ज्वालामुखी में इन दिनों श्रद्वालु ढोल नगाड़े लेकर, जय माता दी का उदघेष करते हुए मां के दर्शन तथा आशीर्वाद पाने के लिये उमड़ रहे हैं

By विजयेन्दर शर्मा | Oct 11, 2021

ज्वालामुखी । चलो बुलाया आया है, शारदीय नवरात्र मेला के छठे दिन आज सुप्रसिद्ध शक्तिपीठ ज्वालामुखी में इन दिनों श्रद्वालु दूर-दूर से नंगे पांव पैदल यात्रा कर, नतमस्तक होकर, ढोल नगाड़े लेकर, जय माता दी का उदघेष करते हुए मां के दर्शन तथा आशीर्वाद पाने के लिये पूरी श्रद्धा के साथ उमड़ रहे हैं, जिससे नगर का अलग ही नजारा है। ज्वालामुखी में नवरात्र मेला के छठे दिन आज बड़ी तादाद में श्रद्धालुओं ने मंदिर में दर्शन किये। सुबह से ही मंदिर में भारी भीड़ जमा है। लोग दर्शनों के लिये अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं।

मंदिर अधिकारी डी एन यादव ने बताया कि मंदिर में आने जाने के लिये सुरक्षा कारणों से अलग अलग रास्ते बनाये गये हैं।  व  पूरी कोशिश की जा रही है कि कोई भी श्रद्धालु परेशान न हो। मंदिर की हर गतिविधि का सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से नजर रखी जा रही है।  मंदिर अधिकारी यादव ने बताया कि मंदिर प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं को मुफत दवाई उपलब्ध करवाई जा रही है। व अपंग यात्रियों की सुविधा के लिये व्हीलचेयर का भी इंतजाम है।  कोरोना प्रोटोकाल के चलते इस बार लंगर की अनुमति नहीं दी गई है।  

ज्वालामुखी संस्कृत महाविद्यालय के प्राचार्य पंडित प्रबल शास्त्री ने बताया कि मां का छठा रूप माता कात्यायनी का है। महिषासुर और शुभ-निशुभ दानव का वध माता ने ही किया। कात्यायन ऋषि की पुत्री होने के कारण मां का नाम कात्यायनी पड़ा। मां को महिषासुर मर्दनी भी कहा जाता है। मां कात्यायनी ने महिषासुर, शुम्भ और निशुम्भ का वध कर नौ ग्रहों को उनकी कैद से छुड़ाया था। मां कात्यायनी की पूजा भगवान राम और श्रीकृष्ण ने भी की थी। 

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