By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Aug 30, 2026
शिरीष बी प्रधान काठमांडू, 30 अगस्त भारत ने बाढ़ प्रभावित नेपाल को 68.5 टन राहत सामग्री उपलब्ध कराई है और खोज तथा बचाव अभियानों में सहायता के लिए तकनीकी टीम, फॉरेंसिक विशेषज्ञ और उपकरण भेजे हैं। भारतीय दूतावास ने यह जानकारी दी। काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास ने शनिवार को जारी एक बयान में कहा कि भारत ने एक विशेषज्ञ तकनीकी दल भेजा है, जिसमें सुरंग संबंधी विशेषज्ञ और खोज एवं बचाव अभियानों के लिए सहायक उपकरण शामिल हैं।
राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, टीम ने सुरंग क्षेत्र के आसपास बचाव संबंधी कार्य शुरू करने से पहले चिलिमे और लांगटांग क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण भी किया। नेपाल सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस के जवानों की 82 सदस्यीय संयुक्त सुरक्षा टीम शुक्रवार रात से मलबे को हटाने और सुरंग के भीतर फंसे लोगों तक पहुंचने के लिए काम कर रही है। आपदा के बाद नेपाल ने ‘डीएनए’ परीक्षण, फॉरेंसिक कार्य और अन्य विशिष्ट कार्यों के लिए कई देशों से मदद मांगी थी।
दूतावास ने बताया कि इसके अलावा 230 फुट लंबे ‘बेली ब्रिज’ के उपकरण लेकर 16 ट्रक नेपाल पहुंच चुके हैं। दूतावास ने कहा, ‘‘सात और बेली ब्रिज तैयार करने के लिए जल्द ही उपकरणों को पहुंचाया जाएगा। उन्हें तैयार करने के लिए तकनीकी टीम भी जल्द पहुंच सकती है।’’ नेपाल ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में परिवहन संपर्कों को बहाल करने के लिए 42 बेली ब्रिज के निर्माण के लिए भारत और चीन से सहायता मांगी है।
इन बेली ब्रिज को भारी मशीनरी या विशेष उपकरणों के बिना जल्दी से जोड़ कर तैयार किया जा सकता है। नेपाल सेना के अनुसार, नेपाली सुरक्षा बलों ने देश में विभिन्न जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों से अब तक 191 कर्मचारियों को निकाला है। हालांकि, सुरंगों के अंदर अधिक लोगों के फंसे होने की सूचना के बाद नेपाल ने भारत से सहायता मांगी।
नेपाल-तिब्बत सीमा के पास रसुवा जिले में अपर त्रिशूली-1 और त्रिशूली-3ए जलविद्युत परियोजनाओं से जुड़ी सुरंगों के अंदर कई लोगों के फंसे होने की आशंका है। भोटेकोशी और त्रिशूली नदी गलियारे में बुधवार को आई अचानक बाढ़ में सैकड़ों लोगों की मौत हो गई और सड़कों, पुलों, मानव बस्तियों और जलविद्युत बुनियादी ढांचे को व्यापक नुकसान पहुंचा।