भारत ने विभिन्न देशों से मुक्त व्यापार समझौते करने में बढ़ाई दिलचस्पी, कारोबारियों को मिलेंगे ढेरों फायदे

By कमलेश पांडे | Apr 07, 2025

भारत ने दो देशों के बीच मुक्त व्यापार समझौते करने में  दिलचस्पी दिखाई है, ताकि उसके कारोबारियों को भी द्विपक्षीय व्यापार के फायदे मिल सकें। जानकारों का कहना है कि भारत अमेरिका समेत ब्रिटेन, यूरोपीय संघ, ओमान, कतर, न्यूजीलैंड, पेरू, श्रीलंका आदि देशों के साथ मुक्त व्यापार और द्विपक्षीय कारोबार समझौतों पर वार्ता कर रहा है, जो यदि सफल हुआ तो इससे हासिल नए बाजार में भारत के छोटे उद्योगों को लगभग डेढ़ दर्जन से ज्यादा करार मिलेंगे। समझा जाता है कि इससे अमेरिका द्वारा भारत पर लगाये गए जवाबी आयात शुल्क भी बेअसर हो जाएंगे। 


इस बारे में आर्थिक मामलों के जानकारों का कहना है कि यदि लक्षित देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौतों को करने में भारत सफल हो जाता है तो न केवल सीमा शुल्क में कमी आएगी, बल्कि उन्हें खत्म भी किया जा सकता है। इससे वहां के बाजारों तक भारतीय मालों की पहुंच भी आसान हो जाएगी। इसके अलावा सम्बन्धित देशों के बीच व्यापार की गति तेज होगी और वहां होने वाले निवेश की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी। साथ ही, बौद्धिक संपदा की रक्षा संभव हो सकेगी। विभिन्न सेवाओं का व्यापार भी बढ़ेगा। इससे जहां उन देशों के साथ लॉजिस्टिक लागत कम आएगी, वहीं छोटे व्यवसायों को बम्पर मौके मिलेंगे। 

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यही वजह है कि अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए जवाबी टैरिफ यानी आयात शुल्क के बीच भारत ने दुनिया के बाकी देशों के साथ जारी व्यापार समझौतों की गति तेज कर दी है। बहरहाल भारत सरकार की कोशिश है कि न केवल अमेरिका के साथ द्विपक्षीय समझौता तेजी से पूरा हो, बल्कि यूरोपीय संघ, न्यूजीलैंड, ओमान, ब्रिटेन जैसे अन्य देशों के साथ भी  मुक्त व्यापार (एफटीए) और द्विपक्षीय समझौतों को जल्द से जल्द पूरा किया जाए। इसके दृष्टिगत भारत सरकार ने अपनी ओर से ततपरता बढ़ा दी है ताकि भारतीय मालों पर अमेरिका द्वारा लगाए गए 26 प्रतिशत आयात शुल्क (अमेरिकी रेसिप्रोकल टैक्स) का न्यूनतम असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़े। समझा जाता है कि भारत सरकार की इस विषयक सफलता से भारत के उद्यमियों को अन्य देशों के साथ मिलकर कारोबार करने का मौका मिलेगा। 


उल्लेखनीय है कि मौजूदा वक्त में अमेरिकी व्यापार नीतियों के परिवर्तित स्वरूप को देखते हुए अन्य देशों ने भी भारत के साथ चल रहे व्यापार समझौतों को लेकर जारी वार्ता में तेजी लाने की इच्छा जताई है, जिसे भारतीय प्रशासन ने भी हरी झंडी दे दी है। उल्लेखनीय है कि फिलवक्त भारत द्वारा न्यूजीलैंड, अमेरिका, ब्रिटेन, यूरोपीय संघ (ईयू), ओमान, पेरू, कतर, और श्रीलंका जैसे 20 से अधिक देशों के साथ भी व्यापार समझौतों पर वार्ता की जा रही है, जिसके सार्थक परिणाम शीघ्र मिलने की उम्मीद है। इनमें अमेरिका, कतर, ओमान, ब्रिटेन और यूरोपीय संघ के साथ जारी वार्ता को अच्छी खासी प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि इसके सार्थक परिणाम भी बहुत जल्द ही सामने आएं। वहीं, इस बात के प्रबल आसार हैं कि जल्द से जल्द ही इन समझौतों को अंतिम रूप दे दिया जाएगा। क्योंकि अब इन्हीं के जरिए भारत बाकी देशों के साथ मिलकर व्यापार के नए अवसर तलाशने की कोशिश कर रहा है। 


जानकार बताते हैं कि भारत ऑस्ट्रेलिया समेत 13 देशों से इस बाबत पहले ही समझौते कर चुका है। भारत ने विभिन्न देशों/क्षेत्रों अर्थात् जापान, दक्षिण कोरिया, आसियान क्षेत्र के देशों और दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क) मॉरीशस, संयुक्त अरब अमीरात, ऑस्ट्रेलिया के साथ 13 क्षेत्रीय व्यापार समझौते (आरटीए)/मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर हस्ताक्षर किए हैं। हालांकि जानकारों का कहना है कि व्यापार समझौतों के जरिए आगे बढ़ने के अवसर हैं, लेकिन इसी के साथ कुछ चुनौतियां भी जुड़ी हुई हैं, जिन्हें समझे जाने की जरूरत है। विशेषज्ञ बताते हैं कि भले ही भारत ने कुछ दक्षिण एशियाई देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते किये हैं, लेकिन अब चीन उन देशों में अपनी इकाई लगाकर भारत को माल भेज रहा है, जिसे रोके जाने के कूटनीतिक प्रयास करने होंगे। या फिर ऐसे मुक्त व्यापार समझौतों को लेकर भी सजग रहना होगा, अन्यथा भारत के राष्ट्रीय हितों को नुकसान तय है। 


बता दें कि अमेरिका द्वारा भारत पर 26 प्रतिशत अतिरिक्त आयात शुल्क लगाने से कपड़ा और परिधान, खनिज पेट्रोलियम, कृषि, मांस, प्रसंस्कृत पैकेट, प्लास्टिक सामान, मेडिकल, चमड़ा, कागज, हीरे, सोना, स्वर्ण उत्पाद, स्टील और धातु, मशीन, कम्प्यूटर, रसायन, फार्मा, इलेक्ट्रिक उत्पाद और टेलिकॉम आदि क्षेत्रों पर सर्वाधिक असर पड़ेगा, इसलिए भारत सरकार इनकी वैकल्पिक राह आसान बनाने में जुटी हुई है। उल्लेखनीय है कि दो देशों के बीच होने वाले द्विपक्षीय मुक्त व्यापार समझौते के जरिए व्यापार को सुगम बनाया जाता है। क्योंकि समझौते के बाद दोनों पक्षों के बीच व्यापार करना आसान हो जाता है। इस तरह के समझौते के दृष्टिगत दोनों देश मिलकर अपने कारोबारियों व कम्पनियों को आयात शुल्क मुक्त या फिर एक निर्धारित न्यूनतम शुल्क के जरिए वस्तुओं एवं सेवाओं की पहुंच को सुनिश्चित कराते हैं। इसके साथ ही लॉजिस्टिक, भुगतान गारंटी व व्यापार से जुड़ी अन्य सुविधाएं मिलती हैं।


आंकड़े बताते हैं कि भारत और ब्रिटेन के बीच एफटीए को लेकर साल 2022 से लेकर अबतक 14 दौर की चर्चा संपन्न हो चुकी है, जिसके बाद अब वार्ता में पुनः तेजी दृष्टिगोचर हुई है। वहीं, भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच जल्द ही एफटीए वार्ता को अंतिम रूप देने की तैयारी चल रही है। वहीं भारत और ओमान के बीच सीईपीए को लेकर आधिकारिक तौर पर वार्ता नवंबर 2023 में शुरू हुई थी, जिसके मद्देनजर अब समझौता जल्द करने की तैयारी है और उसे अंतिम रूप देने की कोशिशें परवान चढ़ रही हैं। वहीं भारत और यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार संघ के बीच  यानी भारत, आइसलैंड, नार्वे, स्विट्जरलैंड, लिकटेंस्टीन के बीच एक टीईपीए समझौता हुआ है, जिसे और व्यापक बनाने की पहल जारी है। वहीं, भारत और कतर के बीच एफटीए करने की बात चल रही है, जिसके तहत दोनों देश अगले पांच वर्षों में अपने व्यापार को दुगुना यानी 28 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्धता जता चुके हैं। वहीं, भारत और न्यूजीलैंड के बीच एफटीए प्रस्तावित है, जिसको लेकर 10 वर्षों बाद फिर से बातचीत शुरू हुई है। क्योंकि दोनों देश अब जल्द से जल्द इस समझौता को पूरे करने के पक्ष में हैं। वहीं, भारत और अमेरिका के बीच भी द्विपक्षीय व्यापार समझौता को लेकर बातचीत चल रही है, जिसके तहत वर्ष 2030 तक व्यापार को दुगुना करके 500 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। 


दरअसल, उपर्युक्त देशों के साथ चल रही एफटीए, सीईपीए, टीईपीए वार्ता को यदि जल्दी ही लक्षित मुकाम मिल जाता है तो दोनों देशों के बीच आयात कर (टैरिफ) कम किया जाएगा या पूरी तरह से हटा दिया जाएगा, इससे व्यापार सस्ता हो जाएगा। यही नहीं, आयात की सीमाएं यानी कोटा लाइसेंस और तकनीकी नियमों को कम कर वस्तुओं और सेवाओं को सम्बन्धित दूसरे देशों में बेचना आसान हो जाएगा। इसके अलावा, दोनों देशों के बीच सीमा शुल्क की प्रक्रियाएं आसान हो जाएंगी, कागजी काम कम होंगे और सामान को एक देश से दूसरे देश में ले जाने में समय और लागत दोनों घट जाएगी। इसके अतिरिक्त विदेशी कम्पनियों का पैसा सुरक्षित रहता है और यदि कोई विवाद होता है तो उसे सुलझाने के लिए कानूनी तरीके उपलब्ध होते हैं। वहीं, पेटेंट, कॉपीराइट, ट्रेडमार्क जैसी चीज़ों को संरक्षण मिलता है, ताकि नए आविष्कार करने वालों और रचनाकारों के अधिकार सुरक्षित रहें। जबकि बैंकिंग, टेलीकॉम और पेशेवर सेवाओं जैसे क्षेत्रों में नियम आसान करके इनका व्यापार बढ़ाया जाता है। सरकार उद्योगों को लॉजिस्टिक सेवाएं भी उपलब्ध कराती हैं, जिससे उनके लिए यह लागत कम हो जाती है। इससे छोटी कम्पनियों और व्यापारियों को भी विदेश में सामान बेचने का मौका मिलता है, जो पहले सिर्फ बड़ी कम्पनियों तक सीमित था। यही वजह है कि सभी सरकारें दिलचस्पी वाले देशों में मुक्त व्यापार समझौतों को बढ़ावा देती हैं और द्विपक्षीय व्यापार समझौते करती हैं। इस प्रकार दुनियावी अर्थव्यवस्था में तेजी से अपनी जगह बनाते जा रहे भारत के व्यापार के लिए विभिन्न दरवाजे स्वतः खुल जाएंगे, जिससे हमारे उद्यमियों को भी ढेर सारे फायदे होंगे।


- कमलेश पांडेय

वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार

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