By अभिनय आकाश | Oct 03, 2026
भारत ने रूस में एक बहुत बड़ी सफलता हासिल कर ली है। भारत ने अपने एक प्रोजेक्ट को फेल मान लिया था। लेकिन अचानक रूस में बहुत बड़ा चमत्कार हो गया। भारत पिछले करीब 40 सालों से एक स्वदेशी फाइटर जेट इंजन बनाना चाहता है जिसे कावेरी नाम दिया गया है। लेकिन इस प्रोजेक्ट में कुछ ना कुछ अड़चन आती रही। मगर अचानक भारत के इस कावेरी इंजन ने रूस में पहली अग्नि परीक्षा पास कर ली है। यह बहुत बड़ी सफलता है। भारत के लिए अब स्वदेशी फाइटर जेट इंजन बनाने का सपना फिर जिंदा हो गया है। भारत के स्वदेशी कावेरी ड्राई इंजन ने रूस में कठिन हाई एल्टीट्यूड और फ्लाइट ट्रायल्स सफलतापूक पूरे कर लिए हैं। रूस में कावेरी इंजन ने 48.5 k का थ्रस्ट पैदा कर दिया। जबकि इसका लक्ष्य 46 किलो न्यूटन था।
भारत ने रूस में जो कावेरी इंजन बनाया है, वह ड्राई थ्रस्ट इंजन है। यानी इस इंजन ने अपने बलबूते पर 48.5 किल न्यूटन का थ्रस्ट पैदा कर दिया। किसी भी फाइटर जेट को उड़ने के लिए ऐसा इंजन चाहिए जो कम से कम 80 किलटन का थ्रस्ट पैदा कर सके। यह इतनी ताकत है जो 8150 कि.ग्र. वजन वाली चीज को सीधे आसमान की तरफ उठा सके और लगातार उसे हवा में बनाए रखें। अगर इसी 80 किलटन की ताकत पैदा करने वाले इंजन में आफ्टर बर्नर लगा दिया जाए तो इंजन की ताकत 180 किटन तक पहुंच सकती है। भारत के पास जो रफाल विमान है वह 150 किटन का थ्रस्ट पैदा करते हैं। बहरहाल भारत का कावेरी इंजन 48.5 किटन का थ्रस्ट पैदा कर चुका है। अगर इसमें आफ्टर बर्नर लगा दिया जाए तो यह 80 किल न्यूटन तक पहुंचाया जा सकता है। यानी आगे चलकर भारत के स्वदेशी कावेरी इंजन को किसी लाइट कॉम्बैट फाइटर जेट में लगाया जा सकता है। फिलहाल तो भारत 48 किलो न्यूटन थ्रस्ट पैदा करने वाले इस कावेरी इंजन का इस्तेमाल घातक ड्रोनस में करने जा रहा है। यह ड्रोंस इतने खतरनाक होंगे कि दुश्मन के इलाके में बिना रडार की पकड़ में आए हमला कर सकते हैं।