IAF Chief Amar Preet Singh ने China-Pakistan के 5th Generation Fighter Jet के प्रति किया सावधान, AMCA में देरी के मुद्दे पर फिर से चेताया

By नीरज कुमार दुबे | Oct 03, 2026

भारत के सामने अब आसमान में एक ऐसी चुनौती आकार ले रही है, जिसे नजरअंदाज करना आने वाले वर्षों में भारी पड़ सकता है। वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह ने साफ कहा है कि पाकिस्तान और चीन का पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों के निर्माण में सहयोग भारत के लिए चिंता का विषय है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल भारत के पास इस खतरे से निपटने की क्षमता है, लेकिन भविष्य की लड़ाई के लिए अब इंतजार की गुंजाइश तेजी से खत्म हो रही है।

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लेकिन यहीं भारत के सामने असली खतरा खड़ा होता है। पाकिस्तान अगर चीन के साथ मिलकर पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान हासिल करता है और उन्हें अपनी सैन्य संरचना में प्रभावी ढंग से एकीकृत कर लेता है, तो भारत की पश्चिमी सीमा पर हवाई शक्ति का समीकरण बदल सकता है। चीन पहले से ही पांचवीं पीढ़ी की लड़ाकू क्षमता विकसित और संचालित कर रहा है। ऐसे में पाकिस्तान को समान तकनीकी पारिस्थितिकी से जोड़ना चीन-पाकिस्तान सैन्य साझेदारी को नई ऊंचाई दे सकता है।

इसके अलावा, भारत की दूसरी बड़ी चुनौती उसकी संख्या है। वर्तमान में वायुसेना के पास केवल 29 लड़ाकू स्क्वाड्रन हैं, जबकि स्वीकृत संख्या 42 है। इस कमी को दूर करने के लिए हर वर्ष करीब 36 से 40 लड़ाकू विमानों की जरूरत बताई गई है। ऐसे समय में पांचवीं पीढ़ी के विमान की क्षमता में देरी भारत के लिए दीर्घकालीन सामरिक जोखिम बन सकती है। इसीलिए वायुसेना प्रमुख ने एएमसीए कार्यक्रम को तेजी से आगे बढ़ाने पर जोर दिया है। यदि इसमें देरी होती है तो वैकल्पिक लड़ाकू विमानों पर विचार करना पड़ सकता है। रूस ने भारत को एसयू-57 की पेशकश की है और भारत में उसके संयुक्त उत्पादन का प्रस्ताव भी सामने आया है, लेकिन अभी इस पर कोई निर्णय नहीं हुआ है। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह भी स्पष्ट कर चुके हैं कि भारत फिलहाल किसी विदेशी पांचवीं पीढ़ी के कार्यक्रम को आगे बढ़ाने की बजाय स्वदेशी एएमसीए पर प्रतिबद्ध है।

हम आपको यह भी बता दें कि एएमसीए के लिए उद्योग प्रस्तावों की समयसीमा हाल में बढ़ाकर 30 अक्टूबर की गई है और निविदाएं 31 अक्टूबर को खोली जानी हैं। पहला प्रोटोटाइप 2028 में उड़ान भरने की उम्मीद है, जबकि वास्तविक तैनाती उसके बाद होगी। देखा जाये तो सामरिक संदेश बिल्कुल स्पष्ट है। भारत के पास आज जवाब है, लेकिन कल की लड़ाई के लिए केवल आज की क्षमता पर्याप्त नहीं होगी। एएमसीए में देरी का मतलब चीन-पाकिस्तान की संयुक्त वायु शक्ति के सामने भविष्य की तकनीकी बढ़त को जोखिम में डालना होगा। भारत को स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी की क्षमता विकसित करनी है, लेकिन जब तक वह तैयार नहीं होती, तब तक अंतरिम विकल्पों पर भी तेज और व्यावहारिक निर्णय लेना होगा। यही आने वाले दशक में भारतीय वायु शक्ति की सबसे बड़ी रणनीतिक परीक्षा होगी।

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