By नीरज कुमार दुबे | Aug 22, 2024
भारत में जनगणना का कार्य आखिरकार अगले माह से शुरू होने के आसार हैं। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक जनगणना का काम सितंबर से शुरू हो सकता है। हम आपको बता दें कि भारत में हर दस वर्ष में जनगणना का कार्य कराया जाता है। इस लिहाज से पिछली जनगणना 2021 में होनी थी लेकिन कोरोना महामारी के चलते इसे टाल दिया गया था। अब बताया जा रहा है कि अगले माह से जनगणना का कार्य शुरू हो सकता है जिसे पूरा होने में लगभग 18 महीने का समय लगेगा। हम आपको बता दें कि विपक्ष मोदी सरकार को इस बात के लिए घेर रहा है कि वह जनगणना नहीं करा पा रही है। विपक्ष यह भी कह रहा है कि जब भी जनगणना हो वह जाति आधारित गणना हो।
वैसे जनगणना की बात अभी मीडिया रिपोर्टों के हवाले से ही बाहर आई है। सरकार ने इन रिपोर्टों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं जताई है। इस बीच, कांग्रेस ने जाति आधारित जनगणना की मांग एक बार फिर उठाते हुए कहा है कि जनगणना की प्रश्नावली में एक अतिरिक्त कॉलम जोड़कर अन्य पिछड़े वर्गों (ओबीसी) का जातिवार आंकड़ा एकत्र किया जा सकता है। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि ऐसा होने से जाति जनगणना की व्यापक मांग पूरी होगी और सकारात्मक कार्य वाले कार्यक्रमों को और मजबूत आधार मिलेगा।
रमेश ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘भारत में हर 10 साल में नियमित रूप से जनगणना होती रही है। पिछली जनगणना 2021 में होनी थी और 2021 की जनगणना न होने का मतलब है कि आर्थिक योजना और सामाजिक न्याय के कार्यक्रमों के लिए जरूरी महत्वपूर्ण जानकारी एकत्र नहीं की जा सकी है। उदाहरण के लिए, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013/पीएम गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत 12 करोड़ से ज़्यादा भारतीयों को उनका कानूनी हक नहीं मिल पा रहा है।’’ उन्होंने कहा, "अब ऐसी खबरें हैं कि केंद्र सरकार अगले कुछ महीनों में लंबे समय से लंबित और अस्वीकार्य रूप से विलंबित इस जनगणना को करवा सकती है।" रमेश ने कहा, ‘‘1951 से हर जनगणना में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों की आबादी के बारे में जातिवार आंकड़ा एकत्र किया जाता रहा है। बिना किसी परेशानी के सिर्फ एक अतिरिक्त कॉलम जोड़कर जनगणना की प्रश्नावली में ओबीसी आबादी के बारे में भी जातिवार आंकड़ा एकत्र किया जा सकता है।" उन्होंने कहा कि ऐसा होने से जाति संबंधी जनगणना की व्यापक मांग पूरी होगी और सकारात्मक कार्य वाले कार्यक्रमों को और मजबूत आधार मिलेगा। रमेश ने कहा कि जनगणना संविधान की सातवीं अनुसूची के क्रमांक 69 में सूचीबद्ध है और यह केंद्रीय सूची के अंतर्गत आता है जिसका अर्थ है कि जनगणना कराना केवल केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है।