धर्म के नाम पर चर्च में होता है महिलाओंं का वर्जिनिटी टेस्ट! सर्टिफिकेट देखकर ही लड़का करता है लड़की से शादी

By रेनू तिवारी | Jul 19, 2022

एक लड़की वर्जन है या नहीं! आज के जमाने में इसका क्या महत्व है, ये आपको तय करना हैं। समाना बदल रहा है। वक्त के साथ ऐसी रूढीवादी मानसिकता भी बदस रही हैं। आज लोग काफी खुले खयालात रखते हैं। महिलाओं और पुरूषों में होने वाले भेदभाव के दायरे भी शहरों में कम हो गये हैं। शादी के लिए लड़की का वर्जिनिटी स्टेटस पास करना जरूरी नहीं हैं। अब लड़का-लड़की एक दूसरे से बात करके आपसी तालमेल के बाद एक दूसरे के साथ उम्र बिताने की कसमें खाते हैं। जब दुनिया सही दिशा नें आगे बढ़ रही हैं उसी में आज भी धर्म के नाम पर लोग दुनिया को वैचारिक रूप से आगे नहीं बढ़ने देना चाहते। खास तौर पर महिलाओं को... गर्भावस्था, कौमार्य परीक्षण, सेक्स करने जैसी वस्तु ही समझा जाता हैं। दक्षिण अफ्रीका से एक ऐसी ही घटना सामने आयी हैं जहां एक चर्च की दरफ से लड़कियों का वर्जिनिटी टेस्ट करवाकर उन्हें शादी के लिए अप्रूवल दिया जा रहा हैं। धर्म के नाम पर एक महिला की प्राइवेसी को चर्च जगजाहिर करके महिलाओं को कुंवारे होने का सर्टिफिकेट बांट रहा हैं। 

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रिपोर्टों का कहना है कि परीक्षण आमतौर पर हर साल के मध्य में आयोजित किया जाता है। इस टेस्ट में जब महिलाएं पास हो जाती हैं तब उन्हें एक सर्टिफिकेट दिया जाता हैं जो एक साल के लिए वैलिड होता हैं। एक साल बाद फिर से आपको यह टेस्ट करवाना पड़ता हैं। इस सर्टिफेटट को लड़की की शादी के दौरान लड़का और उसके परिवार वाले भी देखते हैं। यदि किसी भी महिला ने टेस्ट करवाने के बाद अपनी वर्जिनिटी लूज की और किसी और से शादी की तो जसा के तौर पर वह अपने पति के लिए एक वर्जन लड़की का बंदोबस्त करेगी। यानी की लड़की का पति पहले किसी वर्जन लड़की के साथ शारीरिक संबंध बनाएगा और उसके बाद वह उनकी पत्नी को छूएगा। प्रमाण पत्र र चर्च के नेता और संस्थापक द्वारा हस्ताक्षरित और जारी किया जाता है। 

इस वर्ष के कौमार्य परीक्षण कार्यक्रम का संस्करण 4 जुलाई, 2022 को आयोजित किया गया था। सफल प्रतिभागियों के माथे पर सफेद निशान से टिका लगाया गया था। जिससे यह संकेत मिलता है कि वे इसे सफलतापूर्वक पास हो चुकी हैं। कुछ सफल प्रतिभागियों की तस्वीरें जो खुशी-खुशी अपने प्रमाण पत्र पकड़े और प्रदर्शित करती हैं, उन्हें सोशल मीडिया पर अपलोड किया गया है और तब से मिली-जुली प्रतिक्रियाएँ सामने आई हैं, कुछ लोगों ने चर्च की पहल की सराहना की, जबकि अन्य आश्चर्य करते हैं कि क्या पुरुष मंडलियों के लिए भी ऐसा ही है।

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