By अंकित सिंह | Mar 03, 2026
कई हफ्तों के रोमांचक क्रिकेट के बाद टी20 विश्व कप 2026 अपने सबसे रोमांचक चरण पर पहुंच गया है। सुपर 8 के समापन के साथ ही अब सेमीफाइनल की तैयारी है। भारत ने वेस्टइंडीज को पांच विकेट से हराकर सेमीफाइनल में जगह पक्की कर ली। अब मौजूदा चैंपियन भारत 5 मार्च को मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में खेले जाने वाले दूसरे सेमीफाइनल में इंग्लैंड से भिड़ेगा। अभी तक कुल 4 आईसीसी टूर्नामेंट के सेमीफाइनल में दोनों टीमों का सामना हुआ है। वहीं ये रिकॉर्ड कांटे का है। जहां दो बार सेमीफाइनल में भारत को जीत मिली तो दो बार टीम इंडिया को अंग्रेजों के खिलाफ सेमीफाइनल में हार मिली। एक बार वनडे वर्ल्ड कप सेमीफाइनल और एक बार टी20वर्ल्ड कप सेमीफाइनल में इंग्लैड ने भारत को हराया है। वहीं भारत ने भी एक बार वनडे वर्ल्ड कप और एक बार टी20 वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में इंग्लैंड को मात दी है। ऐसे में भारत के लिए अंग्रेजों से पार पाना आसान नहीं होगा।
हालांकि, इस टूर्नामेंट में भारत किसी भी मायने में एक परिपूर्ण टीम नहीं है। लगभग सभी मैचों में उनका फील्डिंग प्रदर्शन निराशाजनक रहा है। उन्होंने कैच छोड़े हैं और फील्डिंग में गलतियां की हैं, जो दबाव वाले सेमीफाइनल में काफी नुकसान पहुंचा सकती हैं। भारत के स्टार सलामी बल्लेबाज अभिषेक शर्मा इस टूर्नामेंट में स्पिन गेंदबाजी के सामने संघर्ष करते नजर आए हैं और उनका आत्मविश्वास कम है। वे लगातार रन बनाने और भारत को आक्रामक शुरुआत दिलाने में नाकाम रहे हैं। वरुण चक्रवर्ती और हार्दिक पांड्या जैसे प्रमुख गेंदबाजों की लय में कमी भी एक बड़ी चिंता का विषय हो सकती है।
इस समय भारत की सबसे बड़ी ताकत यह है कि वे अपने घरेलू मैदान पर खेल रहे हैं। वे यहाँ की परिस्थितियों से भलीभांति परिचित हैं और वानखेड़े स्टेडियम में दर्शकों का समर्थन भी उनके पक्ष में होगा। भारत की एक और महत्वपूर्ण ताकत उनकी बल्लेबाजी की गहराई है। उनके पास ऐसे खिलाड़ी हैं जो कुछ ही ओवरों में मैच का रुख बदल सकते हैं। और जसप्रीत बुमराह को कौन भूल सकता है? वे वर्षों से भारतीय गेंदबाजी पंक्ति के अहम स्तंभ रहे हैं। दबाव वाले मैचों में, बुमराह कसी हुई गेंदबाजी करने और किसी भी समय महत्वपूर्ण विकेट लेने की क्षमता रखते हैं। पावरप्ले और डेथ ओवरों में उनका नियंत्रण नॉकआउट मैच में बड़ा अंतर ला सकता है।
टी20 विश्व कप शुरू होने से ठीक पहले, संजू सैमसन का प्रदर्शन लगातार खराब रहा। नतीजतन, उन्हें मौजूदा विश्व कप के शुरुआती कुछ मैचों में नहीं खिलाया गया और उनकी जगह ईशान किशन को मौका दिया गया। हालांकि, पारिवारिक आपातकाल के कारण रिंकू सिंह के टीम छोड़ने और राउंड-द-विकेट एंगल से गेंदबाजी करने वाले ऑफ-स्पिनरों के सामने भारतीय बाएं हाथ के बल्लेबाजों की परेशानी को देखते हुए, सैमसन को टीम में वापस जगह मिल गई। उन्होंने न केवल जिम्बाब्वे के खिलाफ मैच में जोरदार शुरुआत दी, जिससे बाकी बल्लेबाजों को खुलकर खेलने का मौका मिला, बल्कि वेस्टइंडीज के खिलाफ 97 रन की नाबाद मैच-विनिंग पारी खेलकर भारत को सेमीफाइनल में पहुंचाया। वेस्टइंडीज के खिलाफ उनकी आक्रामक पारी ने भारतीय टीम प्रबंधन द्वारा उन पर दिखाए गए भरोसे को सही साबित किया।
हैरी ब्रूक और उनकी टीम के लिए सबसे बड़ी चिंता इंग्लैंड के सलामी बल्लेबाज जोस बटलर की खराब फॉर्म है। अगर शीर्ष क्रम एक बार फिर विफल रहता है, तो मध्य क्रम पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है, जिसमें बड़े मैचों का अनुभव भी कम है और जो अच्छी फॉर्म में नहीं है। ब्रूक ही एकमात्र ऐसे खिलाड़ी हैं जिन्होंने लगातार कुछ अच्छी पारियां खेली हैं। इंग्लैंड का गेंदबाजी आक्रमण भी थोड़ा कमजोर नजर आता है। उनके पास ऐसे गेंदबाज नहीं हैं जो पावरप्ले या डेथ ओवरों में अच्छी फॉर्म में हों। हालांकि उनके पास स्पिन गेंदबाजी के कई विकल्प हैं, लेकिन मैच के महत्वपूर्ण चरणों में उनके विकल्प सीमित हैं, जो भारत जैसी बेहतर बल्लेबाजी टीम के खिलाफ उनके लिए परेशानी का सबब बन सकते हैं।
आईसीसी के नॉकआउट मैचों में इंग्लैंड एक खतरनाक टीम है। उनके पास ऐसे खिलाड़ी हैं जो अहम मौकों पर शानदार प्रदर्शन कर सकते हैं। मौजूदा टी20 विश्व कप में देखा गया है कि जब दूसरे बल्लेबाज नाकाम होते हैं तो इंग्लैंड के पास ऐसे खिलाड़ी होते हैं जो जिम्मेदारी संभालते हैं। इंग्लैंड के पास भारतीय परिस्थितियों में और शीर्ष स्तर के भारतीय खिलाड़ियों के खिलाफ खेलने का व्यापक अनुभव भी है। उनके कई खिलाड़ी इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में नियमित रूप से खेलते हैं, इसलिए बड़ी भीड़ के सामने और अपरिचित पिच की परिस्थितियों में खेलने का दबाव उनके लिए नया नहीं होगा।