By अभिनय आकाश | Aug 04, 2026
नेपाल में इस वक्त चीनी चीनी नहीं बल्कि सोना बन चुकी है। जिस चीनी से चाय और मिठाइयां होती है मीठी उसकी कड़वाहट ने पूरे नेपाल में हड़कंप मचा दिया। आलम यह है कि दुकानों से चीनी गायब हो रही है और जो मिल रही हैं उसके दाम आसमान छू रहे हैं। दरअसल कहानी शुरू होती है भारत के एक बड़े फैसले से। दुनिया के दूसरे सबसे बड़े चीनी उत्पादक देश यानी हमारे भारत ने घरेलू कीमतों को काबू में रखने के लिए चीनी के निर्यात यानी एक्सपोर्ट पर बैन लगा दिया। यह बैन मई के महीने में लगाया गया था। जो फिलहाल सितंबर 2026 तक या फिर अगले आदेश तक जारी रहेगा। भारत ने यह फैसला क्यों लिया यह जान लीजिए। दरअसल अलनीनो के चलते सूखे की आशंका और गन्ने की कम पैदावार को देखते हुए मोदी सरकार अपनी जनता के लिए स्टॉक सुरक्षित रखना चाहती थी। लेकिन भारत का यह सुरक्षा कवच नेपाल के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती बन गया।
नेपाल की डिमांड और सप्लाई की गणित। दरअसल दोस्तों नेपाल में हर महीने 20,000 से 25,000 टन चीनी की जरूरत होती है। त्योहारों के दौरान यह बढ़कर 3000 टन तक पहुंच जाती है। सालाना मांग 3 लाख टन है। जबकि नेपाल का अपना उत्पादन केवल 1.8 लाख से 2.15 लाख टन के बीच रहता है। यानी करीब 1 लाख टन चीनी के लिए नेपाल पूरी तरह से आयात पर निर्भर है। साल्ट ट्रेडिंग कॉरपोरेशन के पास फिलहाल स्टॉक बहुत कम है। सरकार भारत से जी टू जी यानी सरकार से सरकार समझौते के तहत चीनी मांगने की कोशिश कर रही है। लेकिन पिछला अनुभव अच्छा नहीं रहा। पिछले साल नेपाल ने 60 टन चीनी मांगी थी। लेकिन भारत ने केवल 25,000 टन की अनुमति दी थी। ऊपर से हाई कस्टम ड्यूटी के कारण आयातित चीनी बाजार भाव से भी महंगी हो जाती है। खैर कुल मिलाकर यह पहली बार नहीं है। सितंबर 2023 में भी जब भारत ने बैन बढ़ाया था, प्रतिबंध बढ़ाया था तब नेपाल में चीनी की कीमतें ₹88 से सीधे ₹160 प्रति किलो तक पहुंच गई थी।