By Ankit Jaiswal | Sep 22, 2026
एशियाई खेलों में सोमवार को भारतीय तैराकी टीम के लिए दिन पूरी तरह उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। दो बार ओलंपिक में हिस्सा ले चुके श्रीहरि नटराज ने पुरुषों की 50 मीटर बैकस्ट्रोक स्पर्धा के फाइनल में जगह बना ली, लेकिन बाकी भारतीय तैराक अपनी-अपनी शुरुआती हीट से आगे नहीं बढ़ सके। दूसरी ओर, सेपकटकरॉ में भी भारत को मेजबान जापान के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा।
इसी प्रतियोगिता में भारत के ऋषभ दास 25.41 सेकंड के समय के साथ 11वें स्थान पर रहे। वह फाइनल में जगह बनाने से मामूली अंतर से चूक गए और रिजर्व तैराक के तौर पर रह गए। बता दें कि ऋषभ ने इससे पहले रविवार को पुरुषों की 100 मीटर बैकस्ट्रोक में छठा स्थान हासिल किया था।
पुरुषों की 50 मीटर फ्रीस्टाइल में आकाश मणि और गीतश शाह भी फाइनल में नहीं पहुंच सके। आकाश 23.43 सेकंड के समय के साथ अपनी हीट में सबसे आगे रहे, लेकिन कुल परिणाम में 26वें स्थान पर रहे। गीतश ने 23.57 सेकंड का समय निकाला और अपनी हीट में आखिरी स्थान पर रहे। इस स्पर्धा में दक्षिण कोरिया के यंगबॉम किम ने 21.71 सेकंड का समय लेकर नया एशियाई खेल रिकॉर्ड बनाया।
पुरुषों की 100 मीटर बैकस्ट्रोक में दानुश सुरेश भी आगे नहीं बढ़ सके। उन्होंने अपनी हीट में आठवां स्थान हासिल किया और 1 मिनट 3.46 सेकंड के समय के साथ कुल 22वें स्थान पर रहे।
इसके अलावा साजन प्रकाश, दक्षन शशिकुमार, वेदांत माधवन और अनीश सुनील की भारतीय चौकड़ी भी पुरुषों की 4×200 मीटर फ्रीस्टाइल रिले के फाइनल में जगह नहीं बना सकी। भारतीय टीम ने 7 मिनट 24.32 सेकंड का समय लिया और 13 टीमों में नौवें स्थान पर रही।
सेपक टकरॉ में भारत की शुरुआत अच्छी रही, लेकिन टीम इस बढ़त को बरकरार नहीं रख सकी। ग्रुप बी के रेगु मुकाबले में भारत ने पहला मैच 15-13, 15-9 से जीत लिया था। इसके बाद जापान ने वापसी की और दूसरा मैच 12-15, 15-17, 11-15 से अपने नाम कर मुकाबला बराबर कर दिया। निर्णायक तीसरे मैच में जापान ने भारत को 15-9, 15-12 से हराकर मुकाबला 2-1 से जीत लिया।
भारत अब मंगलवार को अपने अगले ग्रुप मुकाबले में मलेशिया का सामना करेगा। गौरतलब है कि पिछले एशियाई खेलों में भारत ने महिला टीम रेगु स्पर्धा में कांस्य पदक जीता था। सेपक टकरॉ वर्ष 1990 से एशियाई खेलों का हिस्सा है और भारत ने 2006 में पहली बार इसमें भाग लिया था। दक्षिण-पूर्व एशिया में इस खेल की मजबूत पकड़ है और भारत भी पिछले कुछ वर्षों में इस खेल में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रहा हैं।