Shaurya Path: Indian Army ने उतारी ड्रोन वाली घातक फौज, Shaurya Squadron से दुश्मन का खेल पल भर में होगा खत्म

By नीरज कुमार दुबे | Mar 26, 2026

भारत की रणभूमि अब बदल चुकी है और इस बदलाव का नाम है शौर्य स्क्वॉड्रन। हम आपको बता दें कि मध्य प्रदेश में बाबीना फील्ड फायरिंग रेंज में झांसी के पास हुए तेरह दिन के भीषण सैन्य अभ्यास ने यह साफ कर दिया कि भारतीय सेना अब सिर्फ ताकत से नहीं, बल्कि तकनीक, गति और सटीकता से युद्ध जीतने की दिशा में आगे बढ़ चुकी है। यह अभ्यास आने वाले युद्धों की झलक था। 31 बख्तरबंद डिवीजन के नेतृत्व में हुए इस अभ्यास में शौर्य स्क्वॉड्रनों ने जिस तरह से अपनी क्षमता दिखाई, उसने दुश्मनों के लिए साफ संदेश दे दिया है कि अब भारत की टैंक शक्ति पहले से कहीं ज्यादा घातक और अचूक हो चुकी है।

हम आपको बता दें कि भारतीय सेना ने इस अवधारणा को इस तरह विकसित किया है कि अब युद्ध केवल जमीन पर नहीं, बल्कि आकाश और इलेक्ट्रॉनिक क्षेत्र में भी एक साथ लड़ा जाएगा। शौर्य स्क्वॉड्रन का मुख्य लक्ष्य है सेंसर से वार तक के समय को न्यूनतम करना, यानी दुश्मन दिखते ही तत्काल उसे खत्म करना। यह वही रणनीति है जो आधुनिक युद्ध की रीढ़ बन चुकी है। दुश्मन के पास प्रतिक्रिया का समय ही नहीं बचेगा। यह सीधा, तेज और निर्णायक युद्ध मॉडल है।

हम आपको बता दें कि बाबीना में हुए अभ्यास अमोघ ज्वाला में टैंक, आक्रमण हेलीकॉप्टर, लड़ाकू विमान और ड्रोन को एक साथ जोड़कर युद्ध का वास्तविक परिदृश्य तैयार किया गया। शौर्य स्क्वॉड्रनों ने यहां दिखाया कि कैसे ड्रोन पहले दुश्मन की पहचान करते हैं, फिर टैंकों को मार्गदर्शन देते हैं और जरूरत पड़ने पर खुद ही सटीक हमला करते हैं। इस तालमेल ने युद्ध को एक नए स्तर पर पहुंचा दिया है। दक्षिणी कमान ने भी माना कि इस अभ्यास में वास्तविक समय निगरानी, समन्वित आक्रमण और त्वरित निर्णय लेने की क्षमता ने युद्धक्षेत्र में निर्णायक बढ़त दिलाई।

देखा जाये तो हाल के अभियानों से मिले अनुभवों खासकर ऑपरेशन सिंदूर के दौरान के अनुभव ने यह समझा दिया है कि बिना ड्रोन के आधुनिक युद्ध अधूरा है। यही कारण है कि अब तेजी से शौर्य स्क्वॉड्रनों को हर बख्तरबंद रेजीमेंट में शामिल करने की योजना पर काम चल रहा है। हम आपको बता दें कि इस समय सेना के पास 67 बख्तरबंद रेजीमेंट हैं और पांच हजार से ज्यादा टैंक हैं। इन सभी के साथ ड्रोन इकाइयों को जोड़ने का मतलब है कि हर टैंक अब अकेला नहीं, बल्कि एक संपूर्ण युद्ध प्रणाली का हिस्सा होगा।

हम आपको बता दें कि शौर्य स्क्वॉड्रनों का सबसे बड़ा सामरिक लाभ है गहराई में सटीक हमला। दुश्मन के ठिकानों, रसद व्यवस्था और हथियार प्रणालियों को बिना सीधे भिड़े नष्ट किया जा सकता है। इसके अलावा, ये ड्रोन दुश्मन के संकेतों को बाधित करने, बारूदी सुरंगें बिछाने या हटाने और यहां तक कि चिकित्सा सहायता पहुंचाने का भी काम करते हैं। यानी यह केवल हमला नहीं, बल्कि संपूर्ण युद्ध संचालन की रीढ़ बन चुके हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि इससे हमारे टैंक दुश्मन के घातक हथियारों जैसे टैंक रोधी मिसाइल और मंडराते हथियारों से सुरक्षित रहते हैं।

देखा जाये तो भारतीय सेना ने साफ कर दिया है कि वह पुराने ढांचे पर निर्भर रहने वाली नहीं है। अब ध्यान कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्वचालित प्रणाली और झुंड तकनीक पर है। शौर्य स्क्वॉड्रन इस दिशा में एक मजबूत कदम हैं। यह केवल एक इकाई नहीं, बल्कि भविष्य के युद्ध की आधारशिला हैं। सेना कमांडरों ने भी इसे तकनीक आधारित युद्ध की दिशा में एक क्रांतिकारी बदलाव बताया है।

बहरहाल, भारत की सैन्य शक्ति अब केवल संख्या में नहीं, बल्कि गुणवत्ता, तकनीक और रणनीति में भी दुश्मनों से कई कदम आगे निकल चुकी है। शौर्य स्क्वॉड्रन इस बात का प्रमाण हैं कि भारतीय सेना हर चुनौती के लिए तैयार है और आने वाले युद्धों में निर्णायक बढ़त हासिल करने के लिए पूरी तरह सक्षम है। जो देश युद्ध के बदलते स्वरूप को समझता है, वही जीतता है। और भारत ने यह साबित कर दिया है कि वह केवल तैयार नहीं, बल्कि आगे बढ़कर नेतृत्व करने के लिए भी तैयार है।

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