देखिये स्त्री शक्ति का कमाल, विश्व शक्ति से 2+2 वार्ता में हासिल की बड़ी उपलब्धियां

By नीरज कुमार दुबे | Sep 07, 2018

भारत और अमेरिका के बीच पहली टू-प्लस-टू वार्ता दोनों देशों के गहराते संबंधों की प्रतीक है। यह देखना काफी सुखद रहा कि भारत की स्त्री शक्ति ने विश्व शक्ति अमेरिका के साथ द्विपक्षीय मुद्दों सहित वैश्विक मुद्दों पर बातचीत भी की और उसके सकारात्मक परिणाम भी तत्काल ही सामने आये। अमेरिका के विदेश मंत्री आर. पोम्पियो और रक्षा मंत्री जेम्स मैटिस की भारत यात्रा के दौरान भारतीय समकक्षों सुषमा स्वराज और निर्मला सीतारमण ने जिस दृढ़ता और तैयारी के साथ भारत की चिंताओं को उठाया वह काबिलेतारीफ है। इस वार्ता से हालांकि भारत को कई उपलब्धियां हासिल हुईं लेकिन सबसे बड़ी उपलब्धि ऐतिहासिक सुरक्षा समझौता है। आइए जानते हैं इस टू-प्लस-टू वार्ता की बड़ी बातों के बारे में-

भारत और अमेरिका के बीच हुए करार के तहत भारतीय सेना को अमेरिका से सैन्य ग्रेड संचार उपकरण और महत्वपूर्ण एन्क्रिप्टिड (कूट रूप से सुरक्षित) रक्षा प्रौद्योगिकियां मिलेंगी। सीओएमसीएएसए (कॉमकासा) करार होने से भारत को अमेरिका से महत्वपूर्ण रक्षा प्रौद्योगिकियां हासिल करने में मदद मिलेगी और यह अमेरिकी सशस्त्र बलों की अहम संचार नेटवर्क तक पहुंच प्रदान करेगा। इसके तहत भारत और अमेरिका संवेदनशील सैन्य सूचनाओं का सुरक्षित तरीके से आदान-प्रदान कर सकेंगे। इसके तहत रियल टाइम सूचनाएं भी साझा कर सकेंगे। खास बात यह है कि यह समझौता तत्काल प्रभावी हो गया है। यह अमेरिकी और भारतीय सशस्त्र बलों के बीच पारस्परिकता सुनिश्चित करेगा। यह समझौता 10 वर्ष की अवधि के लिए मान्य होगा। एक और बड़ी बात यह है कि इससे अमेरिका से मंगाये जा रहे रक्षा प्लेटफॉर्मों पर उच्च सुरक्षा वाले अमेरिकी संचार उपकरणों को लगाया जा सकेगा।

यह समझौता भारत में इन आशंकाओं के कारण लंबे समय से लंबित था कि इसके प्रावधान अमेरिका को भारत के सैन्य प्लेटफॉर्म पर नजर रखने की अनुमति दे सकते हैं क्योंकि वे अमेरिकी संचार नेटवर्क से जुड़े रहेंगे। रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने माना है कि कॉमकासा से भारत की रक्षा तैयारियों को बढ़ाया जा सकेगा। उल्लेखनीय है कि कई देशों ने अमेरिका के साथ कॉमकासा पर हस्ताक्षर किये हैं। कॉमकासा अमेरिका और भारत के बीच रक्षा प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के लिए एक कानूनी ढांचा भी उपलब्ध करायेगा और अमेरिका से समुद्री गार्डियन ड्रोन जैसे महत्वपूर्ण उपकरणों को हासिल करने में मदद करेगा।

एनएसजी

भारत और अमेरिका नयी दिल्ली को परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह की सदस्यता जल्द-से-जल्द दिलाने के लिए एक साथ मिलकर काम करने पर भी सहमत हुए हैं। दोनों देशों ने इस दिशा में काम करने का संकल्प जताया है। वार्ता के बाद जारी एक संयुक्त वक्तव्य में कहा गया, “अमेरिका ने ऑस्ट्रेलिया समूह, वासेनेर संधि और मिसाइल प्रौद्योगिकी नियंत्रण व्यवस्था में भारत के प्रवेश का स्वागत किया था और परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह में भारत को शामिल किये जाने के लिए अपने पूर्ण समर्थन की बात को फिर से दोहराता है।” 

रूस और ईरान मुद्दा

सुषमा स्वराज और निर्मला सीतारमण से बातचीत के बाद अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने कहा कि रूस और ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंध से भारत को छूट देने के लिये वार्ता चल रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका का भारत जैसे बड़े रणनीतिक भागीदार को ‘दंडित’ करने का इरादा नहीं है। पोम्पियो ने कहा कि अमेरिका एक रूसी मिसाइल और वायु-रक्षा प्रणाली यानी एस-400 की खरीद पर भारत के साथ काम करेगा। उल्लेखनीय है कि भारत की रूस से करीब 4.5 अरब डॉलर में पांच एस-400 मिसाइल रक्षा प्रणाली खरीदने की योजना है। यह खरीद अमेरिकी कांग्रेस द्वारा स्थापित प्रतिबंध अधिनियम कानून सीएएटीएसए का उल्लंघन है। एस-400 मिसाइलें और अन्य रक्षा प्लेटफॉर्म खरीदने की भारत की योजना पर अमेरिका ने कहा है कि वह दशकों पुराने भारत-रूस रक्षा और सैन्य सहयोग को समझता है।

वार्ता के दौरान, भारत ने देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए ईरानी कच्चे तेल पर निर्भरता के बारे में अमेरिका को बताया। इस पर अमेरिकी पक्ष ने कहा कि वह इस स्थिति से निपटने में मदद करेगा और दोनों पक्ष इस मुद्दे पर बातचीत करेंगे। उल्लेखनीय है कि अमेरिका ने सभी देशों से कहा है कि वे चार नवंबर तक ईरान से अपने तेल का आयात शून्य कर लें। उस समय प्रतिबंध पूरी तरह प्रभावी हो जाएंगे।

भारत ने प्रतिबंधों से प्रभावित ईरान में चाबहार बंदरगाह परियोजना में नयी दिल्ली की भागीदारी के रणनीतिक महत्व का जिक्र किया, खासकर अफगानिस्तान के साथ व्यापार के लिए। अमेरिका ने इस विचार से सहमति व्यक्त की।

एच1बी वीज़ा

टू-प्लस-टू वार्ता के दौरान विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने एच1बी वीजा का मुद्दा अमेरिकी समकक्ष के सामने प्रमुखता के साथ उठाया। सुषमा ने बातचीत के बाद कहा भी कि ‘‘मैंने पोम्पिओ से इसका उल्लेख किया है कि राष्ट्रपति ट्रम्प और प्रधानमंत्री मोदी के बीच की दोस्ती के आधार पर, भारतीयों का मानना है कि अमेरिका उनके हितों के खिलाफ काम नहीं करेगा। मैंने उनसे भारतीयों के भरोसे को कायम रखने को कहा है।’’ 

विदेश और रक्षा मंत्रालयों के बीच हॉट लाइन

अमेरिका और भारत के बीच रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग को बढ़ावा देने के लिये पोम्पियो और रक्षा मंत्री जेम्स मैटिस के साथ विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ पहली 2+2 बातचीत के बाद दोनों देशों ने विदेश और रक्षा मंत्रालयों के बीच हॉटलाइन स्थापित करने का निर्णय लिया है। एक और बड़ी बात यह है कि दोनों देशों के बीच हुई ‘टू प्लस टू’ वार्ता में लिये गये फैसलों के क्रियान्वयन की निगरानी का निर्णय भी लिया गया है। विदेश और रक्षा मंत्रालयों के बीच हॉटलाइन के जरिए अमेरिकी विदेश मंत्री पोम्पियो और भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज तथा रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण और अमेरिकी रक्षा मंत्री मैटिस लगातार संपर्क में रह सकेंगे।

पाकिस्तान को दी चेतावनी

संयुक्त बयान के अनुसार, दोनों देशों ने पाकिस्तान से यह सुनिश्चित करने को कहा कि उसके भूभाग का उपयोग अन्य देशों में आतंकवादी हमलों को अंजाम देने के लिए नहीं हो। बयान के अनुसार 2008 के मुंबई हमले की 10वीं बरसी पर दोनों देशों ने पाकिस्तान से मुंबई, पठानकोट और उरी तथा सीमा पार से हुए अन्य आतंकवादी हमलों के साजिशकर्ताओं को शीघ्रता से न्याय की जद में लाने को कहा है।

अन्य बड़ी बातें:

-हाल में अमेरिका द्वारा सामरिक व्यापार प्राधिकरण-1 लाइसेंस छूट सूची में भारत को शामिल किया जाना भारत के मजबूत और जिम्मेदार निर्यात नियंत्रण नीति को दिखाता है।

-एक संयुक्त बयान में कहा गया है कि तेजी से बढ़ते अपने सैन्य संबंधों की पहचान करते हुए दोनों पक्षों ने एक नए त्रि-सेना अभ्यास के साथ-साथ संयुक्त रूप से सैन्य प्लेटफार्मों और उपकरणों के विस्तार का दायरा बढ़ाने का भी फैसला किया। पहला त्रि-सेना, थलसेना, नौसेना और वायु सेना अभ्यास अगले वर्ष होगा।

-अमेरिकी विदेश मंत्री पोम्पियो ने सुषमा स्वराज, मैटिस और निर्मला सीतारमण के साथ संयुक्त मीडिया ब्रीफिंग में कहा, "हम वैश्विक शक्ति के रूप में भारत के उभरने का पूरी तरह से समर्थन करते हैं तथा हम अपनी साझेदारी के लिए भारत की समान प्रतिबद्धता का स्वागत करते हैं।" 

-अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने भारत को आश्वासन दिया कि रूस के साथ उसके संबंध भारत-अमेरिका दीर्घावधिक रणनीतिक सहयोग को प्रभावित नहीं करेंगे।

-ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग के बारे में संयुक्त बयान में कहा गया है कि दोनों पक्षों ने भारत में छह परमाणु ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना के लिए परमाणु ऊर्जा निगम लिमिटेड (एनपीसीआईएल) और वेस्टिंगहाउस इलेक्ट्रिक कंपनी के बीच सहयोग तथा असैनिक परमाणु ऊर्जा भागीदारी के पूर्ण कार्यान्वयन के लिए प्रतिबद्धता जतायी।

बहरहाल, द्विपक्षीय संबंधों के विस्तार तथा रणनीतिक भारत प्रशांत क्षेत्र समेत वैश्विक रणनीतिक सहयोग को बढ़ाने पर केंद्रित भारत और अमेरिका के बीच की यह टू-प्लस-टू वार्ता जाहिर करती है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, दोनों देशों के संबंधों को आगे ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं और इसी प्रतिबद्धता का भांप कर दोनों देशों का प्रशासन समझौतों की राह में आ रही अड़चनों को दूर करने में लगा हुआ है।

-नीरज कुमार दुबे

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