250 सुखोई फाइटर जेट्स पर भारत का बड़ा फैसला, चीन के उड़ जाएंगे होश!

By अभिनय आकाश | May 28, 2026

भारतीय वायुसेना की भविष्य की युद्ध क्षमताओं को पूरी तरह से बदलने का एक मास्टर स्ट्रोक चल दिया गया है। भारत का सबसे भरोसेमंद शिकारी सुखोई 30 एमKI की जो अब एक ऐसे डिजिटल कवच से लैस होने जा रहा है जिसे भेद पाना दुश्मन के लिए नामुमकिन हो जाएगा। दरअसल इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर आधुनिक युद्ध अब केवल उन मिसाइलों और बमों के बारे में नहीं रह गया है जिन्हें हम देख सकते हैं। आज के समय में यह एक अदृश्य जंग लड़ी जा रही है जिसे हम इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर कहते हैं। उसका नाम भी है। अब इस युद्ध में दुश्मन का सबसे बड़ा हथियार मिसाइल नहीं होता है बल्कि रेडियो तरंगे होती हैं। अगर दुश्मन आपके फाइटर जेट के संचार और नेविगेशन सिस्टम को जाम कर दे, जाम कर दे तो करोड़ों का विमान आसमान में एक अंधे पक्षी की तरह ब्लास्ट हो जाएगा, तबाह हो जाएगा। 

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 मल्टी कॉनस्टेलेशन का जादू और एनएवीआईसी का उदय इस नए सिस्टम की सबसे बड़ी विशेषता है और इसका मल्टीकस्टेलेशन होना इसकी सबसे बड़ी जीत है। इसको सरल शब्दों में समझा जाए तो सुखोई को यह नया एंटीना केवल एक देश के सेटेलाइट सिस्टम पर निर्भर नहीं करेगा। यह एक साथ भारत के अपने स्वदेशी नेविक सिस्टम, अमेरिका के जीपीएस और रूस के सिस्टम और चीन के बाय डू और यूरोप के गैलीलियो सिस्टम से सिग्नल प्राप्त करने में सक्षम हो जाएगा। अब यहां महत्वपूर्ण भूमिका हमारे अपने नैविक यानी कि नेविगेशन विद इंडियन कॉनस्टिलेशन की है। भारत ने कारगिल युद्ध के कड़वे अनुभव से सीखा था कि संकट के समय विदेशी प्रणालियों पर भरोसा नहीं किया जा सकता था। अब जब हमारे सुखोई भारत की अपनी सेटेलाइट प्रणाली यानी नैविक का उपयोग करेंगे तो किसी भी विदेशी शक्ति के पास हमारे विमानों के सिग्नल को बंद करने की ताकत ही नहीं हो पाएगी। खासकर चीन के पास यह आत्मनिर्भर भारत की रक्षा क्षेत्र में एक बहुत बड़ी जीत है।

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