99% भारतीय निर्यात पर अब कोई शुल्क नहीं, पीयूष गोयल ने भारत-EU व्यापार समझौते को बताया 'ऐतिहासिक उपलब्धि'

By रेनू तिवारी | Jan 27, 2026

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार को भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक "गेम-चेंजर" करार दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस समझौते के तहत भारत को यूरोपीय बाजार में मूल्य के हिसाब से अपने 99 प्रतिशत से अधिक निर्यात के लिए रियायती शुल्क (Duty-free/Concessional) पर पहुंच मिलेगी। इससे घरेलू श्रम-प्रधान क्षेत्रों को बढ़ावा मिलेगा। दोनों पक्षों ने 27 जनवरी को मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के लिए वार्ता के समापन की घोषणा की।

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गोयल ने सोशल मीडिया पर लिखा, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, यूरोपीय आयोग के अध्यक्ष वोंडरलेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा के नेतृत्व में भारत और यूरोपीय संघ ने सबसे बड़े समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। गोयल ने कहा कि यह समझौता देश की वैश्विक व्यापार भागीदारी में एक रणनीतिक उपलब्धि है, जिससे 1.4 अरब लोगों के लिए 20 हजार अरब डॉलर के यूरोपीय संघ बाजार में विशाल अवसर खुलेंगे।

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उन्होंने कहा, यह ऐसा समझौता है जो हमारे निर्यात के 99 प्रतिशत से अधिक हिस्से को अभूतपूर्व बाजार पहुंच देता है, जिससे हमारे श्रम-प्रधान क्षेत्रों को जबरदस्त प्रोत्साहन मिलेगा और ‘मेक इन इंडिया’ को मजबूती मिलेगी। उन्होंने बताया कि यह साझेदारी दुनिया की चौथी और दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच हुई है, जो वैश्विक व्यापार के लगभग एक-तिहाई हिस्से का प्रतिनिधित्व करती हैं। उन्होंने कहा कि इससे भारतीय व्यवसायों के लिए बड़े व्यापार और निवेश अवसर पैदा होंगे और एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम), महिलाएं, युवा, कारीगर, श्रमिक, छात्र, कुशल पेशेवर, मछुआरे, किसान और निर्यातकों को लाभ मिलेगा।

उन्होंने कहा, संवेदनशील क्षेत्रों को बचाने के लिए सावधानी बरतने के साथ, उच्च मूल्य वाले यूरोपीय संघ के बाजार में बड़े पैमाने पर संभावनाएं खोलते हुए ग्रामीण आजीविका भी सुरक्षित की गई है। मंत्री ने कहा, भविष्य के लिए तैयार गतिशीलता ढांचे के साथ सेवा क्षेत्र में एक बड़ी जीत हासिल की गई है जो हमारे कुशल भारतीय पेशेवरों के लिए वैश्विक अवसरों का विस्तार करने में मदद करेगी।

गोयल ने कहा कि यह समझौता भविष्य का द्वार है, क्योंकि इससे भारत उच्च-मूल्य वाली नौकरियां पैदा कर सकेगा, नवाचार को गति मिलेगी और वैश्विक स्तर पर प्रतिभा व सतत आर्थिक वृद्धि के लिए एक प्रतिस्पर्धी केंद्र के रूप में भारत की स्थिति मजबूत होगी।

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