By नीरज कुमार दुबे | Nov 29, 2025
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने जानकारी दी है कि भारत का C-130J विमान लगभग 12 टन मानवीय सहायता लेकर कोलंबो पहुँच गया है। यह सामग्री ऑपरेशन सागर बंधु के तहत भेजी गई है, जिसे भारत ने शुक्रवार को श्रीलंका में आए चक्रवात दितवा के बाद तत्काल राहत पहुंचाने के लिए शुरू किया था। इस भीषण चक्रवात में अब तक 80 से ज्यादा लोगों की मृत्यु हो चुकी है। जयशंकर ने ‘X’ पर लिखा: “#OperationSagarBandhu आगे बढ़ रहा है। भारतीय वायुसेना का C-130J विमान लगभग 12 टन राहत सामग्री जिनमें टेंट, तिरपाल, कंबल, स्वच्छता किट और रेडी-टू-ईट खाद्य सामग्री शामिल हैं, कोलंबो पहुँच गया।”
हम आपको बता दें कि चक्रवात दितवा के कारण श्रीलंका में बाढ़ और भूस्खलन की स्थिति गंभीर होती जा रही है। यह हाल के वर्षों में देश के सामने आई सबसे भीषण प्राकृतिक आपदाओं में से एक मानी जा रही है। 80 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और कई प्रांतों में भारी तबाही दर्ज की गई है। श्रीलंका के आपदा प्रबंधन केंद्र (DMC) के अनुसार अब तक 61 लोगों की मौत और 25 लोग लापता हैं। लगभग 12,000 से अधिक परिवारों के 44,000 लोग प्रभावित हुए हैं। पश्चिमी प्रांत में केलनी और अत्तनागलु नदियों का जलस्तर बढ़ने से “अभूतपूर्व आपदा” की चेतावनी जारी की गई है।
मौसम विभाग ने बताया है कि देश के उत्तरी, मध्य, उत्तर-मध्य, उत्तर-पश्चिमी, सबरगमुवा और पश्चिमी प्रांतों में 200 मिमी से अधिक बारिश की संभावना है। त्रिंकोमाली, बदुला, गाले और मतारा जिलों में भी 150 मिमी से अधिक वर्षा होने की चेतावनी दी गई है। DMC ने बताया कि अब तक 4 घर पूरी तरह ध्वस्त हो चुके हैं और 600 से अधिक आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं।
देखा जाये तो भारत द्वारा शुरू किया गया ऑपरेशन सागर बंधु न केवल मानवीय सहायता की एक पहल है, बल्कि दक्षिण एशिया में भारत की रणनीतिक तथा नैतिक प्रतिबद्धताओं का प्रतीक भी है। श्रीलंका जैसे घनिष्ठ पड़ोसी के लिए संकट के समय त्वरित मदद भेजना भारत की क्षेत्रीय भूमिका और कर्तव्य दोनों को रेखांकित करता है। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने समुद्री पड़ोसियों— मालदीव, मॉरीशस, श्रीलंका, सेशेल्स, के लिए जो ‘सागर’ सुरक्षा और विकास संरचना तैयार की है, यह अभियान उसी की एक स्वाभाविक निरंतरता है। C-130J और नौसेना के दोनों प्रमुख पोतों से सहायता भेजना यह दर्शाता है कि भारत केवल वाणी से नहीं, बल्कि धरातल पर भी अपनी जिम्मेदारियाँ निभा रहा है।
देखा जाये तो श्रीलंका इस समय अत्यंत कठिन दौर से गुजर रहा है, आर्थिक संकट के बाद अब प्राकृतिक आपदा ने उसकी अवसंरचना और प्रशासनिक क्षमता को और चुनौती दी है। ऐसे समय में भारत का आगे आना सिर्फ मदद नहीं, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता का प्रयास भी है। लेकिन इसके व्यापक भू-राजनीतिक मायने भी हैं। हिंद महासागर क्षेत्र में चीन की बढ़ती सक्रियता के बीच भारत का “Neighbourhood First” सिद्धांत स्वयं को एक भरोसेमंद, त्वरित और संवेदनशील साझेदार के रूप में स्थापित करता है। श्रीलंका के लिए भी यह संदेश स्पष्ट है कि भारत संकट के समय सबसे पहले खड़ा होने वाला साथी है।
भारत को इस दिशा में आगे भी अपनी क्षमता बढ़ाने की आवश्यकता है— HADR मिशन, तटीय निगरानी, क्षेत्रीय संवाद और आपदा प्रबंधन सहयोग जैसे क्षेत्रों में नेतृत्व कायम रखना होगा। प्राकृतिक आपदाओं के दौर में यह क्षमता न केवल मानवीय दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि कूटनीतिक रूप से भी निर्णायक सिद्ध होती है।
बहरहाल, ऑपरेशन सागर बंधु भारत की मानवतावादी कूटनीति, समुद्री रणनीति और पड़ोसी देशों के प्रति उसकी प्रतिबद्धता का सशक्त प्रतीक बनकर उभरा है और यह भारत को क्षेत्रीय नेतृत्व की वह पहचान देता है जिसकी आज दक्षिण एशिया को सबसे अधिक आवश्यकता है।