UNSC का अध्‍यक्ष बनते ही भारत ने अपने इरादे किए साफ, अफगानिस्तान पर जताई चिंता, PoK को लेकर कही ये बात

By अभिनय आकाश | Aug 03, 2021

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की कमान मिलते ही भारत ने अफगानिस्तान से लेकर पाकिस्तान तक पर अपनी मंशा साफ कर दी है। एक तरफ जहां भारत ने जम्मू कश्मीर को भारत का आतंरिक मामला बताते हुए अफने इरादे साफ किए वहीं पीओके में बदलाव की बात करते हुए पाकिस्तान की धड़कनों को बढ़ाने का भी काम किया। इसके साथ ही भारत के स्थायी प्रतिनिधि ने अफगानिस्तान की स्थिति को लेकर भी अपनी चिंता जताई है। एक सवाल का जवाब देते हुए संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि और अगस्त महीने के लिए सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष टीएस त्रिमूर्ति ने कहा कि भारत, पाकिस्तान के साथ सामान्य संबंध चाहता है। लेकिन इसके लिए अनुकूल माहौल बनाना इस्लामाबाद की जिम्मेदारी है। एक पत्रकार ने कश्मीर को डिस्प्यूटेड टेरिटरी बोलते हुए टीएस त्रिमूर्ति से धारा 370 हटाने पर सवाल किया। टीएस त्रिमूर्ति ने जवाब में दो टूक कहा कि मैं शुरू में ही कुछ बातें स्पष्ट कर देना चाहता हूं। जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्न एवं अविभाज्य अंग है। मैं समझता हूं कि इसे स्वीकार कर लेना ही जरूरी है। जम्मू कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश से जुड़े मुद्दे भारत के अंदरूनी विषय हैं। 

टीएस त्रिमूर्ति ने जम्मू कश्मीर के भारत का अभिन्न अंग होने की बात दोहराते हुए पाकिस्तान की धड़कने बढ़ाने वाला बयान दे दिया। उन्होंने कहा कि अगर किसी के दर्जे में किसी परिवर्तन की जरूरत है तो वह पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर है। इसका सीधा सा मतलब है कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के दर्जे में बदलाव के लिए उसे खाली किए जाने की जरूरत है। 

अफगानिस्तान को लेकर जताई चिंता

अगस्त महीने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) के अध्यक्ष राजदूत टीएस तिरुमूर्ति ने कहा है कि अफगानिस्तान की स्थिति सुरक्षा परिषद के सभी सदस्यों के लिए गहरी चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि ‘‘हम अफगानिस्तान में आतंकी शिविरों को फिर से पनपने नहीं दे सकते और इसका सीधा असर भारत पर पड़ेगा। तिरुमूर्ति ने कहा, ‘‘अफगानिस्तान की स्थिति सुरक्षा परिषद के सभी सदस्यों के लिए गहरी चिंता का विषय है और हमने देखा है कि हाल के दिनों में हिंसा बढ़ रही है।’’ संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में बात करते हुए संरा में भारत के स्थायी प्रतिनिधि तिरुमूर्ति ने संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट का हवाला दिया जिसमें कहा गया है कि मई-जून के दौरान अफगानिस्तान में हताहतों की संख्या जनवरी और अप्रैल के बीच हताहतों की संख्या से अधिक है।  

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