By अंकित सिंह | Aug 16, 2021
सरकार के होने और ना होने से कितना फर्क पड़ता है यह अफगानिस्तान के लोगों को देखने के बाद आपको पता चल सकता है। लोकतंत्र क्या है और लोकतंत्र नहीं होने की स्थिति में क्या हो सकता है इसे भी अफगानिस्तान के ताजा हालात से समझा जा सकता है। आज हम अपने इस कार्यक्रम में जानेंगे अफगानिस्तान के ताजा हालात के बारे में। इसके अलावा हम यह भी जानेंगे कि जिस पेगासस मद्दे को लेकर पूरा संसद सत्र हंगामेदार रहा, आज उस मामले की सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। आखिर सरकार ने कोर्ट में क्या कहा?
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि पेगासस जासूसी के आरोपों में “छिपाने के लिये कुछ भी नहीं” है और वह इस मामले के सभी पहलुओं के निरीक्षण के लिये प्रमुख विशेषज्ञों की एक विशेषज्ञ समिति बनाएगी। प्रधान न्यायाधीश एन वी रमण, न्यायमूर्ति सूर्य कांत और न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस की तीन सदस्यीय पीठ को सरकार ने बताया कि यह मुद्दा “काफी तकनीकी” है और इसके सभी पहलुओं की विशेषज्ञों द्वारा जांच की जरूरत है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ को बताया, “छिपाने के लिये कुछ भी नहीं है। विशेषज्ञों की समिति से इसकी जांच की जरूरत है। यह बेहत तकनीकी मुद्दा है। हम इस क्षेत्र के प्रमुख तटस्थ विशेषज्ञों की नियुक्ति करेंगे।” जासूसी के आरोपों की जांच को लेकर याचिका दायर करने वाले वरिष्ठ पत्रकार एन राम और शशि कुमार की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि सरकार का हलफनामा यह नहीं बताता कि सरकार या उसकी एजेंसियों ने जासूसी सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया या नहीं। सुनवाई के दौरान सिब्बल ने कहा, “हम नहीं चाहते कि सरकार, जिसने पेगासस का इस्तेमाल किया हो या उसकी एजेंसी जिसने हो सकता है इसका इस्तेमाल किया हो, अपने आप एक समिति गठित करे।” इससे पहले, दिन में केंद्र ने हलफनामा दायर कर सर्वोच्च न्यायालय को बताया कि पेगासस जासूसी के आरोपों को लेकर स्वतंत्र जांच की मांग करने वाली याचिकाएं “अटकलों, अनुमानों” और मीडिया में आई अपुष्ट खबरों पर आधारित हैं।