जनता, जमीन, सभ्यता वही, जहां चल रही अभी Modi 'Govern'ment, उस भारत पर कभी नेहरू ने किया Rule

By अभिनय आकाश | Jun 10, 2026

इतिहास की किताबों में आज का दिन एक नए अध्याय के रूप में दर्ज हो गया है। आज नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को पीछे छोड़ दिया है। यह मुकाबला किसी चुनावी रैली या टीवी डिबेट का नहीं था, बल्कि यह उस रिकॉर्ड का है जो किसी भी लोकतंत्र की रीढ़ होता है यानी जनता का अटूट भरोसा और पद पर निरंतरता। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल के लगातार 4399 दिन पूरे हो गए हैं, और इसी के साथ टूट गया है पंडित नेहरू का सबसे लंबा निरंतर बने रहने का रिकॉर्ड। लेकिन इस महा-रिकॉर्ड के भीतर छिपे दिलचस्प गणित को गौर से देखना होगा। कहने को नेहरू जी कुल 6130 दिन प्रधानमंत्री की कुर्सी पर रहे, लेकिन सच यह है कि उनके शुरुआती 1732 दिन 'इलेक्शन' से नहीं बल्कि 'सिलेक्शन' से तय हुए थे। 15 अगस्त 1947 को माउंटबेटन की सहमति और महात्मा गांधी के निर्देश पर कांग्रेस वर्किंग कमेटी ने उन्हें देश का मुखिया चुना था। असली लोकतंत्र की शुरुआत हुई 1952 के पहले आम चुनाव से, जब 13 मई 1952 को नेहरू जी एक निर्वाचित प्रधानमंत्री बने। उस दिन से लेकर उनके अंतिम समय तक का सफर 4398 दिनों का था। वहीं दूसरी तरफ, नरेंद्र मोदी का एक भी दिन बिना चुनाव के नहीं बीता। 26 मई 2014 से लेकर आज तक, उन्होंने लगातार तीन आम चुनावों में पूर्ण बहुमत और जनता के सीधे जनादेश की अग्निपरीक्षा को पार किया है। यह बदलाव सिर्फ आंकड़ों का नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र के बदलते मिजाज का प्रतीक है। पंडित नेहरू और नरेंद्र मोदी दोनों ने एक ही देश को चलाया। दोनों के पास वही जनता थी, वही जमीन थी, वही सभ्यता थी। लेकिन एक ने अपने राजनीतिक फैसलों से भारत को उसकी जड़ों से काटने का सतत प्रयास किया और दूसरे ने उन जड़ों को वापस सींचने का और आज हम उसी फर्क की बात करेंगे।

जब कई देशों में सरकारें बार-बार बदल रही हैं, 12 वर्षों तक नेतृत्व और नीतियों में निरंतरता।

2014, 19 व 24 में लगातार चुनाव जीतकर मोदी ने सरकार बनाई। 

नेहरू के बाद ऐसा करने वाले पहले पीएम हैं। पहले गैर-कांग्रेसी पीएम, जिन्होंने दो पूर्ण बहुमत कार्यकाल पूरे किए। 

मोदी राज की 12 बड़ी उपलब्धियां

2014: 58 करोड़ से ज्यादा जनधन बैंक खाते खोले गए।

2015: 51 लाख करोड़ का डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर। 4 लाख करोड़ का लीकेज रुका।

2016: उज्ज्वला में 11 करोड़

गरीबों को एलपीजी कनेक्शन। इसी साल उरी हमले के बाद पीओके में सर्जिकल स्ट्राइक।

2017: एकीकृत कर व्यवस्था की सबसे बड़ी योजना जीएसटी।

2018: आयुष्मान भारत से 60 करोड़ की स्वास्थ्य सुरक्षा।

2019: जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा और अनुच्छेद 370 खत्म।

2020-21: 220 करोड़ से ज्यादा कोविड वैक्सीन डोज।

2022: हर घर जल मिशन में 16 करोड़ घरों तक जल पहुंचा।

2023: पहली बार जी-20 की अध्यक्षता और सफल मेजबानी।

2024: अयोध्या राम मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा; भाजपा का प्रमुख वादा पूरा।

2025: जापान को पछाड़ चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था भारत।

2025: पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तान पर ऑपरेशन सिंदूर के तहत सैन्य कार्रवाई। 

32 देशों ने किया सम्मानित

पीएम मोदी को 32 देशों व अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं द्वारा सर्वोच्च या नागरिक सम्मान से सम्मानित किया गया है। इनमें मुख्य रूप से फ्रांस, रूस, सऊदी अरब और यूएई का सम्मान शामिल है। मोदी ने अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, समेत दुनिया के 15 देशों की संसद को संबोधित किया है।

सत्ता हासिल करना लक्ष्य नहीं

गांधीजी ने कांग्रेस की 15 प्रांतीय समितियों में से 12 द्वारा सरदार पटेल के पक्ष में दिए गए समर्थन को दरकिनार करते हुए नेहरू का समर्थन किया, जबकि बाकी 3 समितियां तटस्थ रहीं। बाद में नेहरू ने भारत के पहले बड़े राजनीतिक वंश की नींव रखी और इंदिरा गांधी को अपना उत्तराधिकारी बनाने की दिशा में काम किया। नरेंद्र मोदी ने बीजेपी के लिए कई चुनाव जिताए, लेकिन स्वयं कोई निर्वाचित पद नहीं मांगा। 51 वर्ष की उम्र में पार्टी के कहने पर उन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री की क जिम्मेदारी संभाली। मोदी को अधिकांश नेताओं से अलग करने वाली बात उनके क उद्देश्य की स्पष्टता है। उनका लक्ष्य कभी केवल सत्ता हासिल करना नहीं रहा। गांधीजी की तरह सेवा और त्याग उनके लिए सिर्फ शब्द नहीं, जीवन का उद्देश्य है। आने वाले दशकों में नरेंद्र मोदी एक प्रतिष्ठित और ऐतिहासिक व्यक्तित्व के रूप में स्थापित होंगे। भविष्य के प्रधानमंत्री, चाहे किसी भी दल के हों, वे नरेंद्र मोदी की कार्यशैली और नेतृत्व से प्रेरणा लेने की कोशिश करेंगे। आने वाले समय में हर प्रधानमंत्री का मूल्यांकन नरेंद्र मोदी द्वारा स्थापित मानकों के आधार पर किया जाएगा।

मोदी जिस शासन को चला रहे, उस देश पर नेहरू ने कभी राज किया

पीएम मोदी भारत की सरकार चलाते हैं, विरोधी भले ही कहें कि वे बहुत सख्ती से काम करते हैं, लेकिन शायद भारत जैसे देश को चलाने के लिए ऐसी ही सख्ती चाहिए। पर नेहरू ने भारत में सरकार नहीं चलाई, नेहरू ने भारत पर राज किया। राज करने और सरकार चलाने में एक छोटा सा फर्क है। अंग्रेजी शब्द "गवर्न" असल में एक यूनानी शब्द से बना है जिसका मतलब होता है जहाज को रास्ता दिखाना। देश रूपी जहाज को अपनी मनपसंद दिशा में ले जाने के लिए सिर्फ मजबूत इरादा ही काफी नहीं होता। अच्छी तरह सरकार चलाने के लिए नेता को राजनीति की हवा और चुनाव के उतार-चढ़ाव को समझना पड़ता है। एक तानाशाह कभी भी अच्छी सरकार नहीं चला सकता। अमेरिकी अंग्रेजी में जिस "रूलर" शब्द का इस्तेमाल होता है, उसे ही हम भारत में मापने वाला "स्केल" कहते हैं। इसका सीधा सा मतलब यह हुआ कि जो नेता राज करता है, वो समाज को अपनी मर्जी और अपने पैमाने से हांकता है, उसे सीधा करता है। वो खुद समाज के हिसाब से नहीं बदलता, बल्कि पूरे समाज को उसके हिसाब से बदलना पड़ता है। आजादी के वक्त पंडित नेहरू भारी बहुमत के साथ सत्ता के शीर्ष पर बैठे थे और अपनी हुकूमत के दौरान उन्होंने इस प्रचंड बहुमत को बनाए रखा। नतीजा क्या हुआ? जब अखबारों ने उनके खिलाफ लिखना शुरू किया, तो नेहरू जी ने प्रेस पर सेंसरशिप लगाने की ताकत अपने हाथ में ले ली। जब देश के बड़े उद्योगपतियों ने उनकी पंचवर्षीय योजनाओं का विरोध किया, तो उन्होंने खुद को यह पावर दे दी कि वे जब चाहें उन निजी कंपनियों का राष्ट्रीयकरण कर दें, यानी उन्हें सरकारी घोषित कर दें। इसके उलट, मोदी तीन बड़े पॉलिसी लक्ष्यों के साथ सत्ता में आए थे। उन्हें आर्टिकल 370 हटाने में पाँच साल और राम मंदिर बनने में लगभग 10 साल लग गए। भारत में अभी भी यूनिफॉर्म सिविल कोड नहीं है और 2029 से पहले इसके आने की संभावना भी कम है।

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