भारत का बदला शुरू, अमेरिकी F-35 खरीदने से PM Modi ने मना कर दिया, अब आगे क्या?

By अभिनय आकाश | Aug 01, 2025

भारत ने अमेरिका को उसी की भाषा में जवाब दे दिया है। एक ऐसा जवाब जो सिर्फ कूटनीतिक ही नहीं रणनीतिक भी है। एक ऐसा झटका जिससे वाशिंगटन की इंडो पैसेफिक रणनीति की जड़े हिल गई। अब भारत ने एफ 35 स्टील्थ फाइटर जेट की डील को आधिकारिक तौर पर ठुकरा दिया है। ब्लूमबर्ग ने इसका दावा भी किया है। ये वही डील थी जो अमेरिका की तरफ से कई सालों से भारत को लुभाने के लिए इस्तेमाल की जा रही थी। भारत ने साफ कर दिया कि हम अपनी सुरक्षा अमेरिका की मर्जी से तय नहीं करेंगे। ट्रंप सरकार की टैरिफ फाइट के बीच अब दिल्ली वाशिंगटन डिप्लोमेसी में नई टकराहट सामने आई है। 31 जुलाई को डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के लिए 25 प्रतिशत तक के टैरिफ की घोषणा कर दी। ट्रंप प्रशासन के इस फैसले से भारत हैरान रह गया। फिलहाल भारत तुरंत किसी जवाबी कार्यवाही के मूड में तो नहीं है। लेकिन अमेरिकी दवाब से निपटने के लिए भारतीय अथॉरिटी ने कुछ विकल्पों पर गौर करना शुरू कर दिया है। इसमें एनर्जी यानी ऊर्जा और कम्युनिकेशन  से जुड़े सेक्टर्स में इपोर्ट बढ़ाने का प्लान शामिल है। लेकिन डिफेंस की खरीद नहीं है। 

इसे भी पढ़ें: Donald को सबक सिखाने के लिए भारत अपनाएगा 'Duck डिप्लोमेसी', 5 एक्शन ने उड़ जाएंगे अमेरिका के होश!

व्यापार वार्ता में रक्षा सौदे पर कोई चर्चा नहीं

हालाँकि भारत सरकार ने तत्काल जवाबी कार्रवाई से इनकार किया है, वह अमेरिका के साथ अपने व्यापार अधिशेष को कम करने के उपायों पर सक्रिय रूप से विचार कर रही है। जिन विकल्पों पर विचार किया जा रहा है उनमें अमेरिकी प्राकृतिक गैस, सोना और संचार उपकरणों का आयात बढ़ाना शामिल है। रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय अधिकारियों ने किसी भी व्यापार-बंद वार्ता में F-35 जैसी बड़ी सैन्य खरीद को शामिल करने से इनकार कर दिया है। दुनिया के सबसे उन्नत लड़ाकू विमानों में से एक, यह विमान लंबे समय से भारत को वाशिंगटन की रणनीतिक पेशकश का हिस्सा रहा है - जिसे एशिया में चीन के बढ़ते सैन्य प्रभाव का मुकाबला करने में मदद के एक उपकरण के रूप में देखा जाता है।

आत्मनिर्भरता पर ध्यान केंद्रित

रिपोर्ट के अनुसार, F-35 की पेशकश को अस्वीकार करके, भारत अपनी रक्षा निर्भरता को जानबूझकर कम करने का संकेत दे रहा है। इसके बजाय, सरकार "मेक इन इंडिया" अभियान के तहत रक्षा आत्मनिर्भरता के अपने दृष्टिकोण पर ज़ोर दे रही है। अधिकारी इस बात पर ज़ोर दे रहे हैं कि रक्षा क्षेत्र में भविष्य के सहयोग में प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और घरेलू उत्पादन शामिल होना चाहिए ताकि भारत की दीर्घकालिक रणनीतिक स्वायत्तता को वास्तव में लाभ मिल सके।

प्रमुख खबरें

Marathwada में बारिश की कमी से Sowing Area 3.5 लाख हेक्टेयर घटा, सोयाबीन पर जोर

Prabhasakshi NewsRoom: Iran के खिलाफ Trump ने शुरू किया Operation Economic Outcast, India-China पर भी पड़ेगा बड़ा असर!

Face Wash या Cleanser? अपनी Skin Type के हिसाब से चुनें सही Skin Care प्रोडक्ट, जानें 5 बड़े अंतर

Arunachal Pradesh: पुलिस ने 19 बच्चों को बाल तस्करी से बचाया, तीन दलाल गिरफ्तार