By नीरज कुमार दुबे | Jan 14, 2026
भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूती देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई है। भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर और अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो के बीच टेलीफोन पर हुई बातचीत में दोनों देशों के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते, रक्षा सहयोग, ऊर्जा सुरक्षा और परमाणु क्षेत्र में सहयोग जैसे अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। भारतीय विदेश मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, यह बातचीत सकारात्मक माहौल में हुई और दोनों पक्षों ने आपसी संपर्क को और मजबूत बनाए रखने पर सहमति जताई। बातचीत के दौरान व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने की संभावनाओं पर विचार किया गया और यह माना गया कि आर्थिक सहयोग को नई गति देने से दोनों देशों को दीर्घकालिक लाभ मिल सकता है।
बातचीत के दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री ने भारत द्वारा हाल ही में परमाणु ऊर्जा से जुड़ा नया कानून लागू किए जाने पर भारत को बधाई दी। उन्होंने इसे भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। साथ ही यह भी कहा कि इससे भारत और अमेरिका के बीच नागरिक परमाणु सहयोग को और विस्तार मिलने की संभावना है। बातचीत में ऊर्जा क्षेत्र के साथ साथ महत्वपूर्ण खनिजों पर भी चर्चा हुई। दोनों देशों ने माना कि आधुनिक तकनीक, रक्षा उत्पादन और उन्नत उद्योगों के लिए इन खनिजों की भूमिका लगातार बढ़ रही है और इस क्षेत्र में सहयोग से आपसी निर्भरता और रणनीतिक साझेदारी को मजबूती मिलेगी।
रक्षा सहयोग को लेकर भी दोनों पक्षों ने विचार साझा किए। इस बात पर सहमति बनी कि रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र में आपसी तालमेल बढ़ाने से क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता को बल मिलेगा। इसके साथ ही साझा सैन्य अभ्यास, तकनीकी सहयोग और रक्षा उत्पादन में भागीदारी को आगे बढ़ाने के विकल्पों पर भी चर्चा हुई। बातचीत के दौरान इंडो पैसिफिक क्षेत्र की स्थिति पर भी विचार किया गया। दोनों नेताओं ने एक मुक्त, खुले और सुरक्षित इंडो पैसिफिक क्षेत्र के महत्व को रेखांकित किया और कहा कि इस क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखना साझा प्राथमिकता है।
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बातचीत को उपयोगी और सकारात्मक बताया। उन्होंने कहा कि भारत अमेरिका के साथ आर्थिक और सामरिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है और दोनों देशों के बीच सहयोग को व्यापक स्तर पर ले जाने की संभावनाएं मौजूद हैं।
इस बीच, विशेषज्ञों का मानना है कि यह बातचीत ऐसे समय पर हुई है जब वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक हालात तेजी से बदल रहे हैं। ऐसे में भारत और अमेरिका के बीच व्यापार, ऊर्जा और रक्षा सहयोग को लेकर बढ़ती सक्रियता दोनों देशों के रिश्तों को नई दिशा दे सकती है। साथ ही इस बातचीत को भारत अमेरिका संबंधों में एक और महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में उच्च स्तरीय बैठकों और वार्ताओं के जरिये इन मुद्दों पर ठोस प्रगति हो सकती है, जिससे दोनों देशों के बीच रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी और मजबूत होगी।
देखा जाये तो भारत अमेरिका के बीच हुई यह बातचीत बदलते वैश्विक हालात में आपसी प्राथमिकताओं का स्पष्ट संकेत है। व्यापार समझौते, परमाणु ऊर्जा और रक्षा सहयोग पर हुई चर्चा यह दिखाती है कि दोनों देश अब रिश्तों को प्रतीकात्मक साझेदारी से आगे ले जाकर ठोस रणनीतिक ढांचे में बदलना चाहते हैं। अमेरिका की बधाई और सहयोग का प्रस्ताव यह संकेत देता है कि वह भारत को केवल एक बाजार के रूप में नहीं, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय संतुलन के साझेदार के रूप में देख रहा है। वहीं भारत के लिए यह मौका है कि वह इस सहयोग को आत्मनिर्भरता, तकनीकी विकास और रणनीतिक स्वायत्तता के साथ जोड़े।
हालांकि भारत अमेरिका संबंधों का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि व्यापार और ऊर्जा जैसे अहम क्षेत्रों में फैसले कितनी तेजी और स्पष्टता से लिए जाते हैं। आज की वैश्विक राजनीति में अवसर उन्हीं को मिलते हैं जो समय पर निर्णय लेते हैं। बहरहाल, यह संवाद संकेत देता है कि अगर इच्छाशक्ति बनी रही तो भारत अमेरिका साझेदारी आने वाले वर्षों में न केवल आर्थिक बल्कि सामरिक स्तर पर भी निर्णायक भूमिका निभा सकती है।