By अभिनय आकाश | Jan 31, 2026
अगर सवाल पूछा जाए कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने पहले कार्यकाल में भारत के लिए अच्छे थे या दूसरे कार्यकाल में तो आप बिना देर लगाए जवाब देंगे कि डोनाल्ड ट्रंप जब पहली बार राष्ट्रपति बने थे तभी वह भारत के लिए अच्छे थे। क्योंकि उस समय उन्होंने जमकर भारत की तारीफ की थी। पाकिस्तान को खूब सुनाया था। लेकिन आपको बता दें कि ऐसा सोचने वाले ज्यादातर लोग गलत हैं। दरअसल सच यह है कि डॉनल्ड ट्रंप भारत के लिए अब ज्यादा अच्छे साबित हो रहे हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक डोनाल्ड ट्रंप भारत के लिए एक बड़ा कूटनीतिक खजाना साबित हो रहे हैं। ट्रंप अपनी अकड़, अपने अहंकार और अपनी गलतफहमी से भारत को एक बड़ी सुपर पावर बनाने जा रहे हैं।
ट्रंप ने उस वर्ल्ड ऑर्डर को पूरी तरह से तहस-नहस कर दिया है जो सेकंड वर्ल्ड वॉर से चला आ रहा था। अगर डॉनल्ड ट्रंप अपने सनकी और गुस्सैल रवैया से मौजूदा वैश्विक सिस्टम को नहीं तोड़ते तो दुनिया वैसे ही चलती रहती जैसे दशकों से चली आ रही है। डॉनल्ड ट्रंप की वजह से ही अब भारत दुनिया की इकलौती उम्मीद बन गया है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण हाल ही में देखने को मिला जब इजराइल ने ऐतिहासिक फैसला लेते हुए यह ऐलान कर दिया कि वह अगले 10 सालों में अमेरिका पर अपनी सैन्य और आर्थिक निर्भरता को खत्म करने की कोशिश करेगा। इसी के साथ इजराइल ने यह भी ऐलान कर दिया कि वह भारत के साथ एक बड़ा फ्री ट्रेड एग्रीमेंट साइन करेगा। इजराइल अपने बड़े-बड़े हथियारों की प्रोडक्शन भी भारत में शिफ्ट करने पर विचार कर रहा है और यह सब कुछ डोनल्ड ट्रंप के अहंकार की वजह से ही हो रहा है।
27 जनवरी को जिस तरह से यूरोपियन यूनियन ने भारत के साथ मदर ऑफ ऑल डील्स यानी एक बड़ा फ्री ट्रेड एग्रीमेंट साइन किया तो उसने भारत को दुनिया के मंच पर सबसे ऊपर बैठा दिया। यह वही यूरोप है जो दशकों से भारत का अपमान करता आ रहा है। भारत को थर्ड वर्ल्ड कंट्री बोलता आ रहा है। लेकिन आज यही यूरोप लॉन्ग लिव इंडिया के नारे लगा रहा है। यूरोप को द्वितीय विश्व युद्ध से ही यह लगता आ रहा है कि वह दुनिया में सबसे ताकतवर है। उसकी सेना और अर्थव्यवस्था सबसे आगे है। ट्रंप ने सिर्फ 3 महीनों में यूरोप की यह गलतफहमी दूर कर दी। डॉन्ड ट्रंप की धमकियों के बाद यूरोप को पता चला कि वह कितना कमजोर हो चुका है। यूरोप अपनी अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए भारत से डील कर रहा है। यहां तक कि जब डॉन्ड ट्रंप ने डेनमार्क के अधिकार वाले ग्रीनलैंड पर कब्जे की बात कही तब भी यूरोप कुछ नहीं कर पाया।