Russia and Ukraine War पर भारत का न्यूट्रल रुख! युद्धविराम प्रस्ताव पर मतदान से बनाई दूरी, शांति के लिए संवाद पर जोर"

By रेनू तिवारी | Feb 25, 2026

रूस-यूक्रेन संघर्ष के चार वर्ष पूरे होने के अवसर पर संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में एक महत्वपूर्ण मसौदा प्रस्ताव पेश किया गया। इस प्रस्ताव में तत्काल और बिना शर्त युद्धविराम के साथ-साथ यूक्रेन में स्थायी शांति की स्थापना का आह्वान किया गया था। हालाँकि, भारत ने एक बार फिर अपनी तटस्थ नीति को बरकरार रखते हुए इस मतदान में हिस्सा नहीं लिया।

पक्ष में मतदान: 107 देश

विरोध में मतदान: 12 देश

अनुपस्थित (Abstained): 51 देश (भारत सहित)

यूक्रेन द्वारा पेश किए गए इस प्रस्ताव पर मतदान से दूरी बनाने वाले 51 सदस्य देशों में भारत भी शामिल था। इस प्रस्ताव में संयुक्त राष्ट्र चार्टर सहित अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप व्यापक, न्यायपूर्ण और स्थायी शांति की मांग दोहराई गई।

प्रस्ताव में युद्धबंदियों के पूर्ण आदान-प्रदान, गैरकानूनी रूप से हिरासत में लिये गए सभी व्यक्तियों की रिहाई और जबरन स्थानांतरित या निर्वासित किए गए सभी नजरबंदियों और नागरिकों की वापसी की मांग को भी दोहराया गया। इनमें बच्चे भी शामिल हैं। प्रस्ताव में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सीमाओं के भीतर और क्षेत्रीय जलक्षेत्रों तक यूक्रेन की संप्रभुता, स्वतंत्रता, एकता और क्षेत्रीय अखंडता के प्रति अपनी दृढ़ प्रतिबद्धता की पुष्टि की गई।

भारत का रुख: संतुलन और संवाद

भारत ने युद्ध की शुरुआत से ही स्पष्ट किया है कि किसी भी समस्या का समाधान युद्ध के मैदान में नहीं, बल्कि कूटनीति और संवाद के माध्यम से ही संभव है। मतदान से दूरी बनाकर भारत ने यह संकेत दिया है कि वह किसी भी एक पक्ष के खेमे में खड़े होने के बजाय शांति के लिए एक स्वतंत्र और निष्पक्ष मध्यस्थ की भूमिका को प्राथमिकता देता है। 

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