Iran Crisis का असर: Crude Oil में उबाल, आपकी जेब पर पड़ेगी महंगाई की बड़ी मार

By Ankit Jaiswal | Mar 02, 2026

अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों और उसके बाद मिडिल ईस्ट में अमेरिकी व इजरायली सैन्य ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई के चलते वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला पर गंभीर असर पड़ा है। इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों और शेयर बाजारों पर दिखा है।

गौरतलब है कि निवेशकों को आशंका है कि ईरान और व्यापक मिडिल ईस्ट क्षेत्र से तेल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि हमले तब तक जारी रह सकते हैं जब तक अमेरिकी उद्देश्य पूरे नहीं होते। इससे बाजार में अनिश्चितता और बढ़ गई है।

सभी की नजरें होर्मुज पर टिकी हैं, जहां से दुनिया के समुद्री तेल व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है। यह जलमार्ग ईरान के उत्तरी तट से लगा हुआ है और सऊदी अरब, कुवैत, इराक, कतर, बहरीन और यूएई जैसे देशों का तेल और गैस इसी रास्ते से वैश्विक बाजार तक पहुंचता है। अभी तक इस मार्ग को पूरी तरह बंद नहीं किया गया है, लेकिन समुद्री ट्रैकिंग आंकड़ों से संकेत मिल रहे हैं कि कई टैंकर दोनों ओर रुक गए हैं। बीमा और सुरक्षा जोखिमों के कारण आवाजाही प्रभावित हो रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि तनाव कम नहीं हुआ तो तेल की कीमतों में और तेजी आ सकती है। उच्च ऊर्जा कीमतों का मतलब है कि आम उपभोक्ताओं को पेट्रोल, डीजल और रोजमर्रा की वस्तुओं के लिए अधिक भुगतान करना पड़ सकता है, खासकर ऐसे समय में जब कई देश पहले से महंगाई के दबाव में हैं।

इस बीच तेल उत्पादक समूह ओपेक और उसके सहयोगी देशों ने उत्पादन बढ़ाने की घोषणा की है। सऊदी अरब, रूस, इराक, यूएई, कुवैत, कजाखस्तान, अल्जीरिया और ओमान ने अप्रैल में अतिरिक्त आपूर्ति का संकेत दिया है। हालांकि विश्लेषकों का मानना है कि यदि संघर्ष लंबा खिंचता है तो यह बढ़ोतरी भी पर्याप्त साबित नहीं हो सकती है।

तेल संकट का असर वैश्विक शेयर बाजारों पर भी दिखा। जापान का निक्केई सूचकांक गिरावट के साथ बंद हुआ, जबकि यूरोप और अमेरिका के वायदा बाजारों में भी कमजोरी रही। वॉल स्ट्रीट के प्रमुख सूचकांकों के फ्यूचर्स में गिरावट दर्ज की गई। सुरक्षित निवेश की तलाश में डॉलर को मजबूती मिली और यूरो में हल्की कमजोरी देखी गई।

मिडिल ईस्ट में जारी सैन्य टकराव ने वैश्विक बाजारों को अस्थिर कर दिया है। आने वाले दिनों में होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति और प्रमुख तेल उत्पादक देशों की रणनीति यह तय करेगी कि यह उछाल अस्थायी है या फिर वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बड़े झटके की शुरुआत साबित होता है।

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