By अंकित सिंह | Aug 10, 2022
बिहार में एक बार फिर से राजद और कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनाने जा रहे हैं। उन्होंने भाजपा गठबंधन से अलग होने का मंगलवार को फैसला किया था। हालांकि, पिछले कई दिनों से नीतीश कुमार को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे थे। दावा किया जा रहा था कि नीतीश कुमार भाजपा से नाराज चल रहे हैं। 2013 में भी नीतीश कुमार भाजपा से नाता तोड़ चुके थे। लेकिन उस बार की परिस्थिति और आज की परिस्थिति में अंतर है। उस समय नीतीश कुमार ने इस्तीफा देने की बजाय भाजपा कोटे के सभी मंत्रियों को बर्खास्त कर दिया था। लेकिन इस बार नीतीश कुमार ने खुद ही इस्तीफा दिया है। भाजपा को पिछले कई दिनों से इस बात का अहसास था कि नीतीश कुमार के मन में कुछ ना कुछ चल रहा है। लेकिन पार्टी की ओर से उन्हें ज्यादा मनाने की कोशिश नहीं की गई।
भाजपा को लगता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ही बदौलत एनडीए को बिहार में 2020 में जीत मिली थी। बिहार में 2020 चुनाव के दौरान कई जगह नीतीश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन भी हुए थे। बीजेपी को इस बात का आभास है कि उसकी पार्टी की पकड़ बिहार में मजबूत हुई है। जबकि नीतीश कुमार की मतदाताओं के बीच लोकप्रियता काफी कम है। साफ तौर पर भाजपा का मानना है कि नीतीश कुमार ने अपनी महत्वाकांक्षाओं स्वार्थ और जिद के कारण बिहार के हितों को नुकसान पहुंचाया है। यही कारण है कि आप भाजपा की ओर से नीतीश कुमार के खिलाफ जबरदस्त तरीके से बिहार भर में अभियान चलाया जाएगा। भाजपा नेताओं की ओर से इस तरीके के बयान सामने आ रहे हैं। उससे साफ तौर पर जाहिर हो रहा है कि पार्टी अब नीतीश कुमार के खिलाफ जबरदस्त तरीके से आक्रमक रहेगी और एक रणनीति के तहत आगे बढ़ेगी नीतीश कुमार के धोखे को भाजपा बिहार के जनता के समक्ष रखने की तैयारी में है।