युद्ध के बीच भारत पर आया बड़ा संकट, तभी बीच में कूद पड़ा रूस

By अभिनय आकाश | Mar 05, 2026

लगातार हो रहे भीषण हमलों ने मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ा दिया है। अमेरिका और इजराइल की ओर से हो रहे अटैक में अब तक हजारों ईरान के लोगों की मौत हो चुकी है और सेना को भी भारी नुकसान पहुंचा है। तो ईरान भी इजराइल और अमेरिका के सैन्य ठिकानों पर ताबड़तोड़ मिसाइलें दागते हुए भयंकर तबाही मचा रहा है। अब यह जंग इतनी खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुकी है कि अगर यह ठंडी नहीं पड़ी, तो मिडिल ईस्ट के साथ ही पूरी दुनिया को बड़े खतरे में डाल सकती है। इसी बीच अमेरिका ने भारत से लौट रहे एक ईरानी युद्धपोत को श्रीलंका के पास हमला करके डुबो दिया है। हमले में अब तक 87 ईरानी नौसैनिक मारे गए हैं। यह युद्धपोत भारत में आयोजित एक नौसेना अभ्यास में शामिल होकर वापस लौट रहा था। 

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दरअसल भारतीय महासागर और एशियाई जल क्षेत्र में करीब 9.5 मिलियन बैरल रूसी तेल टैंकरों मौजूद है। जिसे जरूरत पड़ने पर जल्द भारत भेजा जा सकता है। भारत के पास अभी करीब 25 दिन की मांग के बराबर तेल का स्टॉक है। यह स्टॉक लंबे समय के संकट से निपटने के लिए पर्याप्त नहीं है। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता है और अपनी जरूरत का करीब 90% कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में वैश्विक संकट का असर सीधे देश की अर्थव्यवस्था महंगाई और पेट्रोल डीजल की कीमतों पर पड़ सकता है। ऐसी स्थिति को देखते हुए रूस ने भारत को अतिरिक्त तेल उपलब्ध कराने की पेशकश की है। यानी रूस हमेशा की तरह भारत का साथ देने के लिए सामने आ गया है। जो बताता है कि यह दोस्ती फायदे नुकसान की नहीं बल्कि पारंपरिक है और अटूट विश्वास की है।

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