साथ एआई के लिए बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचा तैयार किया जा रहा है। दुनिया की बड़ी तकनीकी कंपनियां आंकड़ा केंद्रों और अत्याधुनिक कंप्यूटिंग सुविधाओं पर भारी रकम खर्च कर रही हैं। इन परियोजनाओं में बड़ी मात्रा में बिजली, जमीन, उपकरण और निर्माण संसाधनों की जरूरत होती है। जॉर्जीवा के मुताबिक इस तेजी का असर महंगाई पर भी पड़ सकता है।

गौरतलब है कि अमेरिका, यूरोप और एशिया में एआई से जुड़े डेटा सेंटरों का निर्माण तेजी से बढ़ा है। पहले से मौजूद ऊर्जा संकट, आयात शुल्क और बढ़ते रक्षा खर्च के बीच यह अतिरिक्त निवेश अर्थव्यवस्था पर महंगाई का दबाव बढ़ा सकता है। यानी जिस तकनीक से भविष्य में उत्पादकता और आर्थिक विकास बढ़ने की उम्मीद है, उसे तैयार करने की प्रक्रिया फिलहाल कई देशों के लिए महंगी साबित हो रही है।

जॉर्जीवा ने तकनीकी कंपनियों के भीतर वित्तीय जोखिम को लेकर भी चिंता जताई। इस क्षेत्र की कंपनियों के मजबूत मुनाफे ने उनके शेयरों की कीमतों को ऊंचा किया है। इससे निवेशकों की संपत्ति बढ़ने और बाजार में भरोसा मजबूत होने का असर दिखा है। लेकिन अगर आने वाले समय में कंपनियों का मुनाफा उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा तो स्थिति तेजी से बदल सकती है।

उनके मुताबिक बड़ी तकनीकी कंपनियों ने एआई से जुड़े बुनियादी ढांचे के लिए भारी कर्ज लिया है। साथ ही वैश्विक शेयर बाजार की संपत्ति का बड़ा हिस्सा अमेरिकी शेयरों में केंद्रित है। ऐसे में तकनीकी कंपनियों के प्रदर्शन में बड़ी गिरावट आने पर उसका असर केवल तकनीकी क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि व्यापक वित्तीय बाजारों में भी फैल सकता है।

जॉर्जीवा ने इस स्थिति को समझाने के लिए अमारा के नियम का भी जिक्र किया। इस विचार के मुताबिक समाज किसी नई तकनीक के शुरुआती असर को अक्सर जरूरत से ज्यादा बड़ा मान लेता है, लेकिन लंबे समय में उसके प्रभाव को कम आंकता है। उनके मुताबिक आज दुनिया एआई के निर्माण में तेजी और भविष्य में इसके वास्तविक फायदे सामने आने के बीच के ऐसे दौर में है, जहां जोखिम सबसे ज्यादा हो सकता है।

बता दें कि एआई के क्षेत्र में भारी निवेश के कारण आंकड़ा केंद्रों की बिजली मांग भी तेजी से बढ़ रही है। कई देशों में अब सरकारें ऊर्जा आपूर्ति, बिजली की कीमत, जमीन और पर्यावरण पर पड़ने वाले असर को लेकर नई योजनाएं बना रही हैं। इसका मतलब है कि आने वाले समय में एआई की दौड़ केवल कंप्यूटर और सॉफ्टवेयर तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि ऊर्जा और बुनियादी ढांचा भी इसकी सफलता का अहम आधार होंगे।

आईएमएफ प्रमुख ने वित्तीय व्यवस्था को सुरक्षित रखने के लिए सख्त नियम और निगरानी व्यवस्था को पहली सुरक्षा दीवार बताया है। उनका कहना है कि तकनीकी बदलाव को रोकना संभव नहीं है, लेकिन उससे पैदा होने वाले आर्थिक और वित्तीय जोखिमों को समय रहते नियंत्रित करना जरूरी है। ऐसे में आने वाले वर्षों में सरकारों और वित्तीय नियामकों के सामने चुनौती यह होगी कि वे एआई से मिलने वाले आर्थिक फायदे हासिल करें, लेकिन इसके साथ पैदा होने वाले जोखिमों को भी नियंत्रण में रखें।

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