डिजिटल अर्थव्यवस्था के दम पर 2030 तक 12 गीगावाट होगी भारत की डेटा सेंटर क्षमता: रिपोर्ट

By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Jul 27, 2026

नयी दिल्ली, 27 जुलाई कृत्रिम मेधा (एआई) के तेजी से बढ़ते उपयोग, बड़े पैमाने पर क्लाउड अवसंरचना में निवेश और डिजिटल अर्थव्यवस्था के दम पर भारत की डेटा सेंटर क्षमता वर्ष 2025 के 2.2 गीगावाट से बढ़कर 2030 तक 12 गीगावाट से अधिक होने का अनुमान है। सोमवार को जारी एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई। परामर्श कंपनी वुड मैकेंजी की रिपोर्ट के अनुसार, एआई के लिए समर्पित डेटा सेंटर क्षमता वर्ष 2025 के 275 मेगावाट से बढ़कर 2030 तक 6,546 मेगावाट होने का अनुमान है।

अब डेवलपर्स और निवेशकों के लिए सवाल यह नहीं रह गया है कि भारत में निवेश किया जाए या नहीं, बल्कि यह है कि निवेश कहां और किस प्रकार किया जाए।’’ रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 में 32 लाख करोड़ रुपये मूल्य वाली और सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में लगभग 12 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाली भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था डेटा सेंटर अवसंरचना की मांग को बढ़ा रही है। देश में 103 करोड़ से अधिक सक्रिय इंटरनेट उपयोगकर्ता हैं और हर महीने करीब 2,200 करोड़ यूपीआई लेनदेन किए जाते हैं। भारत का घरेलू एआई बाजार वर्ष 2032 तक 11.7 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है।

रिपोर्ट में कहा गया कि महाराष्ट्र और तमिलनाडु वर्तमान में देश के कुल स्थापित सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) भारका लगभग 65 प्रतिशत हिस्सा रखते हैं। हालांकि, भविष्य में आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक में निवेश बढ़ने की संभावना है। ये उभरते बाजार वैश्विक स्तर की बड़ी क्लाउड सेवा कंपनियों से महत्वपूर्ण निवेश आकर्षित कर रहे हैं।

इनमें अमेजन वेब सर्विसेज और गूगल के अलावा घरेलू कंपनी अदाणीकॉननेक्स भी शामिल है, जिसने 2.6 गीगावाट क्षमता की विकास परियोजनाओं की घोषणा की है। रिपोर्ट के अनुसार, विश्वसनीय और प्रतिस्पर्धी दरों पर बिजली की उपलब्धता अब डेटा सेंटर उद्योग की सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरी है।

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