By अंकित सिंह | Apr 03, 2024
केरल की सियासी लड़ाई दिलचस्प होती जा रही है। केरल की वायनाड सीट जबरदस्त तरीके से सुर्खियों में है। दरअसल, पूरे देश में इंडिया गठबंधन का नेतृत्व करने वाली कांग्रेस और इसके अहम हिस्सा वाम दल केरल में आमने-सामने है। यही कारण है कि केरल को लेकर इंडिया गठबंधन के भीतर ही जो सियासी लड़ाई है, वह कहीं ना कहीं 2024 के चुनावी दंगल को दिलचस्प बनाती हुई दिखाई दे रही है। केरल इसलिए भी सुर्खियों में क्योंकि वायनाड सीट से राहुल गांधी एक बार फिर से चुनाव लड़ रहे हैं जबकि उनके खिलाफ वाम दलों की ओर से उनके दिग्गज नेता डी राजा की पत्नी एनी राजा मैदान में है। भाजपा ने वहां प्रदेश अध्यक्ष के सुरेंद्रन को उतारा है। केरल 26 अप्रैल को होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए तैयारी कर रहा है।
वायनाड से भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) की उम्मीदवार एनी राजा ने बुधवार को कांग्रेस के मौजूदा सांसद और उम्मीदवार राहुल गांधी के खिलाफ अपना नामांकन दाखिल किया। नामांकन दाखिल करने से पहले राजा ने निर्वाचन क्षेत्र में एक रोड शो भी किया। उन्होंने कहा कि मैं यह समझने के लिए लोगों के बीच जा रही हूं कि वाम मोर्चे के उम्मीदवार के रूप में उनकी मुझसे क्या उम्मीदें हैं। इसलिए वे मुझसे एक सवाल पूछ रहे हैं कि अगर हम आपको वोट दें तो क्या आप यहां रहेंगी? मैं उनसे वादा करती हूं कि अगर वे मुझे इस निर्वाचन क्षेत्र से चुनेंगे तो मैं यहां रहूंगी। जब मैं उन्हें बताती हूं कि मैं उनके साथ रहूंगी, तो उन्हें और खुशी होती है। मानव-पशु संघर्ष प्रमुख मुद्दों में से एक है और इसके स्थायी समाधान के लिए मौजूदा कानून में संशोधन जरूरी है। तो वो केरल विधानसभा में नहीं, बल्कि संसद में होगा।
केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने इस सीट से चुनाव लड़ने के लिए कांग्रेस नेता राहुल गांधी की आलोचना की है और सवाल किया है कि वह "सीधे भाजपा से क्यों नहीं लड़ते"। विजयन ने तर्क दिया है कि केरल में, राहुल गांधी एक सहयोगी - भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के उम्मीदवार एनी राजा के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं। विजयन ने कहा कि हर कोई राहुल गांधी के केरल आने और भाजपा के नेतृत्व वाले केंद्र के खिलाफ नहीं लड़ने के फैसले पर सवाल उठा रहा है। उन्होंने सवाल किया कि इस का अर्थ क्या है? राहुल गांधी इंडिया ब्लॉक के प्रमुख नेता हैं और लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) के खिलाफ लड़ रहे हैं, जो उसी गठबंधन का हिस्सा है। इससे पहले बृंदा करात ने कहा था कि राहुल गांधी और कांग्रेस को सोचने की जरूरत है, वो कहते हैं कि उनकी लड़ाई बीजेपी से है। करात ने कहा कि केरल में अगर आप आते हैं और वामपंथ के खिलाफ लड़ते हैं तो आप क्या संदेश दे रहे हैं? इसलिए उन्हें अपनी सीट के बारे में एक बार फिर से सोचने की जरूरत है।
अमेठी के बाद वायनाड में भी भाजपा राहुल गांधी के खिलाफ अपनी ताकत दिखाने की कोशिश में है। भाजपा की ओर से इस बार मजबूत उम्मीदवार और पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष के सुरेंद्रन को उतारा गया है। के सुरेंद्रन साफ तौर पर कह चुके हैं कि जैसा राहुल गांधी को अमेठी में चुनौती मिली थी, ठीक वैसा उन्हें यहां इस बार मिलेगा। भाजपा और स्मृति ईरानी कोशिश कर रही हैं कि वायनाड गांधी परिवार के लिए आसान काम न बने। तीन लोकसभा और पांच विधानसभा चुनाव हार चुके सुरेंद्रन को अब स्मृति ईरानी से मदद मिलेगी। स्मृति ईरानी 4 अप्रैल को वायनाड में के सुरेंद्रन के नामांकन के दिन उनके साथ शामिल होंगी। ऐसा लगता है कि अमेठी के बाद स्मृति ईरानी दक्षिण में राहुल गांधी का पीछा कर रही हैं। वायनाड के कुल मतदाताओं में अनुसूचित जाति तीन प्रतिशत, जबकि अनुसूचित जनजाति 9.5 प्रतिशत हैं। यहां पर मुस्लिम 32 फीसदी और ईसाई 13 फीसदी हैं।