UN Peacekeepers पर हमले करने वालों की तय हो जवाबदेही, संयुक्त राष्ट्र में बोला भारत

By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Nov 06, 2026

(योषिता सिंह) संयुक्त राष्ट्र, छह नवंबर भारत ने संयुक्त राष्ट्र शांतिसैनिकों के खिलाफ हमलों के दोषियों को जवाबदेह ठहराने का आह्वान किया है, और इस बात को रेखांकित किया है कि ब्लू हेल्मेट्स (शांतिसैनिकों) को विषम और तकनीकी खतरों का सामना करना पड़ रहा है। भारत संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना में सबसे अधिक सैनिक भेजने वाले देशों में से एक है, जिसने अब तक 50 मिशनों में 3,00,000 से अधिक सैनिकों को तैनात किया है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन के सैन्य सलाहकार, कर्नल तरुणेंद्र प्रताप सिंह ने यहां बृहस्पतिवार को कहा, ‘‘भारत शांतिसैनिकों की सुरक्षा को शांति स्थापना के सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं में से एक मानता है।’’ शांति स्थापना अभियानों के सभी पहलुओं की व्यापक समीक्षा पर आयोजित वार्षिक परिचर्चा को संबोधित करते हुए कर्नल सिंह ने कहा, ‘‘आज के कर्मियों को विषम और तकनीकी रूप से उन्नत खतरों का सामना करना पड़ता है, और शांतिसैनिकों पर हमला करने वालों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।’’ उन्होंने कहा कि शांतिसैनिकों के खिलाफ अपराधों की जवाबदेही पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2589 पर भारत का निरंतर नेतृत्व इसी दृढ़ विश्वास को दर्शाता है।

यह प्रस्ताव अगस्त 2021 में 15 सदस्यीय इस निकाय की भारत की अध्यक्षता के दौरान अपनाया गया था। उन्होंने कहा कि चूंकि भारत शांति स्थापना को संयुक्त राष्ट्र के मूल उद्देश्य के लिए ‘‘अपरिवर्तनीय’’(अनिवार्य) मानता है, इसलिए नयी दिल्ली ने 2028-29 के कार्यकाल के लिए सुरक्षा परिषद के अस्थायी सदस्य के रूप में अपनी उम्मीदवारी के लिए इसे एक प्राथमिकता के रूप में चिह्नित किया है। सिंह ने कहा, ‘‘हम संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना और एक ऐसे शांति स्थापना ढांचे के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता की पुष्टि करते हैं जो बेहतर संसाधनों से युक्त, बेहतर रूप से सुरक्षित और स्वयं विश्व का अधिक प्रतिनिधित्व करने वाला हो।’’ उन्होंने उन 184 भारतीय शांतिसैनिकों को भी श्रद्धांजलि अर्पित की जिन्होंने ‘ब्लू हेल्मेट्स’ के रूप में अपने कर्तव्य का पालन करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया है।

उन्होंने कहा, ‘‘इस अनिवार्य उद्देश्य के लिए भारत की प्रतिबद्धता केवल दार्शनिक नहीं है; यह बुनियादी है, जो सात दशकों के परिचालन जुड़ाव में निहित है, और हमारे शांतिसैनिकों के पसीने और खून से आकार लेती है।’’ सिंह ने कहा कि शांति अभियानों के सफल होने की संभावना तब सबसे अधिक होती है जब वे एक व्यापक राजनीतिक प्रक्रिया के साथ जुड़े हों, जिसमें स्पष्ट रूप से परिकल्पित राजनीतिक परिणाम और शांतिसैनिकों के लिए पर्याप्त संसाधन हों। भारत ने सैनिकों और पुलिस का योगदान देने वाले देशों के लिए उन ‘मैंडेट’ (कार्यक्षेत्र) को आकार देने में एक ‘‘व्यवस्थित आवाज’’ होने की आवश्यकता पर भी जोर दिया, जिन्हें वे लागू करते हैं। सिंह ने 1960 से महिला शांतिसैनिकों की भारत की तैनाती पर भी प्रकाश डाला, और इस विश्वास को दोहराया ‘‘कि वे जनादेश को पूरा करने में केंद्रीय भूमिका में बनी हुई हैं।’’ वर्ष 2007 में, भारत ने लाइबेरिया में पहली बार सर्व-महिला पुलिस इकाई की तैनाती की थी, जिसने वैश्विक स्तर पर प्रशंसा अर्जित की और यह निर्णायक रूप से सिद्ध किया कि महिला शांतिसैनिक शांति स्थापना में विशिष्ट रूप से प्रभावी हैं।

सिंह ने बताया कि भारत ने वर्तमान में 160 महिला शांतिसैनिकों को तैनात किया है।

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