By अभिनय आकाश | Aug 30, 2025
भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद यानी यूएनएससी से ट्रैवल बैन वेवर मांग लिया है। ताकी अफगानिस्तान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी पहली बार भारत आ सके। ये कदम सिर्फ डिप्लोमैटिकशिप नहीं बल्कि पाकिस्तान के लिए एक बड़ा झटका है। देखा जाए तो भारत और अफगानिस्तान के रिश्ते हमेशा से स्ट्रैटजिक रहे हैं। 2001 के बाद भारत ने अफगानिस्तान में स्कूल, अस्पताल, लाइब्रेरी, सड़कें और पावर प्रोजेक्ट बनाए और यही वजह है कि आज आम अफगानी जनता के दिल में भारत के लिए सॉफ्ट कार्नर है। लेकिन जब 2021 में जब तालिबान ने काबुल पर कब्जा किया तो भारत ने सीधे संपर्क बनाने से परहेज किया।
आपको बता दें कि तालिबान के ज्यादातर नेता यूएन सिक्योरिटी काउंसिल रिसॉल्यूशन 988 के तहत सेंशन लिस्ट में हैं। मतलब बिना यूएनएससी की अनुमित के वो किसी देश की यात्रा नहीं कर सकते। यही वजह है कि भारत ने यूएनएससी की ट्रैवल बैन कमेटी को ट्रैवल बैन वेवर के लिए औपचारिक रिक्वेस्ट भेज दी है। अब सोचिए कि ये पाकिस्तान के लिए कितना बड़ा झटका होगा कि तालिबान का विदेश मंत्री पहली बार भारत की धरती पर कदम रखेगा। ये पाकिस्तान की हार मानी जाएगी। कुल मिलाकर कहे तो भारत ने अफगानिस्तान को लेकर अपना अप्रोच अब चेंज किया है। भारत लगातार अफगानिस्तान में लोगों के लिए काम तो कर ही रहा है। इसके साथ ही अफगानिस्तान में अंतरिम तालिबान सरकार के साथ बातचीत में भी लगा हुआ है ताकी अफगानिस्तान के लोगों की भलाई को सुनिश्चित किया जा सके और भारत के इस बदले रुख से तालिबान की सरकार भी काफी उत्साहित है।