देश व समाज हित में डीजल व पेट्रोल की बचत के साथ-साथ स्थाई सादगी समय की मांग!

By दीपक कुमार त्यागी | May 25, 2026

अमेरिका-ईरान युद्ध के चलते जिस समय पूरे विश्व के सामने ऊर्जा संकट व मंहगाई सुरसा राक्षसी की तरह मूंह खोलकर के देश की दौलत को निगलने के लिए खड़ी है, उस दौर में भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने डीजल व पेट्रोल को बचाने व सोना ना खरीदने की सभी देशवासियों से अपील की है, क्योंकि मोदी की इस अपील पर अमल करने से भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ने वाला बोझ कम से कम कुछ तो कम होगा, जिससे देश की अर्थव्यवस्था को बेहतर होने का अवसर भी मिलेगा। हालांकि प्रधानमंत्री मोदी की इस अपील के बाद से ही देश के विभिन्न हिस्सों में मोदी के द्वारा चलाई जा रही इस राष्ट्रहित की मुहिम में शामिल होने की होड़ लग गई है। हालांकि अभी तो अधिकतर लोग सांकेतिक रूप से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की इस मुहिम में ज्यादा जुड़ रहे हैं, लेकिन सांकेतिक ही सही एक बहुत अच्छी पहल में कम से कम लोगों के जुड़ने की शुरुआत तो हुई और आने वाले दिनों में उम्मीद है कि इस पहल पर बड़े पैमाने पर आम लोग भी अमल करेंगे।

लेकिन विचारणीय तथ्य यह भी है कि क्या प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की यह मुहिम कुछ समय की ना होकर के देश व समाज हित में धरातल पर दीर्घकालीन स्थाई रूप ले पायेगी, हालांकि यह तो आने वाला समय ही बता पायेगा। लेकिन पूरी दुनिया में जिस तरह से युद्धों के चलते बेहद ही तनावपूर्ण माहौल चल रहा है, उस माहौल का स्पष्ट रूप से संदेश है कि अब वह दौर आ गया है जब देश व समाज के हित में जनता के टैक्स के पैसे के दम पर राजा-महाराजाओं की तरह पूरी शानो-शौकत व ठाट-बाट से जीवन व्यतीत कर रहे शासन-प्रशासन के लोग सादगी से जीवनयापन करने की आम जनमानस के सामने नज़ीर पेश करते हुए लोगों को भी "सादा जीवन उच्च विचार" के लिए प्रेरित करें। वैसे भी देखा जाए तो अब देश व दुनिया में वह दौर शुरू हो गया है, जब देश व समाज के हित की बातें सिर्फ और सिर्फ सरकारी दफ्तरों में बैठकर के आम जनमानस पर अपने विचार या नियम-कानून बना कर के थोप देने मात्र से ही पूरी नहीं हो जाती है, बल्कि उस पर अमल करवाने के लिए शासन-प्रशासन में बैठे हुए ताकतवर लोगों को भी स्वयं अनुशासित होकर के जीवन पथ पर सादगी व जवाबदेही को अपनाकर उदाहरण पेश करना चाहिए, तब ही आम जनमानस भी उन लोगों की देखा-देखी उस पर अमल करने का कार्य करेगा। लेकिन आज के वीवीआईपी बनकर के दिखाने वाले दौर में जिस तरह के राजसी ठाट-बाट के साथ कुछ राजनेताओं व शासन-प्रशासन में बैठे हुए कुछ लोग सरकारी व निजी दौरों के दौरान अनाप-शनाप खर्चा करते हैं, क्या ऐसे लोग के द्वारा देश व समाज हित में उन सभी अनावश्यक खर्चों में स्वयं ही कटौती करने की पहल करके जनता के सामने एक बड़ी मिसाल कायम नहीं करनी चाहिए।

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विचारणीय तथ्य यह भी है कि आजकल देश में जिस तरह से सरकारी या गैरसरकारी लोगों के मन में अपने आपको एक बड़ा वीवीआईपी दिखाने की चाह रहती है, वह चाहते देश व समाज हित में ठीक नहीं है, क्योंकि इन लोगों को वीवीआईपी दिखाने की चाहत में सिस्टम का बड़ा तामझाम, लग्जरी मंहगी गाड़ियों के लंबे-चौड़े काफिले, चार्टर प्लेन आदि दिखावे पर जनता के द्वारा देश के विकास के लिए दिये गये टैक्स की काफी धनराशि का दुरुपयोग होता है, जिसको तत्काल रोका जाना चाहिए। वहीं कुछ लोगों के द्वारा अपना भौकाल बनाने के लिए व दिखावे के लिए ली गयी अत्यधिक सुरक्षा व्यवस्था और रखरखाव में होने वाले अतिरिक्त खर्चों को भी अब बिल्कुल सीमित करना चाहिए। क्योंकि जिस तरह से चंद लोग सिस्टम में बैठे कुछ ताकतवर लोगों की कृपा से सरकारी अमले की आड़ में जनता के टैक्स के पैसों पर मौज मस्ती करते हुए जनता का ही आये दिन उत्पीड़न करते हैं, यह किसी से भी छिपा हुआ नहीं है, सिस्टम में बैठे हुए कुछ लोगों से सांठ-गांठ करके हमारे प्यारे  देश में धनपशु, दलाल व अपराधी तक भी सरकारी सुरक्षा व सुविधाओं के भौकाल का आनंद लें रहे हैं, जो नियम कायदे व कानून पसंद देशभक्त देशवासियों के लिए बेहद चिंताजनक स्थिति है। देश व समाज हित में जनता के द्वारा टैक्स के रूप में दी गई धनराशि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, युवाओं, महिलाओं, किसानों और उधोग-धंधों आदि के साथ-साथ देश के सर्वांगीण विकास पर खर्च हो। देश की जनता के टैक्स का धन देश के विकास और आम जनमानस की भलाई में लगे, न कि वीवीआईपी बनने की चाहत के बेफिजूल के खर्चो और शानो-शौकत में लगे। इसलिए अब देश व समाज हित में वह समय आ गया है जब शासन व प्रशासन में बैठे लोग प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सोना ना खरीदने व डीजल और पेट्रोल बचाने की पहल को दो कदम आगे बढ़ाते हुए स्वयं ही अनुशासित होकर के जीवन पथ पर सरलता व सादगी अपनाकर देश व समाज हित को सर्वोपरि रखते हुए कार्य करेंगें और भारत का नव निर्माण करते हुए देश को विश्व गुरु बनायेंगे।

- दीपक कुमार त्यागी

अधिवक्ता, स्वतंत्र पत्रकार, स्तंभकार व राजनीतिक विश्लेषक

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