By नीरज कुमार दुबे | Feb 25, 2026
वर्तमान वैश्विक चुनौतियों, बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों और सीमाओं पर मंडराते खतरों को देखते हुए भारतीय सशस्त्र बल पूरी तरह सजग और सक्रिय हैं। देश के अलग-अलग हिस्सों में इस समय व्यापक सैन्य अभ्यासों की शृंखला चल रही है, जहां हमारी थल सेना, वायु सेना और विशेष बल न केवल स्वयं को परख रहे हैं बल्कि मित्र देशों के साथ संयुक्त अभ्यास कर अपनी संयुक्त मारक क्षमता को कई गुना बढ़ा रहे हैं। मरुस्थल से पर्वत तक, शहरी युद्ध से लेकर उच्च तकनीक आधारित नेटवर्क केंद्रित अभियान तक, हर मोर्चे पर भारतीय सेनाएं अपने कौशल को धार दे रही हैं और दुश्मन के दिल में भय की लकीर खींच रही हैं। देखा जाये तो मोदी सरकार ने रक्षा बलों को जिस निर्णायक और सक्रिय भूमिका में रखा है, उससे स्पष्ट है कि अब भारत केवल प्रतिक्रिया नहीं देता, बल्कि रणनीति गढ़ता है और पहल अपने हाथ में रखता है। आधुनिक हथियार, स्वदेशी तकनीक, तीव्र निर्णय क्षमता और राजनीतिक इच्छाशक्ति के इस संगम ने दुश्मनों को हतप्रभ कर दिया है और यह संदेश दे दिया है कि भारत की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने की कीमत बेहद भारी होगी।
देश में इस समय चल रहे विभिन्न सैन्य अभ्यासों की बात करें तो आपको बता दें कि वायु शक्ति अभ्यास ने दुश्मनों को पूरी तरह दहला दिया है। राजस्थान के जैसलमेर स्थित पोकरण फील्ड फायरिंग रेंज में भारतीय वायु सेना ने वायु शक्ति का फुल ड्रेस अभ्यास कर आसमान को युद्धभूमि में बदल दिया। सुखोई 30 एमकेआई ने दुश्मन के रनवे और ठिकानों को सटीक वार से ध्वस्त करने का अभ्यास किया, मिग-29 ने टैंकों के काफिले को नेस्तनाबूद करने की क्षमता दिखाई और आकाश मिसाइल प्रणाली ने आसमान में लक्ष्य भेद कर यह संदेश दिया कि भारत की ढाल और तलवार दोनों सजग हैं। सी-130 और सी-295 ने कठिन परिस्थितियों में लैंडिंग कर त्वरित तैनाती की ताकत दिखाई। प्रचंड और अपाचे हेलीकॉप्टरों की गर्जना के बीच गरुड़ कमांडो हेलीकॉप्टर से उतरे, इमारतों में घुसे, आतंकियों को ढेर किया और बंधकों को सुरक्षित बाहर निकाला। रात के अंधेरे में रनवे पर उतरता सी-130 मानो यह घोषणा कर रहा था कि भारतीय वायु सेना दिन हो या रात, हर घड़ी प्रहार के लिए तैयार है। इसके बाद ड्रोन शो ने भारत का मानचित्र रचा और ऑपरेशन सिंदूर की झलक दिखाकर यह स्पष्ट कर दिया कि तकनीक और साहस का यह संगम दुश्मन की हर साजिश पर भारी है। सामरिक दृष्टि से यह अभ्यास पश्चिमी मरुस्थल में तीव्र, सटीक और संयुक्त वायु अभियान की क्षमता का प्रदर्शन है। यह संदेश है कि भारत की वायु शक्ति दुश्मन के हवाई अड्डों, रसद शृंखला और बख्तरबंद ताकत को पलक झपकते पंगु बना सकती है।
वहीं Khadg Shakti अभ्यास की बात करें तो यह पश्चिमी मोर्चे पर इस्पाती संकल्प प्रदर्शित कर गया। पश्चिमी मोर्चे पर खड्ग शक्ति 2026 का समापन उस भरोसे के साथ हुआ कि भारतीय सेना हर चुनौती को कुचलने में सक्षम है। इस अभ्यास में सेना की कोर को जटिल और बहु आयामी युद्ध परिस्थितियों में परखा गया। सूचना के तीव्र प्रवाह, अनेक खतरों और सीमित समय में निर्णय लेने की स्थिति में मशीनीकृत बलों ने अपनी गतिशीलता और मारक क्षमता का प्रदर्शन किया। ड्रोन आधारित टोही, ड्रोन रोधी प्रणाली और वायु रक्षा इकाइयों ने संयुक्त रूप से अभियान क्षेत्र को सुरक्षित किया। अश्नी पलटन, दिव्यास्त्र बैटरी और शक्तिबाण रेजिमेंट ने निगरानी और सटीक गोलाबारी से दुश्मन की कल्पित चौकियों को ध्वस्त किया। सुरक्षित संचार नेटवर्क और उन्नत सेंसर ने युद्धभूमि को पारदर्शी बना दिया, जहां हर हरकत पर भारतीय सेना की नजर रही। इस अभ्यास का सामरिक महत्व स्पष्ट है कि पश्चिमी सीमा पर यदि कोई दुस्साहस करेगा तो उसे बहु स्तरीय प्रहार, तीव्र गति और तकनीक संचालित युद्ध शक्ति का सामना करना होगा। यह अभ्यास बताता है कि भारतीय सेना केवल रक्षा नहीं करती, वह निर्णायक जवाब देने की क्षमता रखती है।
वहीं Vajra Prahar अभ्यास विशेष बलों की अजेय जुगलबंदी दर्शा गया। हिमाचल प्रदेश के बकलोह स्थित स्पेशल फोर्सेस ट्रेनिंग स्कूल में वज्र प्रहार अभ्यास चल रहा है। भारतीय सेना और अमेरिकी सेना के विशेष बल 21 दिन तक पर्वतीय क्षेत्र में संयुक्त प्रशिक्षण कर रहे हैं। यह केवल अभ्यास नहीं, बल्कि युद्ध कौशल का गहन आदान प्रदान है। कठिन पहाड़ी इलाकों में आतंक विरोधी अभियान, विशेष ऑपरेशन की तकनीक और सामरिक समन्वय को धार दी जा रही है। वास्तविक परिस्थितियों जैसे परिदृश्यों में दोनों देशों के कमांडो अपनी सामूहिक क्षमता को परख रहे हैं। सामरिक रूप से यह अभ्यास भारत की वैश्विक सैन्य साझेदारी और विशेष बलों की क्षमता का विस्तार है। पर्वतीय सीमाओं पर यदि कोई खतरा उत्पन्न होता है तो भारतीय सेना के विशेष बल न केवल अकेले बल्कि मित्र सेनाओं के साथ तालमेल में भी दुश्मन को चकनाचूर करने की क्षमता रखते हैं। यह अभ्यास दुश्मन के लिए चेतावनी है कि भारतीय सेना का हाथ अब और लंबा, और प्रहार और घातक हो चुका है।
वहीं Dharma Guardian अभ्यास पूर्वी मित्रता और अटूट सुरक्षा का संकल्प दर्शाता है। उत्तराखंड के चौबटिया में धर्म गार्जियन 2026 के तहत भारत और जापान की सेनाएं संयुक्त शहरी युद्ध और आतंक विरोधी अभियान का अभ्यास कर रही हैं। दो सप्ताह तक सैनिक अस्थायी संचालन आधार स्थापित करने, आईएसआर ग्रिड विकसित करने, मोबाइल जांच चौकियां लगाने, घेराबंदी और तलाशी अभियान तथा हेलिबोर्न मिशन का अभ्यास कर रहे हैं। घर में घुसकर कार्रवाई की ड्रिल से लेकर सामूहिक योजना निर्माण तक हर पहलू को परिष्कृत किया जा रहा है। यह अभ्यास भारत जापान रक्षा साझेदारी के विस्तार का प्रतीक है। सामरिक दृष्टि से यह हिंद प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता और संतुलन का संदेश है। भारतीय सेना की पेशेवर क्षमता और अनुशासन ने मित्र राष्ट्रों का विश्वास जीता है। यदि क्षेत्रीय शांति को चुनौती दी गई तो यह साझेदारी सुरक्षा की दीवार बनकर खड़ी होगी।
इसके अलावा, Agni Varsha अभ्यास के जरिये मरुस्थल में अग्नि वर्षा दर्शाई गयी। दक्षिणी कमान के तत्वावधान में अग्नि वर्षा अभ्यास मरुस्थल की तपती धरती पर भारतीय सेना की संयुक्त युद्ध क्षमता को परख रहा है। सभी हथियारों के समन्वित प्रयोग, लंबी दूरी की सटीक मारक क्षमता और नेटवर्क आधारित कमान नियंत्रण प्रणाली के साथ यथार्थपरक वातावरण में अभियान चलाया जा रहा है। 25 देशों के अंतरराष्ट्रीय रक्षा पत्रकार इस अभ्यास को देख रहे हैं, जिससे विश्व के सामने भारतीय सेना की तकनीक, स्वदेशीकरण और निर्णायक कार्रवाई की क्षमता का प्रदर्शन हो रहा है। यह स्पष्ट घोषणा है कि भारत की थल सेना तेज, संगठित और निर्णायक है। सामरिक दृष्टि से अग्नि वर्षा पश्चिमी और दक्षिणी मरुक्षेत्र में त्वरित और गहन प्रहार की क्षमता का प्रमाण है। यदि राष्ट्रीय हितों पर आंच आई तो भारतीय सेना अग्नि की वर्षा कर दुश्मन की हर चौकी, हर जमावड़े और हर साजिश को राख में बदल देगी।
बहरहाल, इन सभी अभ्यासों की संयुक्त तस्वीर एकदम स्पष्ट दर्शा रही है कि भारतीय सैन्य बल आने वाले हर संभावित युद्ध के लिए खुद को पूर्ण रूप से तैयार कर रहे हैं। तकनीक से लैस कमान तंत्र, सटीक लंबी दूरी की मारक क्षमता, विशेष बलों की घातक दक्षता और आसमान पर पूर्ण नियंत्रण की तैयारी, इस बात का ऐलान है कि भारत अब हर चुनौती को जड़ से उखाड़ फेंकने की क्षमता रखता है। हमारी सेनाएं शांति की सबसे मजबूत गारंटी हैं, पर यदि किसी ने दुस्साहस किया तो जवाब इतना तीव्र, इतना व्यापक और इतना निर्णायक होगा कि दुश्मन को संभलने का अवसर तक नहीं मिलेगा। यह नया भारत है, जो सीमा पर आंख दिखाने वालों को शब्दों से नहीं, शक्ति से उत्तर देता है। भारतीय सैनिक का साहस, अनुशासन और बलिदान ही वह ज्वाला है जो हर साजिश को भस्म कर सकती है। जो भारत की ओर कुदृष्टि उठाएगा, वह याद रखे कि यह धरती वीरों की है और यहां से उठने वाली प्रतिघात की आंधी दुश्मन के किले, उसके हौसले और उसके भ्रम, सबको चकनाचूर कर देगी।
-नीरज कुमार दुबे