Metallurgical कोक समेत चार उत्पादों पर भारत ने डंपिंग रोधी शुल्क बढ़ाया

By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Aug 04, 2026

नयी दिल्ली, चार अगस्त भारत ने कुछ रसायनों तथा लौह एवं इस्पात उत्पादों सहित चार वस्तुओं पर जुलाई से लागू किए गए डंपिंग रोधी शुल्क की अवधि बढ़ा दी। वित्त मंत्रालय की अलग-अलग अधिसूचनाओं के अनुसार, सरकार ने एक अन्य उत्पाद पर नया डंपिंग रोधी शुल्क भी लगाया है। सरकार ने ऑस्ट्रेलिया, चीन, कोलंबिया, इंडोनेशिया, जापान और रूस से आयातित ‘लो ऐश मेटलर्जिकल कोक’ (ऊष्मा स्रोत के रूप में इस्तेमाल होने वाला कोक) पर पांच वर्षों के लिए डंपिंग रोधी शुल्क लगाया है।

पेंट, सौंदर्य प्रसाधन और औषधि उद्योग में इस्तेमाल होने वाली सिलिका, रंग एवं प्रिंटिंग इंक में प्रयुक्त एरिलाइड्स तथा लौह एवं गैर-मिश्रधातु इस्पात के कुछ उत्पादों की चीन की कुछ कंपनियों द्वारा लगातार डंपिंग की जा रही थी। वहीं, सौंदर्य प्रसाधन और फ्लेवरिंग उद्योग में इस्तेमाल होने वाला नॉर्मल ब्यूटेनॉल मलेशिया, दक्षिण अफ्रीका और अमेरिका से कम कीमत पर आयात किया जा रहा था। एक अधिसूचना के अनुसार, ‘अनट्रीटेड फ्यूम्ड सिलिका’ के आयात पर डंपिंग रोधी शुल्क 10 फरवरी, 2027 तक बढ़ा दिया गया है।

एरिलाइड्स पर यह शुल्क अगले वर्ष 13 जनवरी तक तथा लौह एवं इस्पात उत्पादों पर 27 जनवरी, 2027 तक बढ़ाया गया है। मेटलर्जिकल कोक पर लगाया गया डंपिंग रोधी शुल्क 42.95 डॉलर प्रति टन से 128.83 डॉलर प्रति टन के बीच है। नॉर्मल ब्यूटेनॉल पर डंपिंग रोधी शुल्क की अवधि पांच वर्षों के लिए बढ़ा दी गई है।

सस्ते आयात में वृद्धि से घरेलू उद्योग को नुकसान पहुंचने का पता लगाने के लिए देश डंपिंग रोधी जांच करते हैं। इसके जवाब में वे जिनेवा स्थित विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के बहुपक्षीय ढांचे के तहत डंपिंग रोधी शुल्क लगाते हैं। इस शुल्क का उद्देश्य निष्पक्ष व्यापार व्यवस्था सुनिश्चित करना और घरेलू उत्पादकों तथा विदेशी उत्पादकों एवं निर्यातकों के बीच समान प्रतिस्पर्धी माहौल उपलब्ध कराना है।

भारत और ये सभी देश डब्ल्यूटीओ के सदस्य हैं। भारत, चीन सहित विभिन्न देशों से होने वाले सस्ते आयात से निपटने के लिए पहले भी कई उत्पादों पर डंपिंग रोधी शुल्क लगा चुका है। डीजीटीआर का उद्देश्य सीमा शुल्क अधिनियम और डब्ल्यूटीओ के प्रावधानों के तहत पारदर्शी एवं समयबद्ध जांच के माध्यम से डंपिंग और सब्सिडी जैसे व्यापार-विकृत करने वाले प्रभावों से घरेलू उद्योग की रक्षा करना तथा सरकार से आवश्यक शुल्क लगाने की सिफारिश करना है।

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