By अभिनय आकाश | Apr 07, 2025
अमेरिका एक बार फिर सवाल उठाने के अपने एजेंडे के साथ सामने आया है। लेकिन इस बार कहानी सिर्फ टैरिफ तक सीमित नहीं है। इस बार अमेरिका ने भारत की आंतरिक नीतियों पर भी सवाल खड़े कर दिए। मगर भारत ने भी अबकी बार चुप्पी नहीं साधी बल्कि ऐसा जवाब दिया कि अमेरिकी वाणिज्य मंत्री तक चुप हो गए। हाल ही में अमेरिका के ट्रेड ऑफिस जिसे हम यूएस ट्रेड रिप्रजेंटेटिव कहते हैं। उन्होंने 2025 ट्रेड एस्टिमेट रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट में उन्होंने भारत की कई नीतियों को ट्रेड बैरियर कहा है। रिपोर्ट में मुख्य रूप से तीन पॉलिसी को टारगेट किया गया है। इनमें मेक इन इंडिया, पीएलआई स्कीम, डिफेंस इंडीजनाइजेशन, ऑफसेट पॉलिसी और डेटा लोकलाइजेशन के प्रयास शामिल हैं। उनका कहना है कि ये नीतियां अमेरिकी कंपनियों के लिए नुकसान दायक हैं। भारत अपने मार्केट को जानबूझकर बाहरी कंपनियों से बचा रहा है।
दरअसल, यूएस ने भारत के डेटा लोकलाइजेशन प्रयासों को डिजिटल ट्रेड के लिए बाधा बताया। लेकिन भारत ने साफ किया कि हमारे देश की नेशनल सिक्योरिटी और संप्रभुता से बड़ा कुछ नहीं। पेमेंट और यूजर डेटा का बाहर जाना भारत को खतरे में डाल सकता है। अमेरिका को ये समझना होगा कि डेटा नई सदी का ऑयल है। यूएस ने भारत के क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर्स पर भी सवाल उठाए हैं। लेकिन ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्स ने अमेरिका को दो टूक कहा कि क्वालिटी चेक हर देश करता है और भारत भी उसी रास्ते पर है। कुछ अमेरिकी ई कार्मर्स वेयर हाउस पर रेड भी हुई हैं क्योंकि उन्होंने सर्टिफिकेशन फॉलो नहीं किया।