चीन को जोर का झटका देने की तैयारी में भारत, चीनी कंपनियों का होगा बड़ा नुकसान

By अंकित सिंह | Jun 18, 2020

लद्दाख सीमा पर विवाद के बाद भारत और चीन के बीच व्यापारिक रिश्ते भी अब डगमगाने लगे है। 20 सैनिकों के शहादत के बाद देशभर में चीन के खिलाफ प्रदर्शन हो रहे है। इस प्रदर्शन में लोग लगातार यह मांग कर रहे है कि भारत को चीन के साथ अपने व्यापारिक रिश्ते खत्म कर देनी चाहिए। इस बीच भारत की ओर से कुछ कंपनियों ने भी चीन से कारोबारी रिश्ते बंद करने की शुरुआत कर दी है। हालांकि देश में चीन ने इतना बड़ा निवेश कर रखा है कि हर जगह से इसे खत्म करना फिलहाल मुश्किल नजर आता है। बावजूद इसके भारत चीन की करतूत के कारण उसे सबक सिखाने में जुट गया है। इसकी शुरुआत भारतीय रेलवे ने कर दी है।

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उधर, चीन के रवैये से चाय व्यापारी भी नाराज हैं। इसका असर दोनों देशों के कारोबार पर पड़ना लाजमी है। चाय बोर्ड के चेयरमैन प्रभात के. बेजबरुआ ने कहा कि चाय निर्यात के लिए चीन एक ‘अहम बाजार’ है, लेकिन व्यापार राष्ट्रीय हितों से ऊपर जाकर नहीं हो सकता। गलवान घाटी में सोमवार रात हुए संघर्ष में भारतीय सेना के 20 जवान शहीद हो गए। बेजबरुआ ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा, सीमाओं और हमारे जवानों की सुरक्षा सर्वोपरि है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि इसकी पुनरावृत्ति ना हो। चीन का अपने लगभग सभी पड़ोसी देशों के साथ सीमा विवाद है। चीनी स्मार्टफोन निर्माता ओप्पो (Oppo) ने भारत में अपने फ्लैगशिप स्मार्टफोन के लॉन्च को कैंसिल कर दिया है। अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार ओप्पो ने यह फैसला लिया है। बता दें कि स्मार्टफोन की बड़ी चीनी कंपनी ओप्पो अपनी Find X2 सीरीज की भारत में ऑनलाइन लॉन्चिंग बुधवार को शाम 4 बजे करने वाली थी। 

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दोनों देशों के बीच हर साल करीब 6 लाख करोड़ रुपए का द्विपक्षीय व्यापार होता है। द्विपक्षीय व्यापार में आयात और निर्यात का बड़ा ही योगदान होता है। भारत चीन से हर साल करीब 4.9 लाख करोड़ रुपए का आयात करता है जबकि चीन भारत से 1.2 लाख करोड़ का निर्यात करता है। भारत में हर सेक्टर की कंपनियां चीन से होने वाले आयात पर निर्भर करती है। बल्क ड्रग्स एंड इंटरमीडियरीज सेक्टर की 68 फ़ीसदी कंपनी चीन से होने वाले आयात पर निर्भर करती है। इलेक्ट्रॉनिक उत्पादन में भी भारत की कंपनियों में चीन का बहुत बड़ा रोल है। इलेक्ट्रॉनिक्स में 45 फ़ीसदी, गारमेंट्स में 27 फ़ीसदी और ऑटो सेक्टर में 9 फ़ीसदी निर्भरता चीन से होने वाले आयात पर है। देश में चीन के खिलाफ हो रहे प्रदर्शन के बीच चीनी कंपनियों को बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है। भारत में चीन की कई कंपनियों का बड़ा कारोबार है। इन कंपनियों का भारत में करीब 1.98 लाख करोड़ रुपए का निवेश आने का अनुमान है। लेकिन तनाव अगर चरम पर हो तो व्यापारिक रिश्ते बदल जाते है।

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इसमें ऐसे कई संगठन है जो लगातार चीनी कंपनियों को भारतीय प्रोजेक्ट के ठेके ना दिए जाने की मांग कर रहे है। इसमें आरएसएस से जुड़ा स्वदेशी जागरण मंच भी है। भारत के कुल विदेशी व्यापार का 10 फ़ीसदी हिस्सा अकेले चीन से होता है। चीन भारत का सबसे बड़ा दूसरा आयातक और चौथा सबसे बड़ा निर्यातक साझेदार है। मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक के क्षेत्र में चीनी कंपनियों का भारत में दबदबा है। चीनी कंपनी शाओमी भारत में सबसे ज्यादा स्मार्टफोन बेचने वाली कंपनी है। इसके अलावा अभी ओप्पो, रियल मी जैसी ब्रांड भी भारतीय बाजार में अपना दबदबा बना चुकी है। हालांकि अगर चीन के साथ व्यापारिक रिश्ते तबाह होते है तो सबसे ज्यादा नुकसान भी चीन को ही उठाना पड़ेगा। भारत अपने कारोबारी रिश्ते किसी अन्य देशों से जरूर बढ़ा सकता है परंतु चीन को इतना बड़ा व्यापारिक देश नहीं मिल पाएगा जिससे उसकी अर्थव्यवस्था पूरी तरीके से चरमरा सकती है।

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