By अभिनय आकाश | Sep 22, 2026
भारत और जापान ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति और स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए आपसी रक्षा टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप, संयुक्त सैन्य अभ्यास और क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग को बेहतर बनाने पर चर्चा की। यह बैठक नई दिल्ली में रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह और जापान की लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (LDP) के सांसदों के एक प्रतिनिधिमंडल के बीच हुई, जिसका नेतृत्व तारो कोनो कर रहे थे। रक्षा मंत्रालय ने बैठक के बारे में जानकारी देते हुए X पर पोस्ट किया, "रक्षा सचिव श्री राजेश कुमार सिंह ने 22 सितंबर, 2026 को नई दिल्ली में जापान की LDP के इंटरनेशनल कोऑपरेशन के डायरेक्टर जनरल श्री तारो कोनो से मुलाकात की। उन्होंने इंडो-पैसिफिक में शांति और स्थिरता के लिए आपसी रक्षा टेक्नोलॉजी सहयोग, संयुक्त अभ्यास और क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने पर सार्थक बातचीत की। हालांकि, बेंच ने इस मामले पर दोबारा विचार करने से इनकार कर दिया। जस्टिस बागची ने कहा कि कथित गलत इस्तेमाल के अलग-अलग मामलों के आधार पर उस कानून पर दोबारा विचार नहीं किया जा सकता, जिसे पहले ही तीन जजों की बेंच सही ठहरा चुकी है।
बेंच ने यह भी कहा कि अदालतें उन मामलों में दखल दे सकती हैं जहां कानूनी प्रावधानों का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल हुआ हो।
याचिका में खास तौर पर धारा 18A को चुनौती दी गई है। इसे 2018 के संशोधन के ज़रिए जोड़ा गया था और इसमें प्रावधान है कि एक्ट के तहत FIR दर्ज करने के लिए किसी शुरुआती जांच की ज़रूरत नहीं है और गिरफ्तारी के लिए भी किसी पूर्व मंज़ूरी की आवश्यकता नहीं है। याचिकाकर्ताओं ने 'सुभाष काशीनाथ महाजन बनाम महाराष्ट्र राज्य' मामले में सुप्रीम कोर्ट के 2018 के फैसले का हवाला दिया। उस फैसले में झूठे मामलों में फंसाए जाने के खिलाफ सुरक्षा उपाय तय किए गए थे। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि बाद में किए गए कानूनी संशोधन ने उन सुरक्षा उपायों को कमज़ोर कर दिया।