By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Oct 19, 2022
आईओआर और रक्षा मंत्रियों के सम्मेलन को संबोधित करते हुए राजनाथ ने कहा, “भारत ‘वैश्विक व्यवस्था की किसी भी पदानुक्रमित अवधारणा को स्पष्ट रूप से खारिज करता है।’ वह आपसी सम्मान और हर देश की भलाई पर आधारित अवधारणा में विश्वास करता है।” उन्होंने कहा, “भारत एक जिम्मेदार भूमिका निभाने और क्षेत्रीय एवं वैश्विक सुरक्षा की दिशा में काम करते रहने के लिए प्रतिबद्ध है। हमने हिंद महासागर क्षेत्र के विभिन्न द्विपक्षीय और बहुपक्षीय मंचों पर संगठनात्मक और परिचालन पहलुओं के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का प्रदर्शन किया है। हम यह सुनिश्चित करने के लिए अपनी भागीदारी को आगे बढ़ाने को तत्पर हैं कि आईओआर निकट भविष्य में वैश्विक अर्थव्यवस्था को गति देने वाले इंजन के रूप में अपनी सही जगह हासिल कर ले।” राजनाथ ने कहा कि 21वीं सदी में आईओआर क्षेत्र के देशों के सतत विकास के लिएसमुद्री संसाधनों का दोहन महत्वपूर्ण स्रोत होगा। उन्होंने कहा, “इसलिए हमें यह सुनिश्चित करने के लिए सहयोगात्मक प्रयास पर जोर देना चाहिए कि हिंद महासागर क्षेत्र का समुद्री विस्तार शांतिपूर्ण ढंग से हो और इसका क्षेत्रीय एवं वैश्विक खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बेहतर इस्तेमाल किया जा सके।” रक्षा मंत्री ने कहा कि ‘समुद्री मार्गों से निर्यातित, समर्थित या समन्वित’ आतंकवाद चिंता का मुख्य विषय बना हुआ है और ‘भारत समुद्री मार्गों से आतंकवाद के प्रसार के खिलाफ अपने सुरक्षा ढांचे को मजबूत बनाना जारी रखता है।’ उन्होंने समुद्री मार्गों से मादक पदार्थों की बढ़ती तस्करी और मछली पकड़ने की अवैध एवं अनियंत्रित गतिविधियों को उन प्रमुख चुनौतियों के रूप में रेखांकित किया, जिनसे निपटने के लिए हिंद महासागर क्षेत्र के देशों को मिलकर काम करने की जरूरत है।