By Ankit Jaiswal | Feb 26, 2026
चेन्नई का चेपॉक स्टेडियम एक बार फिर बड़े मुकाबले का गवाह बनने जा रहा है। भारतीय टीम गुरुवार को टी20 वर्ल्ड कप 2026 के सुपर एट्स चरण में जिम्बाब्वे से भिड़ेगा। यह मुकाबला भारत के लिए करो या मरो जैसा है, क्योंकि दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 76 रन की भारी हार के बाद टीम की सेमीफाइनल उम्मीदें कमजोर पड़ गई हैं।
मौजूद जानकारी के अनुसार सूर्यकुमार यादव की अगुवाई वाली टीम को न सिर्फ जिम्बाब्वे बल्कि वेस्टइंडीज के खिलाफ भी जीत दर्ज करनी होगी और साथ ही अन्य परिणामों पर भी नजर रखनी होगी। ऐसे में अब किसी भी तरह की चूक की गुंजाइश नहीं बची है।
गौरतलब है कि मुकाबला रात में खेला जाएगा और चेपॉक में इस समय दूसरी पारी के दौरान ओस बड़ा फैक्टर बनती है। मौसम विभाग के अनुसार मैच के दौरान ड्यू 80 से 90 प्रतिशत के बीच रह सकती है, जिससे दूसरी पारी में गेंद गीली और आउटफील्ड तेज हो सकता है।
इसी चुनौती से निपटने के लिए एमए चिदंबरम स्टेडियम में इस बार एक नया कदम उठाया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक ‘ड्यू क्योर’ नामक एक विशेष केमिकल का छिड़काव किया गया है, जिसे अमेरिका से मंगाया गया है। मंगलवार और बुधवार को मैदान पर इसका प्रयोग किया गया और गुरुवार दोपहर में भी इसे दोहराने की योजना है, ताकि रात में ओस का असर कम किया जा सके।
परंपरागत रूप से चेपॉक की पिच स्पिनरों के लिए मददगार मानी जाती है। यहां गेंद रुककर आती है और बल्लेबाजों को धैर्य दिखाना पड़ता है। लेकिन जब ओस पड़ती है तो गेंद फिसलने लगती है, जिससे स्पिनरों की पकड़ कमजोर हो जाती है और बल्लेबाजी आसान हो सकती है। ऐसे हालात में टॉस की भूमिका बेहद अहम हो जाती है और कप्तान अक्सर लक्ष्य का पीछा करना पसंद करते हैं।
दोनों टीमें अपने-अपने पिछले सुपर एट्स मुकाबले हारकर यहां पहुंची हैं। भारत को दक्षिण अफ्रीका ने पूरी तरह मात दी थी, जबकि जिम्बाब्वे को वेस्टइंडीज के खिलाफ 107 रन की करारी शिकस्त झेलनी पड़ी थी।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि भारत दबाव में किस तरह प्रदर्शन करता है। पिच, मौसम और ओस जैसे कारकों के बीच रणनीति और संयम ही इस मुकाबले का रुख तय करेंगे और फिलहाल सभी की निगाहें चेपॉक की इस निर्णायक जंग पर टिकी हुई हैं।